Saturday, July 6, 2019

साबरमती रिवर फ्रंट और साइकिल की सवारी


काठवाड़ा में कार म्युजियम देखने के बाद हमलोग शेयरिंग आटो से ओधव सर्किल पर पहुंच गए। दोपहर के 3 बज गए हैं। पर भूख लगी है। लंच का समय भागा जा रहा है। तभी हमें ओधव चौराहे पर बने मार्केटिंग कांप्लेक्स  डिनर पोस्ट नामक शानदार रेस्टोरेंट दिखाई दे जाता है। बस पहुंच गए अंदर। शानदार डेकोरेशन और खाना भी उम्दा किस्म का है तो हम टूट पड़े हैं खाने पर। इसके बाद होटल वापस। डिनर पोस्ट की खाने की दरें भी काफी वाजिब हैं। हमारी अहमदाबाद की इस यात्रा में ये यादगार लंच रहा, जहां हमने पूरे दिल से खाया।

रात्रि के आगोश में साबरमती के तट पर मस्ती-  जब साल 2013 में अहमदाबाद आना हुआ था तो साबरमती नदी का रिवर फ्रंट नहीं बना था। पर इस बार तो हम रिवर फ्रंट का बहुत शोर सुन चुके हैं। तो आज की शाम साबरमती के नाम। शाम को होटल से हमलोग एक आटो रिक्शा से रिवर फ्रंट के लिए निकले। आटो वाला पूछ रहा है कि आप वहां क्यों जा रहे हो। जैसे उसकी नजर में रिवर फ्रंट कुछ खास नहीं हो। पर कुछ साल पहले यहां चीन के प्रधानमंत्री आए थे और हमारे प्रधानमंत्री उन्हें इसी साबरमती रिवर फ्रंट पर झूले पर झुला रहे थे।

आटो रिक्शा ने हमें सुभाष ब्रिज के पास छोड़ दिया। रिवर फ्रंट वाली सड़क पर आटो रिक्शा चलने की अनुमति नहीं है। खैर हमलोग थोड़ा पैदल चलकर रिवर फ्रंट के प्रवेश द्वार तक पहुंच गए। प्रवेश टिकट लेने के बाद अंदर दाखिल हो गए। शाम ढल चुकी है। रिवर फ्रंट पर बना पार्क विद्युत प्रकाश से झिलमिल हो रहा है।


साबरमती रिवर फ्रंट पर बापू का एक विशाल चरखा लगाया गया है। यह रिवर फ्रंट दो स्तर पर बना है। रिवर फ्रंट के ऊपरी हिस्से में तो हरा भरा पार्क बना है। नीचे के हिस्से में ट्रैक है जिस पर आप पैदल चलें या फिर साइकिल से। नदी में मोटर बोट की सवारी करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यहां पर इंतजाम किया गया है।

कुछ साल पहले अहमदाबाद में साबरमती नदी सूखी रहती थी पर अब नदी में पानी आ चुका है। इसमें शाम को लोगों को घुमाने के लिए स्टीमर चलती है। रिवर फ्रंट पर आइसक्रीम के स्टाल और फूड कोर्ट भी बने हैं। पर हमारी रूचि तो साइकिल दौड़ाने में है। सुभाष ब्रिज के नीचे बने स्टैंड से साइकिलें किराये पर मिलती हैं। आधार कार्ड दिखाकर आधे घंटे के लिए 50 रुपये में साइकिल मिल गई। मैं और अनादि साइकिल से रिवर फ्रंट पर फर्राटा भरने लगे।


कुल 11 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट -  सन 1997 में इस रिवर फ्रंट पर गुजरात सरकार ने केंद्र सरकार की मदद से काम शुरू करवाया था। कोई 1152 करोड़ रुपये इसके निर्माण में खर्च किए गए हैं। यह को 11.2 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट है जो सुभाष ब्रिज से शुरू होकर वसना ब्रिज तक जाता है। नदी के पूर्वी और पश्चिमी दोनों तरफ 11.2 किलोमीटर लंबा वॉक-वे बनाया गया है। इसमें 31 घाटों का निर्माण किया गया है। साथ ही बाढ़ आने की स्थित में पानी निकलने का भी इंतजाम किया गया है। हमलोग अपनी साइकिल से इस रिवर फ्रंट पर 5 किलोमीटर से कुछ ज्यादा चलते गए उसके बाद फिर वापस लौटने लगे।


साबरमती पर बने हैं सात पुल
साइकिल चलाते हुए साबरमती नदी पर कई पुल आए। सुभाष ब्रिज के बाद दधिची ब्रिज फिर गांधी  ब्रिज, उसके बाद नेहरु ब्रिज, उसके बाद आता है एलिस ब्रिज (स्वामी विवेकानंद सेतु)। एलिस ब्रिज साबरमती पर बना सबसे पुराना पुल है जो 1872 में बनना शुरू हुआ था। सन 2002 में इसे चौड़ा करके इसका नाम स्वामी विवेकानंद सेतु रखा गया। इसके बाद सरदार ब्रिज (जमालपुर ब्रिज), फिर डाक्टर आंबेडकर ब्रिज। ये अहमदाबाद शहर में साबरमती नदी पर बने सात प्रमुख पुल हैं। सुभाष ब्रिज के पास ही उस पार बापू का साबरमती आश्रम है।

साबरमती रिवर फ्रंट के प्रमुख हिस्से हैं थॉट गार्डन, सन डायल, खुला एम्पिथियेटर, माउंट प्लाजा, स्टेप वेल, बाजार स्ट्रीट आदि । अगर आप यहां आएं तो पूरा मजा लेने के लिए अपने पास तीन घंटे का समय रखें।


रिवर फ्रंट प्रवेश – साबरमती रिवर फ्रंट में प्रवेश गेट नंबर 2 और 3 से किया जा सकता है। इसमें सुबह 6 से 8 बजे तक प्रवेश स्थानीय लोगों और सुबह टहलने वालों के लिए फ्री है। इसके बाद बड़ों के लिए 10 रुपये बच्चों के लिए 5 रुपये का टिकट लेना पड़ता है। अगर स्कूल ट्रीप है तो एक रुपये प्रति बच्चा टिकट लेना पड़ेगा। प्रवेश सुबह 9 बजे से रात्रि 10 बजे तक ही संभव है। हर सोमवार को रिवर फ्रंट में सैलानियों का प्रवेश बंद रहता है। तो बस इतना ही कल चलेंगे लोथल की ओर...
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
(SABARMTI RIVER FRONT, ADI, SEVEN BRIDGE ) 


2 comments:

  1. सर seo से रिलेटेड blog लिखिए

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    1. मैं इसका एक्सपर्ट नहीं हूं भाई...

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