Monday, September 30, 2019

राजपूताना रंग और राजसी वैभव देखें : सिटी पैलेस जयपुर

आभानेरी से चांद बावड़ी देखने के बाद लौट रहा हूं। बावड़ी के बाहर गन्ने का जूस पीया। पर वापस जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला। फिर एक बाइक वाले सज्जन ने लिफ्ट दे दी। गूलर तक पहुंच गया। गूलर से सिकंदरा एक जीप में। जीप पूरी भर गई थी तो छह किलोमीटर का सफर पीछे लटकर खड़े होकर पूरा किया। सिकंदरा से सीधे जयपुर की बस मिल गई है। बस आगे चलकर दौसा में रूकी। बस स्टैंड के पास दौसा के पास के प्रसिद्ध गांव भांद्रेज के आचार की दुकान है। भांद्रेज ऐतिहासिक गांव है। मैं वहां जा नहीं सका तो वहां का अचार ही सही। यहां से डेला (कैर) के अचार की एक बाटल खरीद लेता हूं। ये डेला का अचार मुझे काफी प्रिय है। डेला को राजस्थान में कैर कहते हैं। यह कम पानी में भी उगने वाली झाड़ है।


जयपुर पहुंचकर रेलवे स्टेशन के पास ही उतर गया। यहां पर आज रात्रि विश्राम के लिए मैंने होटल बुक कर रखा है। होटल में चेकइन के बाद घूमने निकल पड़ा। हमारी मंजिल है सिटी पैलेस। तो पहले मेट्रो से चांदपोल तक पहुंचा। चांद पोल से बैटरी रिक्शा मिल गया। यह रिक्शा मुझे मिर्जा इस्माइल रोड (एमआई रोड ) से लेकर चला। मैं बड़ी चौपड़ उतर गया। बड़ी चौपड़ पर कचौड़ी खाई दस रुपये की एक सब्जी के साथ। इसके बाद हवा महल से गुजरता हुआ सिटी पैलेस पहुंच गया। वैसे में कई साल बाद सिटी पैलेस दूसरी बार पहुंच रहा हूं।

सिटी पैलेस में आमेर और जयपुर से सैकड़ो साल राज करने वाले कछवाहा राजाओं का वैभव और ऐश्वर्य को करीब से देखा जा सकता है। सिटी पैलेस के मुख्य द्वार के बाद विशाल मैदान है। इस मैदान में असंख्य कपोतों का डेरा है। इस मैदान में पार्किंग के लिए जगह और खाने पीने की कुछ दुकाने हैं। 

प्रवेश टिकट - सिटी पैलेस का प्रवेश टिकट 200 रुपये का है। बच्चों और छात्रों के लिए 100 रुपये का टिकट है पर आईडी कार्ड होना जरूरी है छात्रों के लिए। सिनियर सिटिजन और रक्षा कर्मियों, सैनिकों के लिए 50 फीसदी रियायत है। सिटी पैलेस के प्रवेश द्वारा पर दो नन्ही तोपें आपका स्वागत करती हैं। किले की सबसे ऊंची मंजिल पर नजर डालें तो जयपुर राजघराने का ध्वज लहराता दिखाई देता है।

जयपुर सिटी पैलेस की खासियत इसका खुलापन है। यह उदयपुर के सिटी पैलेस की तरह अनगढ़ नहीं है। इसके हर भवन में कलात्मकता है। अठारहवीं सदी में महाराजा सवाई जय सिंह ने जयपुर शहर को नई पहचान दिलाई। उनके राज्यकाल में जयपुर में कला-संस्कृति का काफी तरजीह मिली और ये शहर वैभव के चरमोत्कर्ष पर पहुंचा।

चित्रकला और शस्त्रों का अनूठा संग्रह -  पेंटिंग और फोटोग्राफी वाली गैलरी में आप नायाब चित्रों को देख सकते हैं। इसके आंतरिक हिस्से में कई जगह फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। यहां आप जयपुर की महारानी गायत्री देवी और उनके परिवार के दूसरे सदस्यों के कुछ नायाब फोटोग्राफ भी देख सकते हैं। शस्त्र गैलरी में आप राजघराने के अलग अलग कालखंड में इस्तेमाल हुए तलवार समेत अनेक अस्त्र शस्त्रों को देख सकते हैं।

जयपुर के 36 कारखाने -  सिटी पैलेस के अंदर हस्तशिल्प का विशाल बाजार है। इस बाजार में राजपरिवार द्वारा मान्यता प्राप्त शिल्पी अपने नायब उत्पादों के साथ आपके समाने प्रस्तुत होते हैं। आपकी मर्जी इन उत्पादों को खरीदें या फिर देखकर आगे बढ़ जाएं। पर इन उत्पादों को देखने का मौका नहीं चुकें। यहां राजस्थान की कला शिल्प के परंपरा को बहुत करीब से देखा जा सकता है।


महाराजा सवाई मान सिंह म्युजियम – सिटी पैलेस के अंदर स्थित संग्रहालय का नाम सवाई मान सिंह म्युजियम है। यहां आप कछवाहा राजघराने के इतिहास के बारे में करीब से जान सकते हैं। इसके अलावा सिटी पैलेस में मुबारक महल, वस्त्र गैलरी भी देख सकते हैं।

चांदी का सबसे विशाल कलश महल के बारादरी में आप चांदी का विशाल कलश देख सकते हैं। इसका इस्तेमाल गंगाजल रखने के लिए किया जाता था। इसमें भरने के लिए खास तौर पर हरिद्वार से गंगा जल मंगाया जाता था। कुल 345 किलोग्राम के 5 फीट 3 ईंच ऊंचे इस कलश में 4091 लीटर गंगाजल आ जाता था। सन 1894 में इस कलश का निर्माण बड़ी संख्या में चांदी के सिक्कों के पिघलाकर किया गया था। इसे बनाने में दो साल का समय लगा था। इसको इधर उधर ले जाने के लिए इसमें पहियों का आधार लगाया गया था। सन 1902 में सवाई माधो सिंह जब किंग एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह में हिस्सा लेने लंदन गए तो अपने धार्मिक कार्यों के लिए इस विशाल कलश को भी साथ लेकर गए थे। दुनिया के सबसे बड़े चांदी के कलश के रूप में इसका नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( CITY PALACE JAIPUR, SILVER  JAR, SAWAI JAI SINGH ) 
  


2 comments:

  1. रोचक घुमक्कड़ी। कलश के विषय में जानकर अच्छा लगा। वो अपने साथ इस कलश को कैसे ले गए होंगे यही सोचकर हैरान हूँ।

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