Monday, August 12, 2019

इस्लामनगर - पुराने भोपाल की कुछ तस्वीरों से साक्षात्कार


सीहोर में दिलीप भाई के परिवार से विदा लेकर भोपाल के लिए निकल पड़ा हूं। सुबह सुबह उनके घर सुस्वादु नास्ता करने को मिला। अपने गांव घर की याद आ गई। सीहोर से भोपाल के बीच शेयरिंग एंबेस्डर कारें चलती हैं। हालांकि एंबेस्डर कार का उत्पादन तो कई साल पहले बंद हो चुका है। पर यहां पर ये सफेद कारें अभी भी शेयरिंग में चल रही हैं। मैं ऐसी ही एक कार में बैठकर भोपाल के लिए निकल पड़ा हूं। भोपाल शहर में हमिदिया रोड पर उतर गया। 

यहां पर एक आटो रिक्शा वाले से बात की इस्लाम नगर चलने के लिए। वह तैयार हो गया। और हम चल पड़े भोपाल के इतिहास का एक पन्ना देखने के लिए। इस्लामनगर मुख्य शहर से महज 13 किलोमीटर दूर बैरसिया रोड पर स्थित है। आजकल इस्लाम नगर भोपाल जिले में स्थित एक ग्राम पंचायत है यह तहसील हुजूर में फंदा ब्लॉक के अंतर्गत आता है। करोंद चौराहा, निशातपुरा और लंबाखेडा पार करने के बाद इंदौर विदिशा बाईपास आया। इसको भी पार करने के बाद इस्लामनगर में हम प्रवेश कर गए हैं। यह किसी गांव जैसा नजर आता है। इस्लामनगर की ऐतिहासिक इमारतों को देखने के लिए 10 रुपये का प्रवेश टिकट है। टिकट लेकर मैं अंदर प्रवेश कर गया।

यहां पर रानी महल, चमन महल, गोंड महल, एक मसजिद और मकबरा खास तौर पर देखे जा सकते हैं। आजादी के पहले देश में भोपाल, हैदराबाद के बाद सबसे बड़ा मुस्लिम राज्य था। यहां के शासक नवाब कहलाते थे। इस्लामनगर वह जगह जिसे नवाबों ने पहली राजधानी बनाई थी। पूर्व में इस्लाम नगर भोपाल रियासत की राजधानी हुआ करती थी । यहां भोपाल की स्थापना करने वाले नवाब दोस्त मोहम्मद खान द्वारा निर्मित महलों के खंडहर आज भी मौजूद है।

सत्रहवीं और अठारहवीं सदी में भोपाल शाही राज्य की राजधानी रहे इस्लाम नगर की दीवारें अब दरकने लगीं हैं लेकिन यहां के गार्डन में खिले फूल आज भी जाता हैं। इस्लामनगर की स्थापना सिपाही दोस्त मोहम्मद ( 1708-1726 ) ने की थी। पहले यह जगह जगदीशपुर के नाम से जानी जाती थी। औरंगजेब की मृत्यु के बाद की चारों ओर अफरा-तफरी में जब दोस्त मोहम्मद दिल्ली से भाग रहा था, तो इसी दौरान उसकी मुलाकात गोंड रानी कमलापति से हुई। कमलापति ने दोस्त मोहम्मद से मदद मांगी थी। उनकी मदद से उसने इस्लामनगर में अपनी राजधानी बनाई। दोस्त मुहम्मद अपने साथ इस्लामी सभ्यता लेकर आया जिसका प्रभाव उस काल के महलों और दूसरी इमारतों मे साफ दिखाई देता है।

चमन महल और रानी महल - भोपाल से करीब 13 किलोमीटर दूर इस्लाम नगर तक की यात्रा सैलानियों के लिए बहुत कुछ सहेजे हुए है। पर यहां रोज कम ही लोग आते हैं। यहां चमन महल और रानी महल दो मुख्य आकर्षण हैं। इस्लाम नगर में महलों के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर, ककिया ईंटों, और चूने का उपयोग किया गया था।

इन महलों में प्रमुख है रानी महल जो रानियों का निवास था। इसका खुला आंगन, धनुषाकार बरामदे, छतरी और पुष्प रूपांकन भी दिलचस्प आकर्षण हैं।  इस्लाम नगर हिंदू और मुगल वास्तुकला में बने अपने अतीत की सुंदरता से रूबरू करवाता है। इस्लाम नगर में एक गैलरी में भोपाल के नवाबों की पुरानी तस्वीरें देखी जा सकती हैं। यहां पुराने भोपाल के भी कुछ दुर्लभ फोटोग्राफ हैं।


इस्लामनगर घूमने के लिए आपके पास दो घंटे का वक्त होना चाहिए। अब उसी आटो रिक्शा से फिर भोपाल शहर की ओर वापस चल पडा हूं। अब कुछ पुराने दोस्तों से मुलाकात का इरादा है।
  - विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com 
 ( ISLAMNAGAR, BHOPAL ) 



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