Friday, October 4, 2019

जयपुरी रजाई और विश्व विरासत शहर जयपुर

जयपुर के सिटी पैलेस और बड़ी चौपड़ के आसपास राजस्थानी प्रिंट वाले कपड़ों की असंख्य दुकाने हैं। जयपुर और आसपास के इलाके ब्लॉक प्रिंटिंग वाले कपड़े बेडशीट, चादरे, बंधेज आदि के लिए जाने जाते हैं। पर इन सबके बीच आपने जयपुरी रजाई की चर्चा भी खूब सुनी होगी।

जयपुरी रजाई काफी हल्की होती है।आमतौर पर यह 250 ग्राम रूई से बनाई जाती है। पर यह सर्दी में काफी अच्छी होती है। जयपुरी रजाई वजन में हल्की होती है। कहने को तो यह रजाई है पर यह आपके बैग में आसानी से समा जाती है। आमतौर पर जयपुर आने वाले देसी विदेशी सैलानी जयपुरी रजाई जरूर खरीदते हैं। कई लोग रेल यात्रा में ऐसी रजाई साथ लेकर चलना पसंद करते हैं।

हल्की और शानदार - आमतौर पर ये रजाई सूती कपड़े की होती है। पर कई बार इसे रेशमी और मखमली कवर वाली भी बनाया जाता है। आमतौर पर जयपुर रजाई सिंगल बेड की होती है पर डबल बेड वाली रजाई का भी यहां निर्माण होता है।

पांच हजार कारीगर - जयपुर शहर और उसके आसपास रोजाना करीब छह हजार कारीगर पांच हजार जयपुरी रजाइयां तैयार करते हैं। ये सारी रजाइयां खप जाती हैं। इनकी मांग दूसरे शहरों में भी है। पर अगर आप इन्हें जयपुर से खरीदते हैं तो थोड़ी सस्ती पड़ती है।
राजस्थान में जयपुरी रजाई बनाने की शाही परंपरा रही है। जयपुर शहर बसाने के बाद राजा सवाई जय सिंह ने देश के कोने कोने से कारीगरों के बुलाकर अपने शहर में बसाया था। इनमें से एक कारीगर इलाही बक्श थे जिन्होंने राजघराने के लिए रजाइयों के निर्माण का कार्य किया था।

100 ग्राम और 250 ग्राम की रजाई - सिटी पैलेस के गेट सामने मुझे कादर बख्श की रजाइयों की दुकान दिखाई देती है। इसमें दावा किया गया है कि उन्होने 250 ग्राम रुई में डबल बेड की रजाई बनाई है। ये रजाई उन्होंने प्रधानमंत्री मोराजी देसाई, राजीव गांधी ,  इंद्र कुमार गुजराल और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भेंट की है। पर दुकान नंबर 10 और दुकान नंबर 11 दोनो में एक जैसे दावे किए गए हैं और तस्वीरें भी लगाई गई हैं। दरअसल ये दोनों दुकाने एक ही परिवार की लगती हैं। दुकान नंबर 10 के कारीगर मोहम्मद हनीफ ने 100 ग्राम रुई की रजाई बनाने का दावा किया है। उन्होने भी अपनी रजाई राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भैरो सिंह शेखावत को भेंट की थी।

जयपुरी रजाइयों में हाथ का बारीक काम देखने को मिलता है। इनमें मलमल, मखमल और रेशम के कपड़ों का इस्तेमाल इसके कवर को बनाने के लिए होता है। आमतौर पर ये रजाइयां रंग बिरंगी होती हैं। हालांकि आजकल बाजार में हल्के मिंक ब्लैंकेट खूब आने लगे हैं। ये मुलायम होते हैं। पर इन सबके के बीच जयपुरी रजाइयों की मांग बनी हुई है। ब्रिटेन, डेनमार्क और जर्मनी के बाजार में भी इन रजाइयों की मांग है।

सिर्फ रजाई ही नहीं जयपुर की सड़कों से आप लेदर के बने उम्दा किस्म के सामान भी खरीद सकते हैं। खासतौर पर लेदर के बने बैग और पर्स आदि की खरीददारी कर सकते हैं।



यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में जयपुर - साल 2019 में जयपुर शहर के नाम एक और तमगा जुड़ गया। 6 जुलाई को वास्तुकला की शानदार विरासत और जीवंत संस्कृति के लिए मशहूर ऐतिहासिक शहर जयपुर ने शनिवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में जगह बना ली। भारत देश में अहमदाबाद के बाद इस तरह की पहचान पाने के साथ जयपुर देश का दूसरा शहर बन गया है। विश्व विरासत बनने के साथ ही गुलाबी नगरी की शान और भी बढ़ गई है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 
-        ( JAIPURI RAJAI, QUILT )

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