Tuesday, September 3, 2019

नेशनल वार मेमोरियल – 22 हजार शहीदों की याद



दिल्ली के इंडिया गेट पर करीब 40 एकड़ में 180 करोड़ की लागत से तैयार इस वॉर मेमोरियल आजादी के बाद हुए युद्ध में शहीदों की याद में बनाया गया है। 25 फरवरी 2019 को देश के पहला वॉर मेमोरियल राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह राजधानी दिल्ली के केंद्र में एक नया स्मारक है।

कई युद्ध की कहानियां
आजादी के बाद शहीद हुए सैनिकों की याद में बना यह मेमोरियल इंडिया गेट के पास स्थित है। इस मेमोरियल में आजादी के बाद के हुए प्रमुख युद्ध की कहानियों भी चित्रों में दर्शाई गई हैं। वार मेमोरियल में 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1947, 1965, 1971 1999 के भारत-पाकिस्तान युद्ध तथा श्रीलंका में शांति बहाल कराने के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों की गाथा है।

23 हजार शहीदों के नाम
यह वॉर मेमोरियल देश के करीब 22,600 जवानों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। वे जवान जिन्होंने आजादी के बाद से कई लड़ाइयों में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। स्मारक की गैलरी में इन शहीदों के नाम भी लिखे गए हैं। इसमें थल सेना, वायुसेना और नौसेना के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई है। शहीदों के नाम दीवार की ईटों में उभारकर लिखे गए हैं।

15 मीटर ऊंचा मुख्य स्तंभ
छह भुजाओं (हेक्सागोन) वाले आकार में बने मेमोरियल के केंद्र में 15 मीटर ऊंचा मुख्य स्मारक स्तंभ है। स्मारक का विहंगम दृश्य देखें तो यह काफी भव्य लगता है। शाम को यहां पर शहीदों की याद में सेना की ओर से परेड का आयोजन होता है। इंडिया गेट घूमने आने वाले सैलानियों के लिए यह नया आकर्षण बन चुका है।

यहां जलती है अखंड ज्योति
वार मेमोरियल के मुख्य स्मारक के नीचे अखंड ज्योति हमेशा जलती रहती है। मेमोरियल में भित्ति चित्र, ग्राफिक पैनल, शहीदों के नाम के अलावा 21 परमवीर चक्र विजेताओं की मूर्तियां भी लगाई गई हैं। इस स्मारक को चार चक्र पर केंद्रित किया गया है, जिसे अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र, रक्षक चक्र नाम दिया गया है।

बहुत पहले उठी थी मांग
आजादी के बाद के शहीदों की कुर्बानी को याद करने और सम्मान देने के लिए एक राष्ट्रीय स्मारक की जरूरत आजादी के बाद ही महसूस की गई थी। इसको बनाने की मांग तो करीब 60 साल पहले उठी थी। पर इस पर काम शुरू हुआ साल 2015 में और पूरा हुआ 2019 में।

रंग बिरंगी रोशनी में दिखता है सुंदर
एक वैश्विक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से इसका डिजाइन चुना गया था। चक्रव्यूह की संरचना से प्रेरणा लेते हुए इसे बनाया गया है। स्मारक में रात को आर्टिफिशियल लाइटिंग की जाती है। एक विशाल वॉकिंग प्लाजा भी बनाया गया है। यह स्मारक सुबह से लेकर शाम तक खुला रहता है।

सबके लिए प्रवेश निःशुल्क  
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक परिसर में प्रवेश सभी के लिए निशुल्क है। अगर आप स्मारक घूमने पहुंचे हैं तो इसे अच्छी तरह देखने के लिए अपने पास दो घंटे का समय रखें। वैसे तो स्मारक सालों भर खुला रहता है, पर गणतंत्र दिवस के आसपास कुछ दिनों के लिए बंद रह सकता है।  
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
-        ( NATIONAL WAR MEMORIAL, INDIA GATE, DELHI )




2 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में " मंगलवार 3 सितम्बर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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