Sunday, August 4, 2019

भोजपुर के महादेव और विशाल शिवलिंग

Top post on IndiBlogger, the biggest community of Indian Bloggers
आशापुरी से चलकर मैं भोजपुर पहुंच गया हूं। वैसे ज्यादातर लोग भोजपुर भोपाल से आते हैं। भोपाल से भोजपुर आने के लिए बस और आटो की नियमित सेवा है। यह मंडीदीप से काफी निकट है। भोपाल शहर का विस्तार धीरे धीरे भोजपुर तक होता जा रहा है। भोजपुर के शिवमंदिर में सालों भर हर रोज श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

भोपाल शहर के बाहरी इलाके में विंध्य पर्वतमाला के बीच बेतवा नदी के मनोरम तट पर भोजपुर का ऐतिहासिक शिव मंदिर स्थित है। अपने विशाल और प्राचीन शिवलिंगम के लिए यह दुनिया भर में प्रसिद्ध है। भोजेश्वर मन्दिर भोपाल से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर नामक गांव में है। इसे लोग भोजपुर का मन्दिर भी कहते हैं।

 
इस प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज ने अपने शासन काल (1010 -1055 ई ) के दौरान कराया था। यह मंदिर 115 फीट (35 मीटर) लंबे82 फीट (25 मीटर) चौड़े और 13 फीट (4 मीटर) ऊंचे चबूतरे पर निर्मित है। 


भोजेश्वर मंदिर के विस्तृत चबूतरे पर ही मंदिर के अन्य हिस्सोंमंडपमहामंडप और अंतराल बनाने की अद्भुत योजना थी। परंतु यह मंदिर पूरा नहीं हो सका। मंदिर निर्माण की स्थापत्य योजना के नक्शे व अन्य विवरण को यहां पत्थरों पर उकेरा गया है। इससे मंदिर योजना का पता चलता है। इतने स्पष्ट नक्शे और योजना को देख प्रतीत होता है कि इस मंदिर का निर्माणसमकालीन शिल्पकारों और वास्तुकारों और अभियांत्रिकों के तालमेल से किया जा रहा था। 


विशाल शिवलिंगम - इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है यहां का विशाल शिवलिंगम। अनूठे और विशाल आकार वाले इस शिवलिंग के कारण भोजेश्वर मंदिर को उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता है। चिकने लाल बलुआ पत्थर के बने इस शिवलिंग को एक ही पत्थर से बनाया गया है और यह विश्व का सबसे बड़ा प्राचीन शिवलिंग माना जाता है।

इस शिवलिंगम की आधार समेत कुल ऊंचाई 40 फीट (12 मीटर) है। इसकी ऊंचाई 7.5 फीट (2.3 मीटर) और व्यास 5.8 फीट (2 मीटर) है। यह शिवलिंग एक 21.5 फीट (6.6 मीटर) चौड़े वर्गाकार आधार (जलहरी) पर स्थापित है। मंदिर से प्रवेश के लिए पश्चिम दिशा से सीढ़ियां बनाई गई हैं। गर्भगृह के दरवाजों के दोनों ओर गंगा और यमुना नदियों की मूर्तियां बनी हुई हैं।



मंदिर के गर्भगृह के विशाल शीर्ष स्तंभ पर शिव-पार्वतीब्रह्मा-सरस्वतीराम-सीता एवं विष्णु-लक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। मंदिर के बाहरी दीवार पर यक्षों की मूर्तियां भी स्थापित हैं।

मंदिर का विशाल प्रवेश द्वार का आकार देश के किसी भी मंदिर के प्रवेश द्वार से बड़ा है। मंदिर की एक और खास बात इसके 40 फीट ऊंचाई वाले इसके चार स्तम्भ हैं। गर्भगृह की अधूरी बनी छत इन्हीं चार स्तंभों पर टिकी है। मंदिर की छत गुम्बदाकार हैं। कुछ विद्धान इसे भारत की प्रथम गुम्बदीय छत वाली इमारत भी मानते हैं।




अधूरा रह गया निर्माण - शिवलिंग का निर्माण और स्थापना होने के बाद भी इसके मंदिर का निर्माण अधूरा रह गया है। इसका निर्माण अधूरा क्यों रखा गया इस बात का इतिहास में कोई पुख्ता प्रमाण तो नहीं है पर आसपास के लोग बतात हैं कि इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में होना थापरंतु छत का काम पूरा होने के पहले ही सुबह हो गईइसलिए निर्माण अधूरा रह गया।

भोजपुर शिवमंदिर के आसपास प्रसाद की और खाने पीने की कई दुकाने हैं। मंदिर के पास आप बेतवा नदी की कल कल धारा के दर्शन कर सकते हैं। यहां से भोपाल शहर जाने के लिए आटो रिक्शा और मिनी बसें मिल जाती हैं।

-    -- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( ( BHOJPUR SHIVA TEMPLE, BHOPAL ) 


-     



No comments:

Post a Comment