Friday, August 2, 2019

आशापुरी - परमारकालीन मंदिरों का अनूठा समूह

भीम बेटका से निकलकर हाईवे पर आ गया हूं। कोई बस नहीं मिल रही है। थोड़ी देर में ओबेदुल्लागंज तक जाने वाला एक आटोरिक्शा मिल गया। ओबेदुल्लागंज बाजार में पहुंचने पर भूख लग गई है। एक होटल में खाने के लिए पहुंचा। साठ रुपये में भरपेट भोजन। रोटी, चावल, दाल सब्जी की थाली। 



खाने के बाद हमारा अगला पड़ाव है भोजपुर। पर यहां से भोजपुर के लिए सीधा वाहन नहीं है। अगर सार्वजनिक वाहन से घुमक्कड़ी कर रहे हैं तो यही घाटा होता है। वाहन के इंतजार में समय खराब होता है। पर कई बार इसके फायदे भी हो जाते हैं। मैं आशापुरी जाने वाले आटोरिक्शा में बैठ जाता हूं। आटोवाले ने बताया कि आशापुरी से भोजपुर 6 किलोमीटर है। आपको वहां से कोई न कोई साधन मिल ही जाएगा।


आशापुरी भोपाल से 18 किलोमीटर दूर एक गांव है। पर मुझे आशापुरी पहुंचकर पता चलता है कि यहां भी कुछ ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल हैं। तो मैं तय करता हूं कि आशापुरी के दर्शन कर लिए जाएं। यह मध्य प्रदेश सरकार के पुरातत्त्व विभाग द्वारा संरक्षित स्थल है।

आटो वाला हमें आशापुरी गांव में उतार देता है। कुछ दूर चलने पर गांव में एक संग्रहालय बनाया गया है। इस संग्रहालय में शिव, गणेश और कई देवी देवताओं की मूर्तियां यूं ही खुले में रखी गई हैं। इनमें एक गणेश जी की मूर्ति तो अत्यंत विशाल है। इसकी कलात्मकता भी गजब की है।   इन मंदिरों के ध्वंसावशेषों से प्राप्त लगभग 450 कलाकृतियों को आशापुरी ग्राम में ही एकत्रित करके रखा गया है। ये विष्णु और शिव तथा उनके विभिन्न स्वरुपों से संबंधित हैं। अन्य प्रतिमाओं में जैन यक्ष-यक्षणियां, नायक-नायिकाएं आदि परमार काल के लोकजीवन एवं मान्यताओं को बतलाते हैं।

26 मंदिरों का समूह - दरअसल आशापुरी परमार काल का प्रसिद्ध नगर था, जहां कई कलात्मक मंदिरों का निर्माण हुआ था। आशापुरी का संग्रहालय देखने के बाद मैं गांव के लोगों के रास्ता पूछकर आशापुरी के मंदिरों को देखने के लिए चल पडता हूं। ये मंदिर गांव से आधाकिलोमीटर बाहर हैं। यहां पर कोई भी मंदिर साबुत नहीं बचा है। पर इन खंडहरों को देखकर लगता है कि कभी यहां कितने विशाल और सुंदर मंदिरों का समूह रहा होगा। यहां पर कुल 26 मंदिर एक किलोमीटर के दायरे में बनाए गए थे।

परमार कला शैली के लिए प्रसिद्ध रायसेन जिले का ग्राम आशापुरी भोजपुर से सिर्फ छह किलोमीटर दूरी पर स्थित है। आशापुरी में भूतनाथ मंदिर, शिवमंदिर और जैन मंदिर के अवशेष इस बात के साक्षी हैं कि यहां उत्तुंग शिखरों से युक्त विशाल देवालयों का निर्माण किया गया था। भोजपुर की भांति ही यहां का वर्तमान भूतनाथ मंदिर भी बांध के विशाल घाट पर निर्मित कराया गया था। इस बांध के अवशेष तत्कालीन निर्माण कला की श्रेष्ठता के प्रमाण के रूप में दिखलाई देते हैं।

200 साल में बने थे मंदिर - आशापुरी के मंदिरों बनाने में 200 साल लगे थे। इन मंदिरों को बनाने का काम प्रतिहार राजाओं के काल में नौवीं से दसवीं सदी के बीच शुरू हुआ था। इसके बाद परमार काल में 10वीं सदी के मध्य से लेकर ग्यारहवीं सदी के अंत तक लगातार बनते रहे। खास बात यह है कि इन मंदिरों के निर्माण में किसी भी प्रकार के मसालों का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि पत्थर के ऊपर पत्थर रखकर मंदिर तैयार किए गए थे।


आशापुरी के तमाम मंदिरों के बीच एक हनुमान जी का ही मंदिर बचा है जहां पर नियमित पूजा पाठ करने वाले लोग आते हैं। पर हमें आशापुरी के पुरात्त्विक स्थल पर मौजूद चौकीदार बताते हैं कि गांव के शुरुआत में ही स्थित शिव मंदिर को आप जाते हुए जरूर देख लें।





कैसे पहुंचे – आशापुरी रायसेन जिले के गौहरगंज तहसील में पड़ता है। यहां आप ओबेदुल्लागंज से आटो रिक्शा से पहुंच सकते हैं। ओबेदुल्लागंज से आशापुरी की दूरी 8 किलोमीटर है। भोजपुर से आशापुरी की दूरी 6 किलोमीटर है।

आशापुरी के बाद अब मैं भोजपुर की राह पर हूं। हमें कोई शेयरिंग आटो नहीं मिला है तो मैंने 100 रुपये में एक आटो आरक्षित कर लिया है भोजपुर के लिए। पर इस आटो को रास्ते में कई सवारियां मिलने लगी हैं। गांव में वाहन कम मिलते हैं इसलिए मैं भी इन सवारियों को मना नहीं करता हूं। अब हम भोजपुर पहुंचने ही वाले हैं।



बिलौटा का शिव मंदिर  आशापुरी गांव से ठीक पहले चौराहे पर बिलौटा में अनूठा शिव मंदिर स्थित है। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंगम में 1008 छोटे छोटे शिवलिंगम बनाए गए हैं। ऐसी मान्यता है कि इसका एक बार अभिषेक करने से आपको 1008 शिवलिंगम के अभिषेक का पुण्य मिल जाता है। मैं भी यहां रखे कूप जल से शिवलिंगम का अभिषेक करके श्रद्धा से सिर झुका लेता हूं।



बिलौटा का यह शिव मंदिर भी परमार कालीन बताया जाता है। आसपास के गांवों से काफी श्रद्धालु इस शिव मंदिर तक पूजा करने पहुंचते हैं।बिलौटा शिवलिंग के सामने नंदी और मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित है। शिवरात्रि के मौके पर यहां विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है। यहां पर तब विशाल मेला लगता है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com 
( ASHAPURI, BHUTNATH TEMPLE ) 

2 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्मदिवस - जिन्होंने राष्ट्र ध्वज तिरंगा बनाया - पिंगली वेंकैया - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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