Saturday, September 14, 2019

ऋषिकेश का नीर झरना – जंगल में मंगल


हरिद्वार के देव संस्कृति विश्वविद्लाय से सुबह सुबह ऋषिकेश के लिए निकल पड़ा। हालांकि ऋषिकेश तो कई बार पहले भी आना हुआ है। पर इस बार हमारा लक्ष्य था नीर झरना तक पहुंचना। सुबह सुबह शांतिकुंज के बाहर आटो रिक्शा मिला गया उसने मुझे ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला तक छोड़ दिया। अब लक्ष्मण झूला से नीर झरना की दूरी कोई तीन किलोमीटर है। पर यहां से आगे जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला। मैं सड़क पर सीधे चल पड़ा , पैदल पैदल। बद्रीनाथ हाईवे पर। दूरी बताने वाला बोर्ड जिस पर लिखा है बद्रीनाथ 291 और केदारनाथ 223 किलोमीटर।

 तपोवन से पैदल पैदल -  गंगाजी की धारा के साथ चलती हुई सड़क। सुबह सुबह गंगा में राफ्टिंग करती नावें दिखाई दे रही हैं। रास्ते में कुछ लोग मिले सुबह की सैर करने वाले। एक महिला से मैंने पूछा नीर झरना। बोलीं आप सही जा रहे हैं। तो दो किलोमीटर से ज्यादा चलने के बाद एक पड़ाव आया। यहां से नीर झरना के लिए बायीं तरफ सड़क जाती है। 


वहां पर संकेतक लगा है। पर आप कभी जाएं तो दाहिनी तरफ महादेव रेस्टोरेंट, नीर बुद्धा गेस्ट हाउस समेत दो तीन रेस्टोरेंट मिलेंगे। नीर झरना का नाम नीर गुड्डू भी है। दायीं तरफ की थोड़ी चढ़ाई चढ़ने पर नीर झरना का टिकट काउंटर है। प्रति व्यक्ति प्रवेश 30 रुपये। आधार कार्ड भी दिखाना पड़ता है।

वह अनजान साथी - इसके बाद फिर  आगे चढ़ना शुरू कर दी। एक रास्ता सड़क मार्ग का है तो दूसरा छोटा रास्ता जंगलों से होकर है। मैंने जंगलों वाला पैदल रास्ता अख्तियार किया। आधा किलोमीटर चलता रहा। एक अनजान कुत्ता मेरे साथ चलने लगा। जैसे ही नीर झरना की की कल कल बहती धारा दिखाई दी मैं रूक गया। पर वह कुत्ता अब गायब हो गया था। शायद मेरे अकेले मार्ग का साथी बनकर आया था। अभी झरने के पास मेरे अलावा कोई नहीं है। मैं कपड़े उतार कर नहाने के लिए कूद गया। काफी देर स्नान के बाद वापसी के लिए चल पड़ा।

गरम हो रहे पहाड़ - वापस लौटते समय कुछ परिवारिक के लोग आते दिखाई दिए। थोड़ी देर बाद एक ग्रामीण विजेंद्र मिल गए। उन्होंने बताया कि झरने से दो किलोमीटर ऊपर नीर गांव है उसी गांव में रहता हूं। बातें होने लगी। कहने लगे, मेरे गांव में भी टूरिस्ट कैंप लगने लगे हैं। पर अब इन पहाड़ों पर बारिश कम होती है। जो खेती है उसे दिन में बंदर तो रात में भालू जैसे जंगली जानवर खा जाते हैं। गांव में कोई रोजगार नहीं। हमारे गांव के लोग दिल्ली जाकर होटलों में रेस्टोरेंट में छोटी मोटी नौकरियां कर रहे हैं।

हम बद्रीनाथ हाईवे पर पहुंच चुके हैं। देख रहा हूं ऋषिकेश कर्ण प्रयाग रेल लिंक का काम शुरू हो चुका है। गांव वाले साथी इस रेल लाइन को लेकर काफी चिंता में हैं। यह रेल लाइन पहाड़ का सीना चीर देगी। हिमालय की प्राकृतिक स्थित के साथ बड़ा छेड़छाड़ हो रहा है। आखिर क्या जरूरत है इस रेलवे लाइन की। वैसे भी बद्री केदार का मार्ग साल के छह महीने बंद ही तो रहता है।

नहीं जा सका वशिष्ठ गुफा -  नीर झरना से आगे मैं वशिष्ठ गुफा जाना चाहता हूं। यह शिवपुरी से आगे गूलर के पास है। पर यहां से कोई बस नहीं मिली। काफी इंतजार के बाद। अंत में यहीं पर नास्ते में एक आलू पराठा खाने के बाद वापस तपोवन की तरफ चल पड़ा।वापसी में भी कोई सवारी या लिफ्ट नहीं मिली। पैदल पैदल ही मां गंगा का दर्शन लाभ प्राप्त करते हुए लक्ष्मण झूला तक पहुंचा।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( HARIDWAR, RISHIKESH, TAPOWAN, NEER JHARNA ) 


2 comments:

  1. जाने का दिनांक अगर लिख दिया करें तो मौसम का idea भी लग जाय करे।

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    1. धन्यवाद, इसका यात्रा काल जून 2019 है।

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