Wednesday, September 25, 2019

दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का लोकोमोटिव देहरादून में

अगर आप उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हैं और रेलवे स्टेशन पहुंचे हैं तो देहरादून रेलवे स्टेशन के बाहर उल्टी तरफ देखिए। आरक्षण भवन के प्रवेश द्वार पर आपको एक छोटा सा लोकोमोटिव मुस्कुराता हुआ नजर आएगा। यह लोकोमोटिव टॉय ट्रेन दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का है।

किसी जमाने में दो फीट की पटरियों पर दौड़ने वाले इस लोकोमोटिव को देहरादून लाकर स्थापित किया गया है। यह बी क्लास का स्टीम लोकमोटिव है। इसका मेक नंबर नंबर 785 बी है। सौ साल से ज्यादा पुराने इस लोकोमोटिव को बाहर से इस तरह पेंट किया गया है कि यह नया नया सा लगता है। रेलवे स्टेशन से गुजरने वाले आते जाते लोग इसे देखते हैं। उन्हें लगता है कि मानो यह अभी भी चलने के लिए तैयार हो। रात की रोशनी में यह और भी सुंदर दिखाई देता है।

ब्रिटेन में बना लोकोमोटिव - नैरो गेज के इस स्टीम लोकमोटिव (इंजन) का निर्माण 1903 में ब्रिटेन में हुआ था। इसके निर्माता थे शार्प स्टीवार्ट एंड कंपनी। इस कंपनी का पता हुआ करता था एटलस वर्क्स, मैनेचेस्टर, ब्रिटेन। इस कंपनी की स्थापना 1843 में हुई थी। यह कंपनी सन 1888 में यह लंदन के ग्लासगो से रेलवे के लिए लोकोमोटिव का उत्पादन करती थी। सन 1903 तक यह 5000 लोकोमोटिव का निर्माण कर चुकी थी। भारत में नैरो गेज के लिए इस कंपनी से कई लोकोमोटिव मंगाए गए थे। इसी साल इस कंपनी का मर्जर हो गया और यह नार्थ ब्रिटिश लोकोमोटिव कंपनी में समाहित हो गई। शार्प स्टीवार्ट कंपनी के बनाए पांच लोकोमोटिव को भारत में अलग अलग स्थलों पर संरक्षित किया गया था।

डीएचआर में लंबी सेवाएं दी - इस लोकोमोटिव 785 बी ने दार्जिलिंग हिमलायन रेलवे नेटवर्क पर लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं। वहां पर डीएचआर 28 इसका नंबर दिया गया था। यह 0-4 0 एसटी श्रंखला का लोकोमोटिव है। इससे मिलता जुलता इसका पूर्ववर्ती लोकमोटिव 777बी जो शार्प स्टीवर्ट का ही 1889 का बना हुआ है राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में संरक्षित करके रखा गया है। लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यह स्टीम इंजन रिटायर नहीं हुआ था बल्कि डीजल इंजन आने के बाद इसे रिटायर कर दिया गया। नीति आयोग के सदस्य विवेक देवराय ने तो एक बार सलाह दी थी कि फेयरी क्वीन तरह ही कई नैरोगेज के बी क्लास लोकोमोटिव को भी फिर से मरम्मत करके पटरियों पर दौड़ने के लिए बहाल किया जाए। इससे स्टीम हेरिटेज पर सफर करने वाली यात्री मिलेंगे और रेलवे की कमाई में इजाफा होगा।

इंजन के बारे में जानकारी नहीं - नैरोगेज के लोकोमोटिव 785बी को जब से देहरादून रेलवे स्टेशन के बाहर स्थापित किया गया है, उत्तराखंड की राजधानी के इस स्टेशन पर आने जाने वाले यात्रियों के बीच ये कौतूहल का विषय बन गई है। स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे लोग इसके साथ सेल्फी लेने के लिए पहुंचते हैं। हालांकि इस लोकोमोटिव के साथ इसका कोई संक्षिप्त इतिहास लिखकर यहां नहीं लगाया है। लोकोमोटिव के बारे में जानकारी यहां पर लिखे जाने से इसे देखने वाले लोगों की जिज्ञासा भी शांत होती।

रेलवे स्टेशन से चलकर मैं बस स्टैंड आ गया, क्योंकि मेरी दिल्ली की बस यहीं से मिलने वाली है। निजी एसी बस मैंने ऑनलाइन बुक किया है। मेरे पास समय है तो थोड़ी देर देहरादून के सरकारी बस स्टैंड का मुआयना किया। यह काफी सुविधाजनक और साफ सुथरा है। बस स्टैंड में रहने के लिए डारमेटरी भी है। बस स्टैंड के पीछे सुंदर पार्क भी है। यहां से दिल्ली के लिए सरकारी बसें भी लगातार जा रही हैं। पर मेरी तो निजी बस में बुकिंग है। हमारे बस आपरेटर ने जो लोकेशन दिया गया था उस पर काफी तलाश के बाद बस नहीं मिली। हार कर मैंने दिए गए नंबर पर फोन किया। तब उन्होंने एक नए दफ्तर का पता दिया। वहां जाने पर पता चला कि वह बस आ नहीं जा रही है। पर उन्होंने मुझे दूसरे बस में सामंजित कर दिया और मैं दिल्ली की ओर चल पड़ा।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
( STEAM LOCOMOTIVE, DHR, NARROW GAUGE DEHRADUN RAILWAY STATION ) 




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