Thursday, August 29, 2019

बाड़ा हिंदुराव अस्पताल और ऐतिहासिक बाउली

उत्तरी दिल्ली के बाड़ा हिंदुराव अस्पताल। यूं तो यह दिल्ली का एक व्यस्त सरकारी अस्पताल और मेडिकल कालेज का कैंपस है। पर इस अस्पताल के कैंपस के अंदर और आसपास कई ऐतिहासिक इमारते हैं। इन इमारतों में प्रमुख है पीर गायब की मजार और एक पुरानी बाउली। ये दोनों स्मारक अस्पताल परिसर के अंदर ही हैं।

दरअसल राजा हिंदूराव ग्वालियर के राजा दौलतराव सिंधिया के साले और मराठा योद्धा थे। बाद में वे दिल्ली में आकर रहने लगे। ब्रिटिश अधिकारियों से उनके रिश्ते अच्छे थे। आज जहां बाड़ा हिंदुराव अस्पताल है वह उनका निवास हुआ करता था। सन 1857 के विद्रोह के दौरान उनके आवास को काफी क्षति पहुंची।

बाद में इस स्थल पर जो एक पहाड़ी जैसी ऊंची जगह है अस्पताल का निर्माण कराया गया। यह उत्तरी दिल्ली का सबसे बड़ा अस्पताल है। इसके एक तरफ कमला नेहरू रिज का क्षेत्र है तो दूसरी तरफ दिल्ली का किशनगंज मुहल्ला। इस अस्पताल की शुरुआत 1911 में 16 बेड के एक छोटे से नर्सिंग होम से हुई थी। सन 1951 में इसे अस्पताल का रूप दिया गया। साल 2013 में इस अस्पताल के साथ मेडिकल कालेज की शुरुआत की गई।

 एक दिन गायब हो गए पीर - पीर गायब 
फिरोज शाह तुगलक वह शासक था, जिसने अपने शासनकाल में कई इमारतें बनवाईं। इन्हीं में से एक है दिल्ली के उत्तरी रिज में स्थित हिंदूराव अस्पताल से लगी एक इमारत। इसका नाम है पीर गायब। इसका निर्माण तुगलक ने अपने शिकारगाह के तौर पर कराया था। पर बाद में यहां एक पीर आकर रहने लगे थे। चौबुर्जी मस्जिद की कुछ दूरी पर ही स्थित यह स्मारक पीर गायब के नाम से लोगों के बीच मशहूर है। इस स्मारक में दो संकरे कमरे बने हुए हैं। इसकी दूसरी मंजिल की दीवारों के पलस्तर पर धार्मिक महत्व की कुछ पंक्तियां लिखी हुई हैं। ऐसा माना जाता है कि फिरोजशाह तुगलक द्वारा बसाया गया शहर फिरोजाबाद, हौज खास से पीर गायब (हिंदूराव हॉस्पीटल तक) तक फैला हुआ था। इतिहासकार फिरोजाबाद को दिल्ली का पांचवां शहर भी मानते हैं। 

आखिर यह मजार किसकी है। इसके बारे में कोई नहीं जानता। ओर ना ही किसी को इसके बारे में कोई पुख्ता जानकारी है। मगर ऐसा भी कहा जाता है। कि एक पीर इस जगह को प्रार्थना स्थल की तरह इस्तेमाल में लाते थे। मगर एक दिन वो पीर अचानक ही यहां से गायब हो गए। इसलिए इस स्मारक को लोगों ने पीर बाबा गायब कहना शुरू कर दिया। यह स्मारक अस्पताल के अहाते में बिना गढे हुए पत्थरों से बनाई गया है। आजकल यहां हर रोज दुआ और मन्नते मांगने आते हैं।

तुगलक काल की बाउली
पीर गायब के बगल में हिंदुराव मेडिकल कालेज के छात्रों का हास्टल बन गया है। इससे थोड़ा आगे चलेंगे तो अस्पताल परिसर में ही एक पुरानी बाउली है। यह बाउली भी तुगलक काल की बताई जाती है।

इस बावली का निर्माण साल 1351 से 1388 के बीच तुगलक वंश के शासक फिरोजशाह तुगलक ने करवाया था।  कभी दिल्ली में कई सौ बाउली हुआ करती थीं, उनमें से यह भी एक हुआ करती थी। कभी हजारों लोगों की प्यास बुझाने वाली यह बाउली बहुत सुंदर रही होगी। ऐसा इसको देखकर लगता है।

सिपाही विद्रोह में प्यास बुझाई
सन 1857 के विद्रोह के समय यह बाउली पानी का बड़ा स्रोत थी। ब्रिटिश फौज की तरफ से लड़ने वाले सैनिक यहां से पानी लिया करते थे। पर आजकल यह तुगलककालीन बाउली बदहाल है। इसमें नीचे उतरने की सीढ़ियां टूट गई हैं। बाउली के पानी में काई जमी है। लोग इसमें कचरा फेंकते हैं। इसके संरक्षण और इसे जिंदा करने की कोशिश किए जाने की जरूरत है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
( BARA HINDURAO, HOSPITAL, STEP WELL, PIR GAYAB) 

2 comments:

  1. आपका ब्लॉग मोबाइल कस्टमाइज नहीं है। पढ़ने में दिक़्क़त आ रही है। मेरे ब्लॉग https://www.lokpravakta.com/?m=1 को मोबाईल पर देखिये इसका इंटरफ़ेस देखिये। धन्यवाद

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