Sunday, October 13, 2019

तुलसीपुर से नौगढ़ – सिद्धार्थनगर


देवी पाटन मंदिर से चलकर मैं वापस रेलवे स्टेशन आ गया हूं। तुलसीपुर से अब मुझे नौगढ़ जाना है। नौगढ़ मतलब जिला सिद्धार्थनगर का मुख्यालय। लखनऊ से गोंडा, बलरामपुर तुलसीपुर का सफर मैंने बसों से किया था, पर आगे की यात्रा रेलगाड़ी से होनी है। पर रेलगाड़ी रात को 8.15 बजे आएगी। तब तक मेरे पास समय है दो घंटे का। स्टेशन के पास हल्का फुल्का नास्ता करके वक्त गुजारता हूं। गाड़ी आने के आधे घंटे पहले स्टेशन परिसर में जाकर नौगढ़ का एक टिकट खरीद लिया। इंटरसिटी एक्सप्रेस 15070 लखनऊ के बादशाहनगर से शाम को 4.55 बजे चलती है। यह गोरखपुर रात को 12 बजे पहुंचती है। मैं ट्रेन का रनिंग स्टेटस मोबाइल फोन में देख रहा हूं। ट्रेन को 20 मिनट लेट तुलसीपुर पहुंची।

इसका ठहराव बढ़नी और शोहरतगढ़ में है। उसके बाद नौगढ़ आ जाएगा। कुल 80 किलोमीटर का सफर है जो ट्रेन डेढ़ घंटे में तय करेगी। तुलसीपुर में ट्रेन में काफी लोग चढ़ने वाले दिखाई दे रहे हैं। पर संयोग रहा कि मुझे खिड़की के पास वाली सीट मिल गई। मेरे आसपास एक परिवार बैठा है जो गोरखपुर जा रहा है। महिलाओं और बच्चियों का ये भरापुरा परिवार गोरखपुर से तुलसीपुर देवी पाटन मंदिर दर्शन करने के लिए आया था। 

तुलसीपुर से चलने के बाद ट्रेन पचपेडवा मेंरुकी। इसके बाद यह ट्रेन बढ़नी में रुकी। यह नेपाल की सीमा पर बसा एक शहर है। यह सिद्धार्थनगर जिले में आता है। इसके बाद ट्रेन का ठहराव शोहरतगढ़ में है। यह भी सिद्धार्थनगर जिले का ही बाजार है। रात दस बजे के करीब ट्रेन नौगढ़ पहुंच गई। रेलवे स्टेशन पर खूब चहल पहल है। बाहर निकलने पर आटो वाले ककरहवा के लिए आवाज लगा रहे हैं।

नौगढ़ आने से पहले मैंने कई लोगों से सिद्धार्थनगर में मदद मार्गदर्शन के लिए बात की थी। पर किसी से मदद मिल नहीं पाई। पर मुझे यहां कोई परेशानी नहीं हुई।
पहले तो ये जान लिजिए की नौगढ़ सिद्धार्थनगर जिले का मुख्यालय है। यह उत्तर प्रदेश के नए जिलों में से एक है। हमारे आईआईएमसी के सिनियर और आजतक के पत्रकार विकास मिश्र इसी जिले के रहने वाले हैं। एक और आईआईएमसी के पूर्व छात्र मणिंद्र मिश्र भी यहीं के रहने वाले हैं। इन लोगों से मैंने नौगढ़ के बारे में मार्गदर्शन लिया था।

रात को दस बजे उतरने के बाद अब मुझे तलाश थी एक अदद होटल की जहां मैं रात को ठहर सकूं। मैंने फोन पर होटल सिटी हार्ट से बात की थी। ये होटल स्टेशन से 300 मीटर की दूरी पर है। मैं सिटी हार्ट की तरह जा ही रहा था कि रास्ते में जेपी लॉज का बोर्ड दिखाई दे गया। वहां जाकर बात की। यहां 300 रुपये में कमरा मिल गया। कमरा आकार में काफी बड़ा है। इसकी छत ऊंची है। पर अटैच टायलेट वाला नहीं है। होटल के केयरटेकर संजय का व्यवहार बहुत अच्छा है। मैंने उनको बताया कि मुझे सुबह पांच बजे निकलना है तो उन्होने मुझे सुबह के साढ़े चार आकर जगा दिया।  

जून के महीने में गर्मी बहुत है। होटल में आने के बाद मैंने एक बार फिर स्नान किया। उसके बाद रात के भोजन की तलाश में निकला। लोगों ने बताया बालाजी में जाएं। स्टेशन के पास है बालाजी स्वीट्स और भोजनालय। यहां 80 रुपये की थाली में उम्दा किस्म का भोजन था।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( TULSIPUR TO NAUGARH, BARHNI, SHOHRTGARH, BUDDHA ) 

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