Wednesday, September 4, 2019

यहां गुजारा था बाबा साहेब ने आखिरी दिन

दिल्ली के अलीपुर रोड पर जहां बाबा साहेब आंबेडकर ने आखिरी दिन गुजारे थे अब शानदार स्मारक बन गया है।  13 अप्रैल 2018 को बाबा साहेब की जयंती की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री ने दिल्ली के अलीपुर रोड पर डॉक्टर आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक का उद्घाटन किया। यह स्मारक 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है। यह स्मारक दिल्ली में 26 अलीपुर रोड पर बनाया गया है। 
इस स्मारक को पुस्तक का आकार दिया गया है, जो संविधान का प्रतीक है। इस इमारत में एक प्रदर्शनी स्थल, बुद्ध की प्रतिमा के साथ ध्यान केंद्र व डॉ. अंबेडकर की 12 फीट ऊंची प्रतिमा है। इस स्मारक की आधारशिला 21 मार्च 2016 को रखी थी। दो साल में इसका निर्माण पूरा कर लिया गया।

सिरोही के राजा था भवन
केंद्रीय मंत्रीमंडल से इस्तीफा देने के बाद डॉक्टर आंबेडकर दिल्ली विधानसभा के नजदीक सिरोही के महाराज के इस घर में आकर अपनी दूसरी पत्नी सविता आंबेडकर के साथ रहने लगे थे। यहीं उन्होंने अपने जीवन का आखिरी साल गुजारा। यहीं 6 दिसंबर 1956 को वह महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2 दिसंबर 2003 को इस भवन को राष्ट्र को समर्पित किया था। अब इसे भव्य रूप प्रदान किया गया है।

दो मंजिल की मल्टी मीडिया प्रदर्शनी –
आंबेडकर मेमोरियल का निर्माण दो मंजिलों में किया गया है। यहां पर बाबा साहेब के जीवन से जुड़े प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इसका खास आकर्षण मल्टी मीडिया प्रदर्शनी है। यहां पर आप आंबेडकर की बोलती हुई मोम प्रतिमा भी देख सकते हैं।
आंबेडकर मेमोरियल में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की अहम घटनाओं को समझा जा सकता है। यहां पर भारत के संविधान निर्माण की प्रक्रिया उससे जुड़े हुए लोगों की जानकारी विस्तार से दी गई है।  

बाबा साहेब के जीवन की अहम घटनाएं
बाबा साहेब के जीवन की अहम घटनाओं में उनका बड़ौदा रियासत और कोल्हापुर रियासत से संबंध, उनका पढ़ाई के लिए विदेश जाना, कालाराम मंदिर में प्रवेश के लिए आंदोलन, पूना समझौता, केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल होना, नागपुर में बौद्ध धर्म की दीक्षा लेना जैसी घटनाओं का चित्रण यहां किया गया है। जब नागपुर में डाक्टर आंबेडकर ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली तो उनके साथ सात लाख लोग बौद्ध बने। यह सम्राट अशोक के बाद सामूहिक तौर पर दूसरा सबसे बड़ा धर्म परिवर्तन था।  

आखिर क्यों कहलाए बाबा साहेब
यहां पर आप यह भी जान सकते हैं कि आखिर डॉक्टर भीमराव आंबेडकर बाबा साहेब क्यों कहलाने लगे। इसके पीछे एक रोचक कहानी है। अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद डाक्टर आंबेडकर काफी दुखी रहने लगे थे। दुख में कई दिन तक वे घर से बाहर नहीं निकले। एक दिन जब वे बाहर निकले तो वे साधु जैसे लिबास में थे। उनको इस हाल में देखकर कुछ लोगों ने उनका नाम बाबा साहेब दे दिया।

प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं –
अंबेडकर मेमोरियल में प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है। यह स्मारक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। पर हर सोमवार को यह स्मारक बंद रहता है। स्मारक में जाने वाले लोगों को अपना परिचय लिखना पडता है। आप चाहें तो आपको निःशुल्क आडियो गाइड उपलब्ध कराया जाता है। समूह में जाने वाले लोगों के लिए गाइडेड टूर भी उपलब्ध है। आंबेडकर मेमोरियल में एक अच्छी कैंटीन भी है। साथ ही पेयजल और शौचालय आदि का भी इंतजाम है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
-        ( DR AMBEDKAR MEMORIAL, ALIPUR ROAD, DELHI )

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