Sunday, October 6, 2019

गाजियाबाद जंक्शन से लखनऊ जंक्शन - चारबाग

यूं तो मैं गाजियाबाद में रहता हूं पर गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ने का मौका कम ही मिलता है। पर इस बार हमारी लखनऊ जाने वाली ट्रेन गाजियाबाद से है। नई दिल्ली लखनऊ एसी एक्सप्रेस रात को 12.05 बजे गाजियाबाद स्टेशन पर मिलती है। मैं 20 मिनट पहले गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया हूं।
यूं तो गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार की तरफ कोई विशाल भवन नहीं है।सिर्फ एक टिकट घर है। पर अब स्टेशन के प्रवेश द्वार को सुंदर बनाने के लिए कुछ म्युरल बनाए गए हैं। साथ ही एक लोकोमोटिव का मिनिएयचर यहां पर स्थापित किया गया है। जून के महीने में स्टेशन के बाहर सैकड़ो लोग खुले में सो रहे हैं।
लखनऊ एसी एक्सप्रेस का समय हो गया है। मैं प्लेटफार्म नंबर 3 पर पहुंच जाता हूं। हमारा कोच बिल्कुल सीढ़ियों के पास ही आकर लगा। ट्रेन का ठहराव महज दो मिनट का है। आगे से पीछे तक वातानुकूलित ट्रेन का समय कुछ ऐसा है कि दिल्ली से चलते ही लोग खा-पीकर ट्रेन में सो जाते हैं। मैं भी जाते ही अपनी मिडल बर्थ पर सोने का उपक्रम करता हूं। पर मेरे नीचे वाली बर्थ पर एक अत्यंत पढ़ाकू लड़की है। वह मद्धिम रोशनी में भी अंग्रेजी का उपन्यास पढ़ रही है। थोड़ी देर बाद वह सो गई तब रोशनी बुझाई जा सकी। ट्रेन मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर को पार करती हुई सुबह अपने समय से आधे घंटे पहले चार बाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंच गई।

इस बार बाहर निकलने पर पर मैं लखनऊ जंक्शन मतलब चार बाग रेलवे स्टेशन को बड़े गौर से देखता हूं। स्टेशन की विशाल इमारत लाल रंग की है। दिल्ली और कानपुर की इमारत की तरह।

दो बार बापू आए यहां पर - स्टेशन से बाहर लगे एक शिलापट्ट पर जानकारी दी गई है 26 से 29 दिसंबर 1916 के बीच कांग्रेस अधिवेश लखनऊ में हुआ था। तब यहां बापू आए थे रेलगाड़ी से। यहीं पर उनकी मुलाकात पहली बार पंडित जवाहर लाल नेहरू से हुई थी। बापू दूसरी बार कांग्रेस के सम्मेलन में हिस्सा लेने 1936 में लखनऊ आए थे।
टमटम की सवारी - रेलवे स्टेशन के बाहर सवारी का इंतजार कर रहे घोड़ा गाड़ी यानी टमटम को देखकर सुखद आश्चर्य होता है। अब शहरों में यह टमटम कहां दिखाई देते हैं। पर लखनऊ में रेलवे स्टेशन मेट्रो स्टेशन, सिटी बस आटो रिक्शा के बीच इस टमटम के लिए भी स्पेश है। 


खुशी की बात है सहअस्तित्व का भाव जीवित है। वरना अब किसी महानगर में टमटम कहां दिखाई देता है। नई पीढ़ी के बच्चों ने तो टमटम की सवारी भी नहीं की होगी। 


मीटर गेज का स्टीम लोकोमोटिव - रेलवे स्टेशन के बाहर एक मीटर गेज का विशाल स्टीम लोकोमोटिव भी प्रदर्शित किया गया है। इस स्टीम इंजन का नंबर वाईजी 3474 है। इस लोकोमोटिव का निर्माण टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव ने किया था। इस लोको का इस्तेमाल मालगाड़ियों की ढुलाई के लिए किया जाता था। यह 1964 का बना हुआ लोकोमोटिव है। इसने लंबे समय तक अपनी सेवाएं गुजारात के वाकानेर स्टीम शेड में दी। बाद में इसे लखनऊ जंक्शन के बाहर लाकर स्थापित कर दिया गया।

स्टेशन से बाहर निकल आया हूं। थोड़ी भूख लगी है तो देखता हूं कि लखनऊ जंक्शन के बाहर भी लिट्टी चोखा मिल रहा है। बीस रुपये में तीन लिट्टी और चोखा। फिर क्या है। सुबह का नास्ता तो यहीं पर कर लिया जाए फिर आगे बढ़ते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com
( GAZIAABAD, LUCKNOW, RAIL, AC EXPRESS, TAMTAM ) 





2 comments:

  1. वाह आपको भी ग़ाज़ियाबाद से ट्रेन पकड़ने का अवसर मिल गया....बढ़िया जानकारी चारबाग स्टेशन के बारे ने...एक बार 2004 से में भी हिमगिरी एक्सप्रेस यहां से पकड़ चुका हूं...

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