Friday, October 11, 2019

देवी का कंधा गिरा था यहां - देवीपाटन मंदिर – तुलसीपुर


बलरामपुर जिले में स्थित देवीपाटन मंदिर देश के प्रमुख शक्ति स्थलों में से एक है। देवी के नाम पर ही उत्तर प्रदेश के मंडल का नाम देवी पाटन मंडल रखा गया है।  देवीपाटन में स्थित जगदमाता पाटेश्वरी का मंदिर का अलौकिक इतिहास है। यह स्थल युगों-युगों से ऋषि-मुनियों के तप व वैराग्य का साक्षी रहा है।
मंदिर का परिसर विशाल और सुंदर है। परिसर की स्वच्छता मनमोह लेती है। देवी के मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा मार्ग पर कई और मंदिर हैं। मंदिर के दाहिनी तरफ अखंड ज्योति जलती है।  

देवी का कंधा गिरा था यहां - यह मंदिर मा दुर्गा के प्रसिद्ध 51 शक्ति पीठों में से एक है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां माता के दाहिने कंधा यहां गिरा था। हिंदी में कंधे को पाट भी कहते हैं इसलिए देवी का नाम पाटेश्वरी है। इसलिए यह भी शक्ति पीठ में से एक है और देवी पाटन के रूप में कहा जाता है। यह महान धार्मिक महत्व का एक स्थान है।

पहले पशु पक्षियों को प्रसाद - पशु-पक्षियों को मंदिर में चढ़ाए प्रसाद को खिलाने के बाद ही भक्तों को बांटने की परंपरा है। दरअसल ऐसा इस मान्यता के अनुसार किया जाता है कि ईश्वर का वास मनुष्य ही नहीं अपितु पशु-पक्षियों के संग संसार के कण-कण में है। इसी कारण यहां कई वर्षों से यह  परंपरा चली आ रही है

पाताल तक सुरंग और अखंड धुना - पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवीपाटन मंदिर के गर्भगृह से पाताल तक अति प्राचीन सुरंग बनी हुई है। त्रेतायुग से यहां जल रहे अखंड धुना में मां दुर्गा की शक्तियों का वास बताया जाता है। लोग इस धुने से भभूत लेकर जाते हैं। कहा जाता है कि त्रेता युग में माता सीता का पाताल लोक गमन भी यहीं से हुआ था।

नवरात्र में विशाल मेला - बलरामपुर के आसपास के दस जिलों के श्रद्धालु यहां सालों भर पहुंचते हैं। पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। चैत्र और शरद नवरात्रि के समय मंदिर में बहुत भीड़ उमड़ती है। लोग अपने बच्चों के मुंडन समारोह के लिए यहां पहुंचते है। यहां पर बाल दान पवित्र माना जाता है। 

गुरु गोरखनाथ को यहीं मिली थी सिद्धि - ऐसा कहा जाता है कि सिद्ध रत्ननाथ (नेपाल) और गुरु गोरखनाथ को सिद्धि यहीं प्राप्त हुई थी। इसलिए इस मंदिर का गोरक्ष पीठ से गहरा रिश्ता है। देवी पाटन मंदिर का प्रबंधन गोरक्षपीठ के हवाले है। देवीपाटन मंदिर गोरक्षपीठ की उत्तराधिकारी योगी आदित्नाथ के संरक्षण में है।   

माता का प्रसाद  - देवी पाटन मंदिर में मुख्य रूप से प्रसाद के तौर पर माता को चुनरी, नारियल, लावा, नथुनी, सिन्दूर, मांग टीका, चूड़ी, बिछिया, पायल, कपूर, धूप, लौंग, इलाइची, पुष्प, चरणामृत और रोट का प्रसाद प्रमुख रूप से चढ़ाया जाता है। इन प्रसाद के साथ लोग अपने और परिवार के लिए सौभाग्य की कामना करते हैं। 

सुंदर सरोवर और अतिथिशाला - मंदिर परिसर में एक सुंदर सरोवर है। इस सूर्य कुंड में आप नौका विहार का भी आनंद ले सकते हैं। मंदिर में दर्शन करने आए श्रद्धालु इस सरोवर में स्नान भी करते हैं। सरोवर में बतखों का झुंड तैरता नजर आता है। मंदिर परिसर में विशाल यज्ञशाला और अतिथिशाला भी है। अगर मेले का समय नहीं हो तो आपको अतिथि गृह में रियायती दरों पर रहने के लिए आवास मिल सकता है। मंदिर के बगल में चिकित्सालय भी है।

मैं जिस समय मंदिर पहुंचा हूं, श्रद्धालुओं की ज्यादा भीड़ नहीं है। इसलिए दर्शन बहुत आसानी से हो सका। मंदिर के मनोरम परिसर में तकरीबन तीन घंटे का वक्त मैंने गुजारा। अतिथिशाला का पास समय माता का एक नया मंदिर भी बना है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
(DEVIPATAN TEMPLE, PATESWARI TEMPLE, GURU GORAKHNATH, TULSIPUR, BALRAMPUR, UP ) 

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