Thursday, October 24, 2019

फ्रांस. चीन और कोरिया के मोहक बौद्ध मंदिर


लुंबिनी में अलग अलग देशों के बौद्ध मठ मंदिर वन क्षेत्र के बीच में बने नहर के पूर्व और पश्चिमी किनारे पर बने हैं। अब मैं नहर के पश्चिमी तट पर बने मंदिरों को देखने निकल पड़ा हूं। पर इस भीषण गर्मी में बार बार पानी और जूस का सहारा लेना पड़ रहा है, ताकि कड़ी धूम में साइकिल चलाते हुए शरीर में पानी की कमी न पड़ जाए।

मुझे कुछ लोग किराये पर बैटरी रिक्शा लेकर तो कुछ लोग डिजाइनर रिक्शे में भी घूमते हुए नजर आए। बैटरी रिक्शा वाले दो घंटे में प्रमुख मंदिरों को घुमाने के लिए दो घंटे का 400 रुपये लेते हैं। अगर आपने समय ज्यादा लिया तो वे अतिरिक्त रुपये मांगेंगे। साइकिल बाइक जैसे निजी वाहनों से घूमने वाले लोगों के लिए कई मंदिरों के परिसर में पार्किंग का इंतजाम है। ज्यादातर जगह पार्किंग निःशुल्क है।

हम पहुंच गए हैं नेपाल के बज्रयान महाविहार में। बौद्ध धर्म में बाद में कई वैचारिक विभाजन हुए इसमें महायान और हीनयान प्रमुख हैं। नेपाल का यह मंदिर बज्रयान शाखा का है। इस मंदिर में लकड़ी का काम प्रमुखता से दिखाई देता है।

फ्रांस का बेहद सुंदर बौद्ध मंदिर - नेपाल के महाविहार के ठीक बगल में फ्रांस का बौद्ध मंदिर स्थित है। इसका परिसर अत्यंत हरा भरा और सुंदर है। फ्रांस का यह मंदिर लोटल ब्लूम स्तूप है। इसका आकार खिलते कमल जैसा है। पास में बने सरोवर में कमल के फूल खिले हैं।

जर्मनी का बेहतरीन बौद्ध मंदिर -  आगे चलकर हम जर्मनी के मंदिर पहुंच गए हैं। इसका प्रवेश द्वार भी बेहद सुंदर है। जर्मनी के बौद्ध मंदिर के परिसर में सुनहले रंग की बुद्ध की कई सुंदर प्रतिमाएं बनी हैं। मंदिर की आंतरिक सजावट बहुत सुंदर है। 



मंदिर का आंतरिक हिस्सा गोलकार है। आंतरिक छत पर बहुत सुंदर पेंटिंग बनी हैं। काफी देर तक मंदिर के अंदर बैठकर हम इन पेंटिंग को निहारते रहे। कई लोगों की नजर में जर्मनी  का ये मंदिर लुंबिनी वन क्षेत्र के सबसे सुंदर मंदिरों में से है। यहां पर विशाल धर्म चक्र भी बने हुए हैं। मंदिर के प्रांगण में बुद्ध के जीवन से जुडी सुंदर झांकियां है।

जर्मनी और फ्रांस के मंदिर के सामने एक विशाल सरोवर है। इस सरोवर के दूसरी तरफ नेपाल का एक और विशाल बौद्ध मंदिर है। इस मंदिर के आंतरिक हिस्से में फोटोग्राफी निषिद्ध है। इसके आगे कनाडा के बौद्ध समुदाय द्वारा बनवाया गया मंदिर है।

जर्मनी के बौद्ध मंदिर में कुछ सैलानी मिले जो गोरखपुर जिले से आए हैं। वे सारे लोग मंदिर के सौंदर्य पर मोहित थे। मंदिर के चारों तरफ सुंदर हरित पार्क है। इस पार्क में बुद्ध की सुनहली मूर्तियां हैं। पर लुंबिनी में अभी बौद्ध मंदिरों की श्रंखला खत्म कहां हुई है। अभी हमें कई मंदिर देखने हैं।

चीन और कोरिया के मंदिर - अब हम चल पड़े चीन के मंदिर की ओर। चीन का मंदिर क्षेत्रफल में काफी बड़ा है। चीन के मंदिर में चीन के कई बौद्ध धर्म गुरुओं की विशाल प्रतिमाएं हैं। इस मंदिर में हाथियों की कई छोटी बड़ी प्रतिमाएं भी हैं। चीन की संस्कृति के अनुरूप यहां सुनहले रंग की लाफिंग बुद्ध की विशाल प्रतिमा भी देखी जा सकती है।



सबसे विशाल कोरिया का मंदिर - विशालता में कोरिया के मंदिर का कोई सानी नहीं है। यह मंदिर सात मंजिला है। इसके परिसर में पहुंचकर मैं इसकी मंजिलें गिन रहा हूं। कोरिया के मंदिर में अतिथि गृह भी बना हुआ है। कई देशों के सैलानी यहां पर आकर ठहरते भी हैं। उनके लिए यहां पर भोजनालय भी बना हुआ है। 

कोरिया और जापान के मंदिर आमने सामने हैं। यहां पर फिर आइसक्रीम की चुस्की लेने के बाद मैं वापस चल पड़ा हूं। कुल कितने किलोमीटर साइकिल चलाई इसकी गिनती नहीं है। पर यह कुल 10 किलोमीटर से ज्यादा हो गया होगा। होटल पहुंचकर एक बार फिर स्नान करके एक घंटे के लिए सो गया। शाम को मायादेवी मंदिर जाना है इसलिए जगने के लिए मोबाइल में अलार्म लगा लिया है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( LUMBINI, NEPAL, BUDDHA, CHINA, CANADA TEMPLE, KORIA, FRANCE, BRAJYANA )  

2 comments:

  1. अलग अलग देशों के मंदिरों की बहुत बढ़िया यात्रा करवाई आपने...2 घंटे में 200 rs में सारे मंदिर हो जाते है देखने मे...क्योकि लुम्बिनी के देखने के लिए बहुत है..

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