Thursday, September 12, 2019

शांति कुंज हरिद्वार - आध्यात्मिक चेतना का केंद्र


हरिद्वार ऋषिकेश मार्ग पर स्थित शांतिकुंज आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र है। यहां जितनी बार भी जाएं नई प्रेरणा और नई ऊर्जा मिलती है। मैंने शांतिकुंज का नाम बचपन में पांचवी-छठी कक्षा में पढ़ाई के दौरान सुना था। वैशाली जिले के कन्हौली में हमारे घर एक सज्जन आते थे विभूति भूषण। उन्होंने हमें युग निर्माण योजना के बारे में बताया था। वैशाली जिले के डुमरी गांव में गायत्री शक्तिपीठ की स्थापना की गई थी। उनके सौजन्य से ही हमें अखंड ज्योति पत्रिका पढ़ने को मिली। उसके बाद ये पत्रिका हमारे घर में नियमित आती रही।

पहली बार शांतिकुंज जाने का मौका 1991 में मिला। उसके बाद 1993 में। उसके बाद तो कई बार जा चुका हूं। आप शांति कुंज में दर्शन या हवन पूजन के लिए जाना चाहते हैं तो यहां पर श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क आवास उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए आपको प्रवेश द्वार पर अपना परिचय देना पड़ता है। आजकल प्रवेश के लिए आधार कार्ड साथ होना जरूरी हो गया है। ऐसा सुरक्षा कारणों से किया गया है। आम तौर पर दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु यहां अधिकतम तीन दिवस रूक सकते हैं।

गायत्री परिवार से जुड़े हुए कार्यकर्ता यहां पर 10 दिन का आध्यात्मिक जीवन का पाठ्यक्रम करने भी आते हैं। इसके लिए पहले से आरक्षण कराना पड़ता है। ऐसे सत्र सालों भर चलते रहते हैं। अगर आप गायत्री परिवार से जुड़े कार्यकर्ता हैं तो यहां एक माह या उससे अधिक का समय दान देकर कार्य भी कर सकते हैं।
शांति कुंज आने वाले श्रद्धालु यहां पर आकर युग निर्माण योजना के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा की समाधि पर दर्शन के लिए जरूर जाते हैं। काफी लोग समाधि के आसपास बैठकर ध्यान लगाते हैं। इन समाधि के नाम प्रखर प्रज्ञा और सजल श्रद्धा दिए गए हैं।

हर रोज सुबह यहां पर आप हवन में हिस्सा ले सकते हैं। हवन के लिए धोती धारण करना पड़ता है जो यहां उपलब्ध हो जाती है। यह तकरीबन एक घंटे की प्रक्रिया है। आगे आप यहां 1926 से अनवरत प्रज्जवलित अखंड ज्योति के दर्शन लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

अब शांतिकुंज का नया आकर्षण बन गया हिमालय दर्शन। देवात्मा हिमालय मंदिर में आप दर्शन कर हिमालय का विलक्षण अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। इसके बगल में देव संस्कृति दिव्य दर्शन स्थित हैं। यहां बने सुंदर फव्वारे और आयुर्वेदिक उद्यान आपका मन मोह लेते हैं। इसके आगे हरितिमा देवालय का निर्माण किया गया है। इन सबके साथ समय गुजारना आत्मिक शांति की अनुभूति प्रदान करता है।

शांतिकुंज में श्रद्धालुओं के लिए सुबह और शाम भोजन (प्रसाद) का निःशुल्क इंतजाम है। यहां हजारों लोग प्रतिदिन भोजन करते हैं। यहां भोजनालय में लोगों के लिए सात्विक भोजन परोसा जाता है। इसके अलावा यहां पर अत्यंत रियायती दर वाली कैंटीन भी है। इसमें प्रज्ञा पेय जो चाय का विकल्प है के अलावा आप अंकुरित चने समेत कई तरह क नास्ता और मिठाइयां प्राप्त कर सकते हैं।    
शांतिकुंज की दिनचर्या सुबह 3.30 बजे से आरंभ हो जाती है। शयन का समय रात्रि नौ बजे का है। यहां रहने वाले लोगों को इस दिनचर्या का पालन करना पड़ता है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
(SHANTI KUNJ, HARIDWAR, YUG NIRMAN YOJNA, GAYATRI SHAKTI PEETH ) 

       





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