Thursday, September 19, 2013

नाचने वाली थी कुदुसिया बेगम, बनी मुगल महारानी

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दिल्ली का अति व्यस्त महाराणा प्रताप अंतरराष्ट्रीय बस अड्डा। पर आप बस अड्डे के आसपास कुछ सुकुन के पल गुजारने के लिए किसी हरे भरे स्थान पर जाना चाहते हैं तो एक विकल्प हो सकता है कुदुसिया बाग। ये कुदुसिया बाग कश्मीरी गेट बस अड्डे से यमुना पुल की ओर जा रहे फ्लाईओवर के उत्तरी तरफ है। इस बाग में प्रवेश करते ही आपको एहसास होगा मानो आप दिल्ली से कहीं बाहर आ गए हैं। लंबे चौड़े बाग की हरियाली आपका मन मोह लेगी। इस बाग में पक्षी चहचहाते और मोर नृत्य करते नजर आ सकते हैं। तो चलिए ना चलते हैं कुदुसिया बाग की ओर।


मुहम्मद शाह रंगीला की बेगम 
कुदुसिया बाग के एक ओर कश्मीरी गेट बस अड्डा है तो दूसरी तरफ दिल्ली का सिविल लाइन्स इलाका। सुबह सुबह सिविल लाइन्स में रहने वाले लोग इस बाग में टहलने आते हैं। दिल्ली मे रहने वाले लोग भी इस बाग के बारे में कम ही जानते हैं। इस बाग का निर्माण नवाब कु‍दसिया बेगम द्वारा कराया गया था जो मुगल बादशाह मुहम्‍मद शाह रंगीला की बेगम थीं।   

नाचनेवाली उधम बाई बनीं कुदुसिया बेगम
तो ये कुदुसिया बेगम कौन थीं। कहा जाता है की कु‍दसिया बेगम पहले एक नृत्य करने वाली लड़की थी। उनका नाम ऊधम बाई था। उन पर बादशाह मुहम्मद शाह की नजर पड़ी और वे मोहित हो गए। बादशाह ने उन्हें अपनी रानी बना लिया। महारानी कुदुसिया ने 1748 में इस बाग का निर्माण अपनी ओर से खूब रूचि लेकर करवाया। कभी कु‍दसिया बाग में एक खूबसूरत झरना हुआ करता था। आजकल झरना नहीं दिखाई देता। पर बेगम की बनवाई निजी शाही मस्जिद के अवशेष देखे जा सकते हैं। उन्होंने यहां गर्मियों में निवास करने के लिए एक सुंदर सा आरामगाह भी बनवाया था। बाग में अब भी इनके अवशेष देखे जा सकते हैं। इसमें एक बारादरी बनवाई गई थी। इसके 12 दरवाजे थे। इसके निर्माण में भारतीय और अरबी शैली का मिश्रण दिखाई देता है। कभी यमुना नदी कुदुसिया बाग के बगल में बहती थी। अब यमुना की धारा दूर चली गई है। बीच में रिंग रोड भी आ गया है।

फारस की चार बाग शैली 
आजकल कुदुसिया बाग में आने वाले पर्यटक केवल पश्चिमी प्रवेश द्वार जो फारस की चारबाग शैली में बनाया गया है, उसको देख सकते हैं। कुदुसिया बेगम के बेटे अहमदशाह बहादुर ने 1748 में दिल्ली की गद्ददी संभाली पर वे निक्कमे शासक साबित हुए। तब कुदुसिया बेगम शासन में रूचि लिया करती थीं। पर कुदुसिया बेगम का अंत कैसे हुआ, उनकी कब्र कहां है ये नहीं मालूम। मुहम्मद शाह रंगीला की कब्र हजरत निजामुद्दीन की दरगाह के पास है। रंगीला की गिनती बड़े कमजोर मुगल शासक में होती है। उसके शासन काल में 1739 में नादिरशाह ने दिल्ली को लूटा और धोखे से कोहिनूर हीरा भी उसने रंगीला से हड़प लिया। रंगीला का शासनकाल 1719 से 1748 तक रहा। पर उसके राज में शायरी, संगीत, चित्रकला का खूब विकास हुआ।

बाग में कई ऐतिहासिक इमारतें
कुदुसिया बाग में कई ऐतिहासिक महत्व की इमारतों के अवशेष भी हैं जिन्हें लाल बलुआ पत्थरों से बनाया गया है। इनकी वास्तुकला बेमिसाल है। पर सन 1857 में ब्रिटिश आक्रमण के दौरान कुदुसिया बाग की कई इमारतें नष्ट हो गईं। इस उद्यान के ही अंदर की दिल्ली की एक और ऐतिहासिक इमारत सेंट जेम्स चर्च भी स्थित है।

उत्तरी दिल्ली निगम की शान
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के उद्यान विभाग ने कुदुसिया बाग की हरियाली को बरकरार रखा है। बाग के पास जमुना लॉज स्थित हैं। यहां पर फिजियोथेरेपी केंद्र और चेरिटेबल क्लिनिक का संचालन होता है। कुदुसिया बाग में प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है। बाग में आप आएं तो इसे देखने के लिए एक घंटे का समय अपने पास रखें।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmai.com
-     ( KUDUSIA GARDEN, MUHAMAD SHAH RANGEELA )





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