Wednesday, November 13, 2019

दिल ढूंढता है फिर वही फुरसत के रात दिन-गोपालगंज से पटना


गोपालगंज के बसडीला में रात को रामचंद्र चाचा जी के घर सोने से पूर्व चाची ने कहा था कि सुबह 4 बजे घर के बाहर से ही पटना की सीधी बस मिल जाएगी। बस स्टैंड जाने की कोई जरूरत नहीं है। 
तो हमलोग चार बजे सुबह के बाद तैयार होकर घर से बाहर निकल हाईवे एनएच 27 पर खड़े हो गए। थोड़ी देर में बस आई। हाथ देने पर रोक दिया। अतुल कंपनी की बस सासामूसा से चलती है। टू बाई टू एसी बस का पटना का किराया 210 रुपये है। कंपनी मेड बॉडी वाली बस का इंटिरियर शानदार है। बस में वीडियो फिल्म पर गाना चल रहा है - दिल ढूंढता है फिर वही फुरसत के रात दिन...

सुबह का उजाला होने लगा है। पटना जाने वाली बस में कुछ हंसते-मुस्कराते चेहरे नजर आए। मैं खिड़की के पास वाली एक सीट पर बैठ गया। बस गोपालगंज बाजार में बस स्टैंड में पहुंची। पांच मिनट रुकने के बाद आगे बढ़ चली है। अगला पड़ाव है थावे। थावे में माता का प्रसिद्ध मंदिर है। थावे के बाद हम पहुंचे हैं मीरगंज।

मीरगंज गोपालगंज जिले का प्रमुख शहर है जो पिछले कुछ सालों में व्यापारिक केंद्र बनकर उभरा है। मीरगंज से चलकर हमारी बस अब सीवान पहुंच गई है। बबुनिया मोड़ होते हुए सीवान शहर से बस आगे निकल गई। अब पटना जाने वाली बसें सीवान से छपरा होकर नहीं जाती हैं। राज्य सरकार द्वारा बनाए गए सड़कों नए संजाल के कारण कई वैकल्पिक सड़के बन गई हैं।

बस का अगला पड़ाव है मलमलिया। यहां रास्ते में हनुमान गढ़ मंदिर दिखाई देता है। यह इस इलाके का प्रसिद्ध मंदिर है। बस सारण जिले में प्रवेश कर चुकी है। अगले पड़ाव हैं मधुरी और बहरौली बाजार। इसके बाद आता है मशरक। मशरक सारण जिले का प्रमुख बाजार और छपरा थावे रेल मार्ग का प्रमुख स्टेशन है।

परसा और राहुल सांकृत्यायन - मशरक के बाद हम पहुंच गए हैं तरैया। और तरैया के बाद अमनौर। अमनौर के बाद सोनहो और उसके बाद परसा बाजार। परसा में मुझे परसा थाना और परसा के इंटर कॉलेज के भवन नजर आए हैं। पर परसा से गुजरते हुए महापंडित राहुल सांकृत्यायन की खूब याद आई। ये पूरा इलाका महान घुमक्कड़ विद्वान राहुल जी का कार्यक्षेत्र रहा है। परसा में राहुल जी एक मठ में मंहथ बनकर रहे। इसी क्षेत्र में उन्होने किसानों के लिए आंदोलन किया। अपनी पुस्तक संघर्ष के साथी में उन्होंने सारण जिले के तमाम लोगों को याद किया है। परसा, अमनौर और तरैया के लोग आज भी राहुल सांकृत्यायन को याद करते हैं।


अमनौर और परसा के बाद दरियापुर नामक कसबा आया। और इसके बाद आया शीतलपुर। शीतलपुर मेरे लिए पूर्व परिचित नाम है। अब नयागांव, परमानंदपुर जैसे गांव हमारे जाने पहचाने हैं। ये सोनपुर छपरा रेल मार्ग के रेलवे स्टेशन हैं, जिनसे होकर मैं अनगिनत बार गुजरा हूं। अब बस सोनपुर पहुंच गई है।

सोनपुर में गंडक का नया पुल पारकर बस हाजीपुर पहुंच गई है। उसी शहर में जहां मैंने अपने जीवन के कई साल गुजारे। पर अभी तो हाजीपुर में रुकना नहीं है। यहां से आगे बढ़ते हुए महात्मा गांधी सेतु पहुंच गई है। महात्मा गांधी सेतु चार लेन का गंगा पर 1984 का बना पुल है। समय से बहुत पहले ध्वस्त हो चुके इस पुल का दो लेन सुपर स्ट्रक्चर तोड़ा जा चुका है। इस पर अब अंग्रेजों के जमाने की तरह लोहे का पुल बनाया जा रहा है। मैं देख रहा हूं कि पुल के एक बार फिर निर्माण का काफी काम हो चुका है। अब इस पुल को एफकान्स ( सपूरजी पालनजी समूह) बनवा रहा है। पटना में पहुंचते ही अगमकुआं के स्टाप पर मैं बस से उतर जाता हूं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com

-        (GOPALGANJ, THAWE, MIRGANJ, SIWAN, MASHRAK, MALMALIA, PARSA, AMNAUR, SONPUR ) 
अगली कडी से चलेंगे अंदमान निकोबार की यात्रा पर.... 

2 comments:

  1. बहुत बढ़िया वर्णन गोपालगंज से पटना bus यात्रा का और दिल ढूंढता है गीत से लेकर राहुल जी और हाजिपुर के पुराने दिन बढ़िया लेख

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