Friday, September 27, 2019

चांद बावड़ी - दुनिया की सबसे बड़ी और कलात्मक बावड़ी

आपको पता दुनिया की सबसे बड़ी बावड़ी कहां है। नहीं तो हमारे साथ चलिए। राजस्थान के दौसा जिले में एक गांव है आभानेरी। आभानेरी जाने के लिए हम जयपुर से चल पड़े हैं दौसा। यह सड़क जयपुर से आगरा की ओर जा रही है। दौसा से आगे सिकंदरा कस्बे में मैं उतर गया। सिकंदरा से आटो रिक्शा या मिनी बस से गूलर पहुंचा। 
गूलर सिकंदरा और बांदीकुई के बीच में छोटा सा बाजार है। गूलर चौराहा पर कांग्रेस के दिवंगत नेता राजेश पायलट की प्रतिमा लगी हुई है। गूलर से तीन किलोमीटर दूरी है आभानेरी की। पर गूलर से आभानेरी जाने के लिए मुझे कोई वाहन नहीं मिलता है। मैंने एक बाइक वाले से लिफ्ट मांगी। नहीं मिली। दूसरी कोशिश भी सफल नहीं रही। पर तीसरे बाइक वाले ने लिफ्ट दे दिया। और मैं पहुंच गया हूं आभानेरी।

आभानेरी मतलब चमकने वाला शहर
आभानेरी राजस्थान में जयपुर से 95 किमी दूरी पर स्थित गांव है। इस गांव में ही विश्व की सबसे बड़ी बावड़ी स्थित है। इसका नाम है चांद बावड़ी। चांद बावड़ी को आपने पहेली समेत कुछ फिल्मों में भी देखा होगा। आभानेरी का शुरुआती नाम था आभा नगरी मतलब चमकने वाला शहर। कालान्तर में भाषा के अपभ्रंश की वजह से इसका नाम धीरे-धीरे आभानेरी बन गया। ऐसी मान्यता है कि आभानेरी को राजा चांद ने बसाया था। चांद बावड़ी और माता के मंदिर की वजह से आभानेरी यह राजस्थान आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बन गया है। गुप्त काल के बाद मध्यकालीन स्मारकों के लिए आभानेरी प्रसिद्ध है।

नौंवी शताब्दी का चमत्कार
नौंवी शताब्दी में चांद बावड़ी का निर्माण नौवीं शताब्दी में राजा चांद ने किया था। यह बावड़ी चारों तरफ से 35 मीटर चौड़ी है। ऊपर से नीचे तक पक्की बनी सीढ़ियों के कारण पानी का स्तर चाहे जो भी हो हमेशा आसानी से पानी भरा जा सकता है। चांद बावड़ी100 फीट गहरी और 13 मंजिला है।

इसमें कुल 3500 सीढ़ियां है। चांद बावड़ी राजस्थान की सभी बावड़ियों में सबसे बड़ी और लोकप्रिय है।  चांद बावड़ी के अंदर बनी सीढि़यां कलात्मक और पुरातत्व कला का बेहतरीन उदाहरण है।

चक्करदार सीढ़ियां और कहावतें
बावड़ी की खासियत होती है कि गर्मी के दिनों में भी इसका पानी ठंडा रहता है। इलाके में ऐसी जनश्रुति है कि इसका निर्माण भूतों ने किया है। यह भी कि जानबूझकर इतनी गहरी और ज्यादा सीढ़ियों वाली बनाई है कि यदि इसमें एक सिक्का उछाला जाए तो उसका वापस आना असम्भव होगा।

भुलभुलैया के रूप में बनी इसकी सीढि़यों के बारे में कहा जाता है कि कोई व्यक्ति जिस सीढ़ी से नीचे उतरता है वह वापस कभी उसी सीढ़ी से ऊपर नहीं आ पाता। इसे अंधेरे उजाले की बावड़ी भी कहा जाता है। चांदनी रात में यह बावड़ी एकदम सफेद दिखाई देती है।

नृत्य कक्ष और गुप्त सुरंग
तीन मंजिली इस बावड़ी में राजा के लिए नृत्य कक्ष और गुप्त सुरंग बनी हुई है। यह वर्गाकार बावड़ी चारों ओर स्तंभयुक्त बरामदों से घिरी हुई है। चांद बावड़ी की सबसे निचली मंजिल पर बने दो ताखों में स्थित गणेश एवं महिषासुर मर्दिनी की भव्य प्रतिमाएं इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। बावड़ी के जीर्णोद्धार के दौरान राजा चांद का एक शिलालेख भी मिला था।

विश्व विरासत में क्यों नहीं
इतनी खूबसूरत चांद बावड़ी को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में क्यों नहीं शामिल किया गया है इसको लेकर आश्चर्य होता है। हालांकि गुजरात के पट्टन स्थित रानी का बाव ( बावड़ी ) को विश्व विरासत की सूची में शामिल किया गया है। भले ही यह विश्व विरासत स्थल का दर्जा नहीं पा सकी है पर चांद बावड़ी दुनिया भर के सैलानियों की नजर में है। 


कैसे पहुंचे राजस्थान के दौसा जिला मुख्यालय से करीब आभानेरी 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहीं बांदीकुई रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। गूलर से आभानेरी तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक वाहन न मिलने से थोड़ी दिक्कत होती है। बावड़ी में प्रवेश के लिए 30 रुपये का टिकट है। यह सुबह से शाम तक सैलानियों के लिए खुली रहती है। रोज सैकड़ो लोग इस बावड़ी को देखने आते हैं। इसमें बड़ी संख्या विदेशी सैलानियों की होती है।

-विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( CHAND STEP WELL, ABHANERI, GULAR, BANDIKUI, DAUSA, RAJSTHAN  )



4 comments:

  1. मौर्य जी नमस्कार, हम अगले महीने यहीं का कार्यकम बना चुके हैं लेकिन आपने यहाँ का यात्रा वृतांत लिख क्र हमारा काम बहुत आसान कर दिया है।
    आपका बहुत बहुत धन्यवाद्।

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  2. मौर्य जी नमस्कार, हम अगले महीने यहीं का कार्यकम बना चुके हैं लेकिन आपने यहाँ का यात्रा वृतांत लिख क्र हमारा काम बहुत आसान कर दिया है।
    आपका बहुत बहुत धन्यवाद्।
    सरयू प्रसाद मिश्रा

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