Tuesday, October 8, 2019

बलरामपुर से तुलसीपुर – राप्ती नदी और चीनी की मिठास


बलरामपुर बस स्टैंड से मुझे तुलसीपुर की बस लेनी है। दोपहर के एक बजे हैं। आधे घंटे बाद यानी डेढ़ बजे तुलसीपुर की बस जाने वाली है। इस बीच बहुत गर्मी है तो गला तर करने के लिए मैं शीतल पेय (लिम्का) पीने लगा। 
दुकानदार से तुलसीपुर की बस के बारे में पूछा तो उसने बताया कि दोपहर दो बजे के बाद वहां जाने के लिए बस मिलने की कोई गारंटी नहीं होती। बलरामपुर जिला मुख्यालय से तुलसीपुर महज 30 किलोमीटर है। तुलसीपुर बलरामपुर जिले की तहसील है पर सार्वजनिक परिवहन की इतनी कमी। यह सुनकर आश्चर्य होता है। 

खैर बस चल पड़ी है। ये बस बढ़नी तक जाने वाली है। तीन किलोमीटर बाद झारखंडी नामक रेलवे स्टेशन दिखाई दिया। यह बलरामपुर शहर का ही एक छोटा रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन के पास कुछ ठीक-ठाक बाजार दिखाई देता है। यहां पर विश्वास लॉज और होटल पथिक जैसे आवासीय होटल भी दिखाई देते हैं।

प्रिंसले स्टेट था बलरामपुर - इस क्षेत्र में शहर की कुछ प्राचीन इमारते दिखाई देती हैं। ऐसी ही एक प्राचीन इमारत में आईसीआईसीआई बैंक की शाखा है। आगे महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद इंटर कॉलेज की प्राचीन इमारत दिखाई देती है। बलरामपुर शहर की स्थापना 16वीं सदी में बलरामदास ने की थी। यह ब्रिटिश काल में एक प्रिंसले स्टेट हुआ करता था। पर आज यह यूपी के अन्य शहरों की तुलना में विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गया है।


प्राचीन कौसल राज और श्रावस्ती - बस बलरामपुर शहर से बाहर निकल चुकी है। देखकर अच्छा लग रहा है कि बुद्धिस्ट सर्किट के नाम पर अब सड़क का चौड़ीकरण कार्य जारी है। बलरामपुर इलाका देश के सोलह महाजनपद में से कोशल क्षेत्र हुआ करता था। तब इसकी राजधानी श्रावस्ती थी। प्राचीन श्रावस्ती नगर बलरामपुर से 25 किलोमीटर की दूरी पर है। यह भी बौद्ध सर्किट में महत्वपूर्ण स्थान है। श्रावस्ती नगर भगवान बुद्ध को काफी प्रिय था। यहां बुद्ध अपने जीवन काल में 24 बारिश के मौसम यानी चतुर्मास यहीं गुजारे।

पर आजकल बलरामपुर देश भर में चीनी मिल के लिए जाना जाता है। यह देश की सबसे बड़ी चीनी मिलों में से एक है। 
जी हां, बलरामपुर चीनी मिल देश की दूसरी सबसे बड़ी चीनी मिल है। इलाके में इस समूह की कुल छह चीनी मिले हैं। बलरामपुर चीनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध सम्मानित कंपनी है। इस कंपनी की स्थापना 1975 में कमलनयन सारावगी ने की थी। इन दिनों विवेक सारावगी इस कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं।


राप्ती नदी को पार कर तुलसीपुर - बलरामपुर जिले की बड़ी सीमा पड़ोसी देश नेपाल के साथ साझा होती है। जिले की सीमा गोंडा, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर जिले से भी साझा होती है। हमारी बस के छोटी सी नदी के पुल को पार कर रही है। इसका पानी बिल्कुल साफ है। यह वेस्ट राप्ती नदी की धारा है। नेपाल से निकलने वाली यह नदी यूपी के सीमांत जिले के कई शहरों से घूमती हुई डुमरियागंज, गोरखपुर होते हुए बरहज के पास घाघरा में जाकर मिल जाती है।

ये लिजिए हमारी बस तुलसीपुर पहुंच गई है। मैं शहर के चौराहे पर उतर गया। भरी गरमी में एक गिलास गन्ने का रस पीने के बाद लोगों से पूछने पर पता चला कि तुलसीपुर रेलवे स्टेशन यहां से दो किलोमीटर दूर है। मैं पैदल ही स्टेशन की ओर चल पड़ा। रास्ते में एक बोर्ड नजर आया जिसपर लिखा था तुलसीपुर से दिल्ली और पंजाब के लिए सीधी बस सेवा शुरू हो चुकी है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-          ( BALARMAPUR, TULSIPUR, RAPTI RIVER, SUGAR MILL )  बलरामपुर चीनी की वेबसाइट-  https://chini.com


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