Tuesday, April 23, 2013

शहजादी रोशनआरा ने बनवाया था 55 एकड़ का खूबसूरत बाग


दिल्ली के पुल बंगश मेट्रो स्टेशन के पास पहुंच गया हूं। यहां से रोशन आरा पार्क जाने की सोच रहा हूं। बर्फखाना चौक से बैटरी रिक्शा वाले शक्तिनगर की तरफ जा रहे हैं। उसमें बैठ जाता हूं। देख रहा हूं सड़क का नाम रोशन आरा रोड ही है। थोड़ी देर बाद रोशन आरा पार्क की बाउंड्री आ गई है। मैं वहीं रिक्शा से उतर गया। सामने रोशन आरा पार्क है।

मैं विशाल पार्क में दाखिल होकर घूमने लगा। दोपहर में कई जगह बच्चे खेल रहे हैं। कहीं बुजुर्गों की महफिल जमी है। इस बीच पार्क के एक हिस्से पर नजर पड़ी। यहां लिखा है सिर्फ महिलाओं के लिए। मतलब पार्क के इस हिस्से में पुरुषों का जाना प्रतिबंधित है।


शाहजहानाबाद से दूर एक बाग
लालकिले की गहमागहमी से दूर रहने के लिए मुगल बादशाह शाहजहां और मुमताज की बेटी रोशनआरा ने सब्जीमंडी के पास रोशन आरा बाग बनवाया था। शहजादी रोशनआरा यहां वह दासियों संग समय गुजारती थी। साल 1650 के आसपास शाहजहांनाबाद की चारदीवारी से तीन किलोमीटर दूर उन्होंने अपने लिए खूबसूरत बाग बनवाया। इसकी जमीन उन्हें बादशाह पिता से तोहफे के तौर पर मिली थी।

कोई फूल मुरझाता नहीं था
कुल 55 एकड़ में फैले रोशनआरा बाग के हर चप्पे पर शहजादी की नजर होती थी। बाग का रखरखाव कुछ ऐसा था कि क्या मजाल की तब कोई फूल यहां मुरझाया हुआ मिले। बाग में प्रवेश के लिए दो दरवाजे बनाए गए हैं। इनमें से एक सामान्य जबकि दूसरा मुगलकालीन वास्तु कला का बेहतरीन मिसाल है। दरवाजे पर खूबसूरत नक्काशी हैजो यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती है। बाग में हरे-भरे बगीचा और बरादरी है। आजकल रोशनआरा बाग की चारदीवारी जगह-जगह टूट गई है।

रोशन आरा का मकबरा
सितंबर 1671 में 54 साल की उम्र में रोशनआरा का निधन हो गया। उसने विवाह नहीं किया था। मुगलिया रीति रिवाज के साथ उसका जनाजा निकला और बाग में बरादरी के बीचो-बीच रोशनआरा बेगम को दफन किया गया। तो रोशन आरा का मकबरा भी यहीं बनवाया गया है।

एक सुंदर झील भी थी
रोशन आरा बाग के बीच में एक सुंदर झील भी बनवाई गई थी। ग्राउंड वॉटर के अत्यधिक दोहन की वजह से दिल्ली के शक्ति नगर इलाके में स्थित रोशन आरा बाग की झील सूख गई है। मुगलकालीन रोशन आरा बाग की झील को रीस्टोर करने का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी पहुंचा था।

 विद्वान और कूटनीतिक महिला
रोशनारा बेगम (सितंबर 1617 - 11 सितंबर 1671)  मुगल बादशाह शाहजहां मुमताज महल की दूसरी बेटी थी। वह प्रतिभाशाली शायर भी थीं। वह अपने समय की अत्यंत विद्वान और कूटनीतिक महिलाओं में शुमार थी। जिस समय शाहजहां के पुत्रों में उत्तराधिकार का युद्ध चल रहा थारोशन आरा ने औरंगजेब का पक्ष लिया था। वह राजधानी में होने वाली समस्त गतिविधियों की सूचना गुप्त रूप से औरंगजेब को भेजती रहती थी। 

रोशनआरा क्लब और बीसीसीआई
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की स्थापना बीसीसीआई की पहली बैठक राजधानी के रोशनआरा क्लब में 1927 ही हुई थी। उसकी मेजबानी पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह ने की थी। ये रोशनआरा क्लब मुगल राजकुमारी रोशन आरा बेगम के बाग का ही हिस्सा है lइस बाग मे पहले तो अंग्रेज गपशप मारने के लिए ही आते थे।उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में अंग्रेजों द्वारा क्रिकेट रोशनआरा क्लब की स्थापना की गई बाद मे यहां भारतीय लोग भी आने लगे। यहीं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की स्थापना हुई। रोशनआरा क्लब करीब 30 एकड़ में फैला है। यहां पर क्रिकेट मैदान भी है।

कैसे पहुंचे - रोशनआरा बाग शक्ति नगर इलाके से सटा हुआ है। यह पुल बंगश मेट्रो स्टेशन के करीब है। मेट्रो से उतर कर बैटरी रिक्शा से यहां पहुंचा जा सकता है। इसके पास से गुजरती हुई सड़क का नाम रोशनआरा रोड है। आप दिल्ली यूनिवर्सिटी के नार्थ कैंपस की तरफ से भी यहां आसानी से पहुंच सकते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
-        (ROSHANARA BAG, ROSHAN ARA CLUB, CRICKET, BCCI )




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