Tuesday, September 17, 2013

कोरोनेशन पार्क – यहां हुआ था भव्य दिल्ली दरबार


आपको पता ही होगा दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी। वह 1911 का साल था। जब ब्रिटिश शासन ने राजधानी को कोलकाता से दिल्ली लाने की योजना बनाई। इस मौके पर भव्य दिल्ली दरबार का आयोजन किया गया। पर यह दिल्ली दरबार कहां हुआ था। इसका जवाब है कोरोनेशन पार्क। यह कोरोनेशन पार्क कहां है। जवाब है उत्तरी दिल्ली में।  

1911 में दिल्ली बनी राजधानी राष्ट्रीय राजधानी के किंग्जवे कैंप के निकट बुराडी इलाके में, जिस जगह पर इस शाही दरबार का आयोजन किया गया था। अब वह जगह कोरोनेशन पार्क का एक हिस्सा है । वर्ष 1911 के दिल्ली दरबार में सम्राट जार्ज पंचम एवं महारानी मैरी को भारत के तमाम शासकों ने यहीं पर सलामी दी थी। 12 दिसंबर को इस शाही मजलिस में किंग जार्ज पंचम ने भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की थी । 
दिल्ली के इतिहास में इस जगह का काफी महत्व है। वर्ष 1911 के दिल्ली दरबार में सम्राट जार्ज पंचम एवं महारानी मैरी को भारत के सम्राट और सम्राज्ञी के तौर पर ताजपोशी हुई थी । इसके साथ ही नई शाही राजधानी की आधारशिला रखी गई थी।

 लुटियन की नई दिल्ली : सर एडविन लुटियंस नामक वास्तुकार ने शहर का खाका तैयार किया था और 31 दिसंबर 1926 को इसका नाम नई दिल्ली रखा गया था। पहले राजधानी के सभी प्रमुख दफ्तर इधर ही बनाए जाने थे। पर बाद में यमुना के करीब होने और बाढ़ के खतरे को देखते हुए इसे रायसीना की पहाडियों की तरफ शिफ्ट किया गया।


दिल्ली दरबार 1911 में आयोजित एक भव्य समारोह था। इसका आयोजन लॉर्ड हार्डिंग द्वारा करवाया गया था। सन 1877 से 1911के बीच तीन दरबार लगे थे। सन 1911 का दरबार एकमात्र ऐसा था, कि जिसमें सम्राट जॉर्ज पंचम खुद पधारे थे। इसमें लगभग 26,800 पदक दिए गए, जो कि अधिकांशतः ब्रिटिश रेजिमेंट के अधिकारी एवं सैनिकों को दिए गए थे।

नया मुकुट बनाया गया: ब्रिटेन शाही घराने की मान्यता थी कि इंपीरियरल के मुकुट यूनाइटेड किंगडम के बाहर नहीं जा सकते, इसलिए दिल्ली दरबार के लिए नया मुकुट बनाया गया। इसे इंपीरियल क्राउन कहा गया। इस क्राउन में छः हजार एक सौ सत्तर उत्कृष्ट तराशे हीरे, जिनके साथ नीलम, पन्ना और माणिक्य जड़े थे। साथ ही एक शनील और मिनिवर टोपी भी थी, जिन सब का भार 965 ग्राम था।

 इस दरबार में प्रत्येक रियासत के राजकुमार, महाराजा एवं नवाब तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति, सभापतियों को अपना आदर व्यक्त करने पहुंचे। सभी सम्राट भी अपनी शाही राजतिलक की वेशभूषा में यहां आए थे। पर उदयपुर के मेवाड़ राजा इसमें नहीं आए। उन्होंने विरोध किया था। उनकी कुर्सी खाली रही।

कई साल वीरान रहा: कोरोनेशन पार्क का यह स्थल कई दशक तक वीरान रहा। पर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की सरकार ने इस कोरोनेशन पार्क के तौर पर दोबारा विकसित करने का फैसला किया। इस पार्क को विकसति करने का काम 2011 में पूरा हुआ जब दिल्ली दरबार की सौंवी सालगिरह थी। यह पार्क 57 एकड़ में फैला है। यहां पर जार्ज पंचम समेत कई ब्रिटिश अधिकारियों की विशाल मूर्तियां स्थापित की गई हैं।

आजकल कोरोनेशन पार्क गुलजार रहता है। यहां प्रेमी प्रेमिकाओं की जोड़ियां टाइम पास करने पहुंचती हैं। इसमें प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है। पार्क के प्रवेश द्वार पर पार्किंग का इंतजाम है। आप दिल्ली मेट्रो के जीटीबी नगर मेट्रो स्टेशन से ढका गांव होते हुए कोरोनेशन पार्क पहुंच सकते हैं।
 - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( CORONATION PARK, DELHI ) 


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