Friday, August 23, 2019

उदयगिरी - इतना बड़ा तवा देखा है क्या कहीं....


विदिशा के पास उदयगिरी की गुफाओं  को देखते हुए अचानक एक विशाल तवा पर नजर पड़ती है। यह  कुदरत की अदभुत रचना है। सचमुच इतना विशाल तवा तो हमने कभी देखा नहीं था।   पहाड़ी पर चढ़ते हुए एक विशाल पत्थरों की बनी हुई  आकृति नजर आती है । ये आकृति तवा नुमा है।  पर इस तवे पर रोटी नहीं पकती।  तो फिर क्या है ये तवा...


ये  तो ईश्वरीय तवा है।   मन में कौतूहल होता है कि आखिर  इसका निर्माता कौन है।  इसे इंसानों ने काटकर तो नहीं बनाया है। जो भी हो पर है बड़ा अदभुत।  आते जाते लोग इस  वर्गाकार पत्थर की आकृति को बड़े कौतूहल से देखते हैं।  मध्य प्रदेश पर्यटन द्वारा लगाए गए बोर्ड पर इसका परिचय लिखा गया है। 


दरअसल ये तवा नुमा गुफा है। इसकी छत पर तवा नुमा  आकृति दिखाई देती है। वैसे तो ये गुफा अंदर से खाली है। हो सकता है पहले इसके अंदर मूर्तियां रही  हों। पर आजकल इसके अंदर सिर्फ एक शिलालेख है। पर यह काफी महत्वपूर्ण शिलालेख है। इसमें   ब्राह्मी लिपि में लिखे गए अभिलेख में लिखा गया है कि चंद्रगुप्त द्वितीय  विश्व को जीतने के बाद उदयगिरी आए थे।


यहां है देश की पहली गणेश मूर्ति -  उदयगिरी की गुफाओं  में पहाड़ी की ओर चढ़ने पर एक गणपति की  अदभुत प्रतिमा नजर आती है। पहाड़ों को काटकर ये  गणपति की प्रतिमा स्थापित की गई है। गणपति के  एक हाथ में  अस्त्र   है। वे  गडासा लिए हुए हैं।  उनकी सूंड  थोड़ी सी खंडित हो गई है। प्रतिमा के पीछे लाल रंग का लेप  किया गया है। ऐसा इसे मौसम की मार से बचाने के लिए किया गया है। संभवतः यह गणेश जी की देश दुनिया की सबसे प्राचीन प्रतिमा हो सकती है।   क्योंकि जैसा की हमने पहले भी चर्चा की है कि  हिंदू धर्म में मूर्तियों को निर्माण की शुरुआत उदयगिरी से ही होती है।   भारत में  उदयगिरी से ज्यादा पुरानी गणेश प्रतिमा की तलाश अभी नहीं हो सकी है। लिहाजा ये प्राचीनतम गणेश प्रतिमा है।


वन मंडल विदिशा का वन क्षेत्र  -   पहाड़ी पर घूमते हुए  मुझे विदिशा वन  मंडल का बोर्ड नजर आता है। दरअसल  ये पूरा इलाका वन क्षेत्र में आता है। राज्य सरकार की ओर से ये संरक्षित इलाका है।  यहां कई तरह की वन औषधियां  भी पाई जाती हैं।   विदिशा वन मंडल इनकी देखभाल करता है।  दरअसल उदयगिरी की गुफाओं के  आसपास भरापूरा वन क्षेत्र  है। 



वन  उत्पाद - इमली और बेर  - गुफा से नीचे उतरने पर मुझे स्थानीय लोग इमली और बेर बेचते लोग नजर आते हैं। इसे  इमली और बेर स्थानीय उत्पाद हैं।   जंगल से लाकर स्थानीय लोग इन्हें यहां पर बेचते हैं। मैं थोडी सी बेर खरीद लेता हैं खुद के खाने के  लिए।  


उदयगिरी के इन ऐतिहासिक स्मारकों  के साथ कुछ घंटे  गुजारना  यादगार रहेगा। तो अब उदयगिरी से हमारे आटो  रिक्शा वाले हमें लेकर आगे चल पड़े हैं। रास्ते में हरे-भरे खेत  नजर आ रहे हैं। अब  हमारी अगली मंजिल   है एक और ऐतिहासिक अजूबा।   तो बने रहिए हमारे साथ। 

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( UDAIGIRI CAVES, VIDISHA, TAWA, GANESHA, MP ) 



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