Thursday, October 10, 2019

तुलसीपुर – दसहरी आम की मिठास


तुलसीपुर चौराहे पर लगा पथ संकेतक बता रहा है कि यहां से बलरामपुर 26 किलोमीटर, श्रावस्ती 41 किलोमीटर और अयोध्या की दूरी 124 किलोमीटर है। गर्मी की दोपहरी में तुलसीपुर चौराहे पर  गन्ने का जूस पीने के बाद आगे चल पड़ा हूं। हालांकि रेलवे स्टेशन की तरफ बैटरी रिक्शा भी जा रहे हैं, पर मैं कस्बे को देखता हुआ पैदल ही चल पड़ा। रास्ते में तुलसीपुर तहसील का दफ्तर आया। इसके आगे बढ़ने पर रेलवे का फाटक आ गया। 
मैं यहां से रेलवे लाइन पकड़कर स्टेशन की तरफ चल पड़ा। सामने तुलसीपुर रेलवे स्टेशन दिखाई दे रहा है। रेलवे स्टेशन पर दो ही प्लेटफार्म हैं, एक अप और एक डाउन ट्रेनों के लिए। तुलसीपुर रेलवे स्टेशन पर दिनभर में गिनती की रेलगाडियां ही रुकती हैं। कुछ साल पहले ये ट्रैक मीटर गेज हुआ करता था। अब ब्राडगेज सिंगल लाइन का ट्रैक है। रेलवे स्टेशन पर लगे एक बोर्ड में तुलसीपुर में स्थित पाटेश्वरी मंदिर के बारे में जानकारी दी गई है। पर स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं के नाम पर कुछ खास नहीं है। रेलवे स्टेशन के आसपास रहने के लिए कोई होटल आदि नहीं है।

रेलवे स्टेशन के बाहर सुलभ शौचालय और स्नानागार है। मैं यहां स्नान करने के लिए चला गया। जून की दोपहर की गर्मी है। तो पसीने से तरबतर हूं। इसके बाद मंदिर जाना है तो वैसे भी स्नान जरूरी है। तरोताजा होकर एक बार फिर तुलसीपुर की सड़क पर हूं। 

यहां आम खूब बिक रहे हैं। ज्यादातर दशहरी आम हैं। इसका भाव यहां महज 30 रुपये किलो के आसपास है। पर ये दशहरी दिल्ली में मिलने वाले दशहरी से काफी अलग है। ये पेड़ का पका हुआ आम है। इसकी शक्ल सूरत काफी अलग है। देखने में सुंदर खाने में सुस्वादु। हमें दिल्ली में जो आम मिलता है उसे कच्चा तोड़ा जाता है और बाद में गैस से पकाया जाता है। इसलिए ऐसे आम को ज्यादा मात्रा में खाना सेहत के लिए हानिकारक हो जाता है। पर लखनऊ से कर्नलगंज, गोंडा, बलरामपुर से लेकर सिद्धार्थनगर इलाके में जो आम मिल रहे हैं उनकी खुशबू भी अलग है और स्वाद भी। जी तो करता है कुछ दिन यहीं रुक कर बस आम ही आम खाता रहूं। आम मेरा सबसे पसंदीदा फल है। इसका स्वाद मेरी कमजोरी भी। वैसे तो तुलसीपुर बलरामपुर जिले की तहसील का छोटा सा शहर है जहां कारोबारी चाक-चिक्य के नाम पर कुछ खास नहीं। पर यहां के आमों ने तो मेरा मन मोह लिया।

रेलवे स्टेशन से देवी पाटन मंदिर की दूरी तकरीबन डेढ़ किलोमीटर है। यह दूरी मैं पैदल टहलते हुए तय करता हूं। मंदिर के करीब पहुंचने से पहले सड़क के दोनों तरफ बाजार शुरू हो गया है। कुछ खाने पीने की और कपड़ों की दुकाने दिखाई दे रही हैं। थोड़ी देर चलने के बाद सड़क के दाहिनी तरफ मंदिर का प्रवेश द्वार दिखाई देता है। यहां से अंदर की तरफ तकरीबन 200 मीटर चलने के बाद मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंच गया हूं। यहां पर पहुंचने के बाद रौनक बढ़ गई है। वैसी ही रौनक जैसी किसी हिंदू मंदिर के आसपास होती है। जय मां पाटेश्वरी।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
-        ( TULSIPUR, BALRAMPUR, RAILWAY STATION, MANGO, DASAHARI )




2 comments:

  1. जय माँ देवीपाटन, बहुत अच्छा यात्रा वर्णन

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  2. अगली कड़ी में पढ़ें... देवी पाटन मंदिर के बारे में

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