Monday, October 14, 2019

नौगढ़ से पिपरहवा बनाम कपिलवस्तु

सुबह पांच बजे जगकर स्नान करके तैयार हो गया हूं। अपने लॉज से रेलवे स्टेशन जाकर वहां लगे ऑटो वालों से पिपरहवा चलने की बात करता हूं। एक आटो वाले ने कहा आपको कपिलवस्तु का बौद्ध स्तूप देखना है तो आटो बुक कर लें। उनसे 400 रुपये में बात हुई। सभी साइट दिखाने के बाद वे हमें ककरहवा बार्डर जाने वाले आटो में बिठा देंगे ये तय हो गया। मैं आटो रिक्शा में बैठकर चल पड़ा।

हमारे आटो का ड्राईवर बिल्कुल नौजवान है। अभी तो ये 18 साल का भी नहीं लग रहा। उनके साथ एक युवा यादव जी भी हो लिए। बातों बातों में बताया कि ये आटो उनका है। नौगढ़ में वे कुछ टैक्सियां भी चलवाते हैं। वैसे तो वे गोरखपुर के रहने वाले हैं,पर नौगढ़ में आकर टैक्सी का कारोबार करते हैं। बोले यहां काफी पैसा है, पर यहां के स्थानीय लोग पैसा कमाने का तरीका नहीं जानते।
अलीगढ़वा बार्डर पर नेपाल का प्रवेश द्वार 

अलीगढ़वा वाया बर्डपुर -  नौगढ़ के शहर से बाहर निकलकर आटो नेपाल सीमा की ओर चल पड़ा है। नौगढ़ के बाजार में कोई ग्लैमर मतलब चाकचिक्य नहीं है। स्टेशन से आधा किलोमीटर आगे चलते ही ग्रामीण इलाका शुरू हो गया। अब नेपाल सीमा तक जाने वाली सड़क चौड़ी और बेहतर बन रही है। कुछ समय पहले तक ये सड़क बहुत बुरे हाल में थी। थोड़ा चलने के बाद हमलोग बर्डपुर गांव पहुंच गए हैं। बर्डपुर से पिपरहवा और ककहरवा का रास्ता बदल जाता है। सामने बुद्धद्वार से हमलोग बायीं ओर मुड़ जाते हैं। ये रास्ता अलीगढ़वा की ओर जा रहा है।
अलीगढ़वा में भारत नेपाल की सीमा पर। 

वैसे तो मैंने ये आटो बुक कर रखा है पर आटोवाले मेरी इजाजत लेकर एक सवारी बिठा लेते हैं। ये सवारी एक मास्टरनी हैं जो नेपाल में नौकरी करती हैं। नागरिकता भी नेपाल की है। पर उनका परिवार नौगढ़ में रहता है। यहां अपने बच्चों को पढ़ाती हैं। सिद्धार्थनगर जिले में भारत और नेपाल के बीच रिश्तेदारी बिल्कुल आम बात है। तो हमलोग करीब 20 किलोमीटर सफर तय करके पहुंच गए हैं अलीगढ़वा बार्डर। 

यहां भारत नेपाल सीमा है। यहां से भी भारतीय नागरिक नेपाल में प्रवेश करते हैं। पर अलीगढ़वा बार्डर से लुंबिनी पहुंचने का रास्ता बहुत खराब है। नेपाल के अंदर की सड़क अच्छी नहीं है। साथ ही शेयरिंग गाड़ियां भी नहीं मिलतीं। अलीगढ़वा में ही एक दुकान पर सुबह सुबह चाय और नास्ते में घुघनी और जलेबी खाई। हमने भी और आटो वाले भाइयों ने भी। अलीगढ़वा सीमा पर बाजार है। पर सुबह सुबह चाय नास्ते की दुकानों को छोड़ दें तो बाजार अभी सो रहा है। अलीगढ़वा से कपिलवस्तु पुरातत्व स्थल दो किलोमीटर पहले ही है। पर नेपाल वाली मास्टरनी को छोड़ने के लिए हमें अलीगढ़वा बार्डर तक आना पड़ा। यह अच्छा ही हुआ, इससे मैंने भी बार्डर देख लिया। 

कहां है असली कपिलवस्तु -  नौगढ़ रेलवे स्टेशन पर लगे बोर्ड में लिखा गया है कि गौतम बुद्ध के पिता शुद्धोधन की राजधानी कपिलवस्तु यहां से 20 किलोमीटर है। पर अलीगढ़वा बार्डर नेपाल सीमा के अंदर लगे स्वागत द्वार पर लिखा है वेलकम टू कपिलवस्तु। आखिर ये कपिलवस्तु है कहां भारत में की नेपाल में। जवाब है दोनों जगह। नेपाल का दावा है कि कपिलवस्तु उसके यहां है। बुद्ध के जन्म स्थल लुंबिनी से कोई 60 किलोमीटर पश्चिम की तरफ। पर उत्तर प्रदेश शासन का दावा है कि अलीगढ़वा से दो किलोमीटर पहले स्थित पिपरहवा की कपिलवस्तु है। वहां बने बौद्ध स्तूप के बाहर विशाल बोर्ड लगाकर इसकी घोषणा भी कर दी गई है। कुछ इतिहासकारों से इसके समर्थन में तर्क भी गढ़ दिए गए हैं। फिलहाल हम भारत वाले कपिलवस्तु की राह पर हैं।
तो अब हमलोग चल पड़े हैं पिपरहवा बौद्ध स्तूप की ओर। वास्तव में यह स्तूप नौगढ़ से अलीगढ़वा बार्डर के रास्ते पर अलीगढ़वा से दो किलोमीटर पहले बायीं तरफ स्थित है। तो चलिए इस प्राचीन बौद्ध विरासत की ओर चलते हैं...
-        विद्युत प्रकाश मौर्य -   vidyutp@gmail.com
-        ( PIPRAHWA, ALIGARHWA, KAPILWASTU, NAUGARH, SIDHYARTHNAGAR )      

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