Sunday, October 20, 2019

लुंबिनी विश्वस्तरीय सपनों का नगर


सिद्धार्थ यातायात की मिनी बस में बैठकर मैं लुंबिनी के लिए चल पड़ा हूं। नेपाल में इन सभी जगह पर भारतीय मुद्रा चलती है। इसलिए मैंने एनसी यानी नेपाली करेंसी नहीं ली है। एक भारतीय रुपया 1.60 नेपाली रुपये के बराबर है। इसी तरह से आप हर जगह भारतीय करेंसी भी भुगतान कर सकते हैं। करीब 10 किलोमीटर सफर के बाद बस ने मुझे गेट नंबर 6 के पास उतार दिया। पर यह क्या यहां कोई बाजार नहीं नजर आ रहा। बस कुछ बसें लगी हैं।

मुझे लुंबिनी में अपने होटल की तलाश है जो मैंने ऑनलाइन बुक किया है। तब कुछ लोग बताते हैं कि यहां से आप दूसरी बस लेकर गेट नंबर 4 और 5 के पास उतरें। वहांपर लुंबिनी का बाजार और होटल आदि हैं। मैं एक दूसरी मिनी बस में बैठ गया। उसने मुझे गेट नंबर 4 के पास उतार दिया। यहां दाहिनी तरफ बाजार नजर आ रहा है। अब मैं निकल पड़ा हूं लुंबिनी विलेज लॉज की तलाश में।

लुंबिनी विलेज लॉज में - कुछ दूर पैदल चलने के बाद मैं अपने लॉज पहुंच गया हूं। वहां एक महिला ने मेरा स्वागत किया। बुकिंग स्लिप दिखाने पर मुझे मेरे कमरे में पहुंचा दिया गया। यह लॉज आंगन नुमा है। तीन तरफ कमरे बीच में विशाल आंगन। पहली मंजिल पर एक रेस्टोरेंट भी है। कमरा डबल बेड वाला अटैच टायलेट के साथ है। 

स्नान के बाद रिसेप्शन पर आने पर मेरी मुलाकात होटल के प्रोपराइटर लीलामणि शर्मा से हुई। उनका अंदाज दोस्ताना है। उन्होंने मुझे लुंबिनी घूमने के बारे में सलाह दी। कई तरीके हैं। बैटरी रिक्शा से घूमना। स्कूटी किराये पर लेकर घूमना या फिर साइकिल किराये पर लेकर घूमना। मैं साइकिल का चयन करता हूं। तो डेढ़ सौ नेपाली रुपये या 100 भारतीय रुपये में दिन भर के लिए मेरी पसंद की साइकिल मिल गई। लीलामणि जी ने सलाह दी की लुंबिनी का मुख्य मंदिर माया देवी मंदिर में शाम को 7 बजे तक प्रवेश होता है। बाकी के मंदिर शाम को 5 बजे बंद हो जाते हैं। तो आप दिन भर लुंबिनी कांप्लेक्स के बाकी मंदिर घूमें और शाम को मायादेवी मंदिर जाएं। सुबह के 10 बजे हैं और मैं साइकिल लेकर चल पड़ा हूं लुंबिनी कांप्लेक्स की ओर।

शाक्यमुनि गौतम बुद्ध के जन्म स्थल लुंबिनी को नेपाल सरकार ने यूनेस्को की सलाह पर कायाकल्प करके के अतीव सुंदर रूप प्रदान कर दिया है। तीन वर्ग किलोमीटर में वन क्षेत्र को पुनर्जीवित करके इसे स्वर्ग सा सुंदर बना दिया गया है। काठमांडू जाने वाले महेंद्र हाईवे से लगते हुए लुंबिनी वन लगभग 5 किलोमीटर लंबा और डेढ़ किलोमीटर चौड़ा वन क्षेत्र है। इसमें दुनिया के कई देशों द्वारा बनवाए गए 20 से ज्यादा विशाल बौद्ध मंदिर हैं। पर इस परिसर में घूमते हुए आपको हमेशा एहसास होता कि आप किसी हरित वन में घूम रहे हैं। इन्ही जंगलों में हर थोड़ी दूर पर एक नया मंदिर बना है।

लुंबिनी का हुआ कायाकल्प - साल 1978 से पहले मायादेवी मंदिर के आसपास गांव बसे हुए थे। पर नेपाल सरकार ने सार लोगों को यहां से हटाकर नई जगह न्यू लुंबिनी में बसाया। पांच किलोमीटर लंबे और डेढ़ किलोमीटर चौड़े क्षेत्र की बाउंड्री की गई। इसमें प्रवेश के लिए थोड़ी दूर पर प्रवेश के लिए गेट बनाए गए। लुंबिनी वन क्षेत्र की आंतरिक डिजाइन के लिए दुनिया के जाने माने वास्तुविद प्रोफेसर केंजो टांगे  (Pro. KENZO TANGE ) की सेवाएं ली गईं। उन्होंने कई साल में लुंबिनी वन का मास्टर प्लान तैयार किया। उन्होंने 1972 से 1978 तक छह साल तक लुंबिनी का डिजाइन करने में समय लगाया।



सन  1978 में लुंबिनी वन को सुंदर बनाने का कार्य शुरू हुआ जो 1985 में पूरा हुआ। हालांकि तमाम मंदिरों को निर्माण कार्य उसके बाद भी चलता रहा।
नेपाल सरकार ने लुंबिनी डेवलपेंट ट्रस्ट बनाकर क्षेत्र का विकास कराया है। लुंबिनी वन क्षेत्र में चार प्रमुख हिस्से हैं – पवित्र उद्यान, बौद्ध मठ क्षेत्र, मार्केटिंग कांप्लेक्स और न्यू लुंबिनी विलेज।

महान वास्तुविद प्रोफेसर केंजो टांगे को वास्तुकला के क्षेत्र में 1987 में प्रित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वास्तु के क्षेत्र में यह नोबेल पुरस्कार के बराबर माना जाता है। चार सितंबर 1913 को जापान के ओसाका में जन्में प्रोफेसर टांगे का 22 मार्च 2005 को निधन हो गया। पर उनके द्वारा डिजाइन किए गए दुनिया के उत्कृष्ट स्मारक हमेशा उनकी दास्तां सुनाते रहेंगे। 

प्रोफेसर टांगे ने दूसरे विश्वयुद्ध के बार तबाह हुए हिरोसीमा को डिजाइन किया। सन 1969 में उनका टोकियो प्लान दुनिया भर में चर्चित हुआ। उन्होंने इटली के शहर बोलगेना को डिजाइन किया। 

वे पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट बिल्डिंग के भी डिजाइनर रहे। प्रोफेसर टांगे ने लुंबिनी को विश्व में सुंदरतम स्थलों में विकसित कर दिया है, जहां आकर मन प्रफुल्लित हो उठता है। भले टांगे  अब इस दुनिया में नहीं हैं पर उनकी डिजाइन की गई आलीशान इमारतें और स्मारकों में उनकी बेहतरीन कलात्मकता आज भी जिंदा है। 
--- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( LUMBINI, NEPAL, BUDDHA, Pro. KENZO TANGE ) 

2 comments:

  1. लुम्बिनी के बारे में बहुत कुछ जानना है....आगे के यात्रा वृतांत का इंतज़ार रहेगा...

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  2. आगे चार कड़ी और है। पढ़ते रहिए

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