Tuesday, August 6, 2019

भोजपुर से सीहोर – सरबती गेहूं की धरती

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भोजपुर से भोपाल की राह आसान है। यहां से हमें शेयरिंग आटो रिक्शा मिल गया जिसने हमें मंडीदीप के पास होशंगाबाद हाईवे पर उतार दिया। रास्ते में देख पा रहा हूं कि भोजपुर मंदिर वाली सड़क पर भी नई नई आवासीय कालोनियां बन रही हैं। भोपाल शहर का यहां तक विस्तार हो रहा है।

अब हमारी मंजिल है सीहोर शहर। मंडीदीप के पास हाईवे पर सिटी बस में बैठ गया हूं। यह वातानुकूलित बस है। मैं कंडक्टर से सिटी बस स्टैंड जाने की बात करता हूं। मैं उन्हें बताता हूं कि मुझे सीहोर जाने वाली बस लेनी है। वे कहते हैं आप इस बस के आखिरी बस स्टॉप चिरायु हास्पीटल तक चलें। वह सीहोर रोड पर ही है। वहां से आपको सीहोर की बस तुरंत मिल जाएगी। मैं चिरायु तक का टिकट ले लेता हूं। सीहोर रोड पर भोपाल शहर खत्म हो जाने के बाद निजी क्षेत्र का विशाल अस्पताल बना है चिरायु हास्पीटल। बहुत सारी सिटी बसें यहां तक आती हैं।

चिरायु के पास सड़क पर खड़े होने पर थोड़ी देर में सीहोर की बस मिल जाती है। हालांकि इसमें जगह नहीं मिली। अगले कुछ स्टाप पर लोगों के उतरने के बाद जगह मिल गई। मैं सीहोर में अपने एक पुराने साथी दिलीप से मिलने जा रहा हूं। दिलीप को फोन कर दिया है। वे सीहोर बस स्टाप पर ही हमें मिल गए।सीहोर भोपाल देवास इंदौर रेल मार्ग का एक रेलवे स्टेशन है। यह भोपाल से भी पुराना शहर है। पर इसका विकास ज्यादा नहीं हो सका। सीहोर जिला मुख्यालय जरूर है पर इसकी आबादी ज्यादा नहीं है। भोपाल शहर से सीहोर की दूरी 30 किलोमीटर है।

सीहोर मालवा क्षेत्र के मध्य में विंध्याचल रेंज की तलहटी में है। सीहोर का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास है। शैव, शक्ति, जैन, वैष्णव, बुद्धवादियों और नाथ पुजारी ने सीहोर को अपने गहन ध्यान की जगह बनाई। सीहोर जिला तीन लोकसभा क्षेत्रों में बंटा हुआ है। सीहोर विधानसभा भोपाल लोकसभा क्षेत्र में आता है। इछावर और बुधनी विदिशा में आते हैं जबकि आष्टा देवास लोकसभा क्षेत्र में आता है।

सीहोर खेतीबाड़ी में मध्य प्रदेश का समृद्ध जिला है। मध्य प्रदेश के जिला सीहोर की पहचान शरबती गेहूं को लेकर भी है। शरबती गेहूं देश में उपलब्ध गेहूं की सबसे प्रीमियम किस्म मानी जाती है। शरबती गेहूं की सीहोर क्षेत्र में बहुतायत में पैदावार होती है। यहां पांच सौ सालों से शरबती गेहूं की पैदावार हो रही है। सीहोर क्षेत्र में एक काली और जलोढ़ उपजाऊ मिट्टी है जो शरबती गेहू के उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है। सीहोर शरबती गेहूं की खासियत यह है कि इसके चमक के साथ ही इसके दाने एक समान होते हैं। शरबती की चमक अच्छी होती है। 

समान्य गेहूं की तुलना में शरबती गेहूं में ज्यादा प्रोटीन होता है। इसकी रोटी भी ज्यादा मुलायम होती है। आजकल बाजार में कई तरह के गेहूं की किस्म मिल रही है। जिन्हें कई बार व्यापारी शरबती के नाम से बेच देते हैं, लेकिन सुजाता और सी-306 ही शरबती की मूल किस्म है। इनके अच्छे दाम मिलते हैं।  करीब दशकभर पहले तक सीहोर के अलावा गंजबासौदा, विदिशा, रायसेन आदि में शरबती गेहूं पैदा होता था। 

असली शरबती गेहूं कम पानी में या असिंचित जमीन पर होता है, जिसकी फसल से लेकर गेहूं तक बिल्कुल सोने की तरह दमकता है।
सीहोर के शरबती गेहूं को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के लिए ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) के तहत पंजीयन कराने के प्रयास 2014-15 में किए गए। जीआई की सूची में आए या न आए पर सीहोर शरबती गेहूं की देश भर में मांग बनी रहती है।

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( BHOPAL, SIHORE, SHARBATI GAHUN, WHEAT, ATTA  ) 

    

3 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 60 साल के हुए - पर्यावरण कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. शरबती गेंहू के विषय में जानकर अच्छा लगा। सीहोर स्टेशन की दीवारों पर बने चित्र भी खूबसूरत हैं।

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