Thursday, August 15, 2019

हबीबगंज स्टेशन का कायाकल्प और शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस

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इस्लामनगर से निकलने के बाद मैं भोपाल के ज्योति सिनेमा के पास पहुंच गया हूं। यह भोपाल शहर का प्रमुख मार्केटिंग क्षेत्र है। इसके आसपास कई प्रमुख समाचार पत्रों के दफ्तर हैं। साथ ही आसपास में अच्छा खासा बाजार है। मुझे यहां अपने पुराने साथी और भोपाल समाचार के संचालक उपदेश अवस्थी से मिलना है। 

ज्योति सिनेमा और स्ट्रीट फूड का मजा 

ज्योति सिनेमा के आसपास स्ट्रीट फूड के स्टाल हैं। यहां पर भोपाल की युवा पीढ़ी की भीड़ लगी रहती है। चाहे दोपहर हो या शाम यहां चहल पहल बनी रहती है। मैं ज्योति सिनेमा उपदेश भाई को दिए समय से पहले पहुंच गया हूं तो मैंने भी यहां फ्राइड राइस का स्वाद लिया।

 अपने वादे के मुताबिक उपदेश भाई समय पर मिल गए। उनके साथ काफी की चुस्की के साथ ढेर सारी नई पुरानी बातें हुईं। उनसे मुलाकात के दौरान ही मैंने भोपाल के पुराने और वरिष्ठ पत्रकार अजय त्रिपाठी जी से मिलने की इच्छा जताई। मेरे पास उनका नंबर नहीं था। उपदेश भाई ने किसी पत्रकार से बात करके अजय जी का नंबर उपलब्ध कराया। मेरी उनसे बात हुई। 

होशंगाबाद रोड  पर चिनार मॉल में हरिभूमि और राजस्थान पत्रिका अखबार के दफ्तर हैं उसी भवन में एक नए टीवी चैनल के ब्यूरो चीफ के दौर पर अजय जी इन दिनों अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मैं सिटी बस में बैठकर उनसे मिलने पहुंच गया। चिनार मॉल के आसपास के इलाके में भोपाल की सड़के काफी चौड़ी हैं। दोनों तरफ सर्विस लेन बना है। सर्विस लेन के पास हरियाली भी है। ये नया भोपाल है जिस तरफ कई नए मॉल और खाने पीने के बेहतरीन रेस्टोरेंट बने हैं।

जब मैं ईटीवी के एमपी-छत्तीसगढ़ चैनल में रामोजी फिल्मसिटी हैदराबाद में साल 2007  में कार्यरत था तब अजय त्रिपाठी जी भोपाल के ब्यूरो चीफ थे। मेरी उनसे अक्सर बात होती थी पर कभी मुलाकात नहीं हुई। आज पहली बार उनसे मिलना हुआ। पर मुलाकात ऐसी ही रही जैसे बरसों से एक दूसरे को जानने वाले मिलते हैं।

रात को मेरी दिल्ली वापसी की ट्रेन हबीबगंज रेलवे स्टेशन से है। इस बीच मेरे पास दो घंटे का समय है। मैंने अपने एक और पुराने साथी शैलेंद्र सिंह राजपूत को फोन किया। वे इन दिनों बंसल न्यूज में कार्यरत हैं। उनका दफ्तर हबीबगंज के पास ही है। शैलेंद्र हमारे साथ ईटीवी , हैदराबाद में थे। उनसे कुछ साल पहले रायपुर में भी मिलना हुआ था। हबीबगंज स्टेशन पर एक बार फिर उनसे मुलाकात सुखद रही।

हबीबगंज रेलवे स्टेशन का कायाकल्प जारी है। इसे निजी क्षेत्र के सहयोग से विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन बनाया जा रहा है। इसका ठेका बंसल समूह को ही मिला है। फिलहाल स्टेशन पर काफी तोड़फोड़ दिखाई दे रही है। हो सकता है कुछ सालों बाद जब आप हबीबगंज आएं तो यह स्टेशन चमचमाता हुआ मिले। पर इस निजीकरण की रेलयात्रियों को क्या कीमत चुकानी पड़ेगी इसको लेकर रेलवे पर नजर रखने वाले लोग थोड़े सशंकित हैं।

दिल्ली के लिए चलने वाली हबीबगंज निजामुद्दीन शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस (12155) समय से चल पड़ी। समय बद्धता, सफाई के मामले में यह देश के बेहतरीन ट्रेनों में शुमार है। इसके स्लिपर क्लास के डिब्बे में भी हर डिब्बे में समय सारणी लगी है। टायलेट में एसी कोच की तरह ही लंबी पाइप लगाई गई है। यहां पर साबुन भी है। कोच की सफाई व्यवस्था अति उत्तम है। इसमें स्लिपर क्लास के 11 कोच हैं। चार समान्य डिब्बे हैं। एसी3 के चार और एसी2 के दो कोच हैं। यह देश की पहली आईएसओ सर्टिफाइड ट्रेन में से एक है। इसका संचालन 23 मई 1999 को आरंभ हुआ था। अप्रैल 2007 में इस ट्रेन को आईएसओ 9002 का प्रमाण पत्र मिला। 

भोपाल गुजरने के बाद विदिशा और गंज बसौदा जैसे स्टेशन आए। इसके बाद मैं अपने बर्थ पर सो गया। सुबह नींद खुली तो ट्रेन तुगलकबाद पहुंचने वाली थी। स्टाप नहीं होने पर भी ट्रेन यहां रुक गई। मैं तुगलकबाद में ही उतर गया क्योंकि यहां रेलवे स्टेशन के सामने ही तुगलकाबाद का मेट्रो स्टेशन है। आज 26 जनवरी है तो नन्हें नन्हें बच्चे छोटे छोटे तिरंगे बेच रहे हैं। तिरंगे मतलब आजादी का प्रतीक। पर इनका बचपन आजाद कहां है। एक तिरंगा खरीदने के बाद मैंने तुगलकाबाद से अपने घर के रास्ते वाली मेट्रो ट्रेन ले ली।   
-        विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com 
( BHOPAL, HABIBGANJ EXPRESS ) 


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