Monday, September 9, 2019

सदभावना की मिसाल- चुन्ना मियां ने बनवाया मंदिर

देश के कई हिस्सों में मंदिर के नाम पर झगड़े होते हैं। दो धर्मों के लोग लड़ते हैं। राम जन्मभूमि और बाबरी मसजिद का विवाद तो सैकड़ों सालों से चलता आ रहा है। पर बरेली की पहचान एक ऐसे मंदिर से है जो सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। शहर में एक ऐसा मंदिर है जिसे एक मुस्लिम परिवार ने बनवाया है। ऐसा उदाहरण देश में बहुत कम मिलेगा।

बरेली के सेठ फजल उर्र रहमान ऊर्फ चुन्ना मियां ने यहां पर भगवान विष्णु का लक्ष्मी- नारायण मंदिर का निर्माण कराकर हिंदू- मुस्लिम एकता की एक मिसाल कायम की। ये मंदिर बड़ा बाजार के पास खोखरा पीर इलाके में कटरा मानराय में है। इसके ठीक बगल में बुधवारी मस्जिद भी है। इस इलाके में पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को बसाया गया था। 

इस मंदिर का इंतजाम देखने में आज भी उनके परिवार के मोहम्मद अतिकुर रहमान साहब सहयोग करते हैं। सुबह की पूजा समय अक्सर वे मौजूद रहते हैं। बरेली गंगा जमुनी तहजीब का नायब उदाहरण वाला शहर है। मंदिर परिसर में लक्ष्मी नारायण, बजरंग बली, शिव और अन्य देवी देवताओं की मोहक मूर्तियां हैं।


चुन्ना मियां ने मंदिर के लिए ईंट ढोई - बरेली में हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल सीख लेने वाली है। बरेली में हिंदू राजा मकरंद राय ने विशाल मस्जिद का निर्माण कराया तो चुन्ना मियां से लक्ष्मी नारायण मंदिर बनवाया। पूरा शहर इसे चुन्ना मियां के मंदिर के नाम से ही जानता है। सन 1958 में चुन्ना मियां ने इस मंदिर के निर्माण में सबसे ज्यादा एक लाख 10 हजार रुपये का योगदान किया। साथ ही उन्होंने अपनी जमीन भी मंदिर निर्माण के लिए दान में दी।

चुन्ना मियां मंदिर के लिए जयपुर से मूर्तियां खरीद कर लाए। साथ ही मंदिर के निर्माण के लिए अपना काफी वक्त भी दिया। उन्होंने मंदिर के निर्माण में खुद ईट भी ढोई थी। मंदिर के अंदर चुन्ना मियां की ईंट ढोते हुए तस्वीर भी लगी है। बरेली के लोग इस मंदिर पर गर्व करते हैं।
राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद ने उदघाटन किया -  देश के पहले राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद ने जब चुन्ना मियां के इस प्रयास के बारे में सुना तो वे काफी प्रभावित हुए। इस मंदिर का उद्घाटन करने 16 मई 1960 में राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद आए थे। इतना ही नहीं राजेद्र बाबू ने भी इस मंदिर के निर्माण में अपनी ओर से राशि दान में दी। उनका नाम भी मंदिर के दान दाताओं की सूची में लिखा हुआ है। जबकि मंदिर में चुन्ना मियां का नाम सबसे ज्यादा दान देने वालों की सूची में लिखा हुआ है।

मुकदमा वापस लेकर मंदिर बनवाया - कहा जाता है चुन्ने मियां ने पहले मंदिर पास पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के खिलाफ जमीन अतिक्रमण का एक मुकदमा दायर किया हुआ था। पर हरिद्वार के एक संत से मुलाकात ने उनकी जिंदगी बदल दी। 
इस मंदिर के निर्माण के लिए उन्हे महान संत हरिमिलाप जी महाराज से प्रेरणा मिली। उनकी तस्वीर भी मंदिर के अंदर लगाई गई है। उन्होंने न सिर्फ मुकदमा वापस ले लिया बल्कि मंदिर निर्माण में मदद करने लगे। पुराने बरेली शहर के लोग चुन्ना मियां की नजीर देेते हैं। बरेली का चुन्ना मियां का लक्ष्मी नारायण मंदिर शहर के लोकप्रिय मंदिरों में शामिल है।

 चुना मियां के लक्ष्मीनारायण मंदिर में सालों भर कई तरह के आयोजन होते रहते हैं। सुबह से लेकर शाम तक यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। कई तरह के धार्मिक आयोजन मंदिर परिसर में चलते रहते हैं। देश के दूसरे हिस्से लोग बरेली में सदभावना के इस मंदिर से प्रेरणा ले सकते हैं। ऐसे मंदिर हमारी सूझबूझ और सोच को मजबूत करते हैं। 
कैसे पहुंचे : बरेली रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी चार किलोमीटर है। शेयरिंग ऑटोरिक्शा से बड़ा बाजार पहुंचे। वहां किसे से भी कटरा मनराय का चुन्ना मियां मंदिर पूछ लें।

बरेली शहर के बारे में और पढ़े - सदभावना का शहर बरेली 
-        : विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com 
( CHUNNA MIYAN TEMPLE, BAREILLY, MUSLIM MADE A HINDU TEMPLE ) 

2 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 26 अगस्त 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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