Monday, July 29, 2019

आदि मानवों की दुनिया - भीम बेटका की ओर


एक दिन पहले की अपेक्षा भोपाल में आज ठंड बढ़ गई है। फरवरी के महीने में इतनी ठंड भोपाल में कभी नहीं पड़ी। सुबह सुबह मैं भीम बेटका के लिए निकल पड़ा हूं। होटल से चेक आउट कर दिया है। हमने रेलवे स्टेशन के पास के बस स्टैंड से इटारसी जाने वाली बस ली है। भीम बेटका भोपाल से होशंगाबाद इटारसी मार्ग पर ओबेदोल्लागंज से थोड़ा आगे है। पहले मैंने ओबदोल्लागंज तक का ही टिकट लिया है। पर जब कंडक्टर को बताया कि मुझे भीम बेटका जाना है तो उन्होंने 10 रुपये का और टिकट लिया और भीम बेटका के स्वागत द्वार पर उतार दिया। वैसे भीम बेटका आने वाले बहुत से सैलानी अपनी आरक्षित गाड़ी लेकर आते हैं। भोपाल से भीम बेटका की दूरी 45 किलोमीटर है। नजदीक के शहर होशंगाबाद और ओबेदुल्लागंज हैं। भीम बेटका से होशंगाबाद 30 किलोमीटर की दूरी पर है।

भोपाल से इटारसी की सड़क को फोर लेन बनाए जाने का काम तेजी से चल रहा है। इससे आवागमन और सुगम हो जाएगा। वैसे भीमबेटका आप रेल से भी पहुंच सकते हैं। भोपाल से इटारसी रेलवे लाइन पर ओबदुल्लागंज और बरखेड़ा रेलवे स्टेशन के बीच भीम बेटका स्थित है।

हाईवे के बगल में भीम बेटका का स्वागत कक्ष बना है। यहां पर होटल, कैफेटेरिया, शौचालय, पेयजल आदि का इंतजाम है। यहां कोई भी सैलानी छोटा सा ब्रेक ले सकता है। पर यहां से भीम बेटका की दूरी तीन किलोमीटर है।



 पैदल चल पड़ा सफर पर - अगर आपके पास अपना वाहन नहीं है तो यह दूरी पैदल ही तय करनी पड़ेगी। यहां अगर साइकिल किराये पर देने का प्रावधान कर दिया जाए तो यात्रा सुगम हो सकती है। मेरे पास कोई विकल्प नहीं है। बहरहाल मैं पैदल ही चल पड़ा हूं। स्वागत कक्ष के बगल में रेलवे फाटक पार करने के बाद सीधी सड़क। सड़क के दोनों तरफ हरे भरे खेत हैं। तकरीबन एक किलोमीटर चलने के बाद रास्ता दो राहा आता है। यहां से बायीं तरफ चलने का संकेतक है। अब रास्ता पथरीला हो गया है। खेत कम हो गए हैं। पर जानवर घास चरते दिखाई दे रहे हैं। 



प्रवेश टिकट 25 रुपये का -  भीम बेटका का टिकट घर आ गया है। यहां पर एक आदमी का प्रवेश टिकट 25 रुपये का है। अगर आपके पास वाहन है तो उसका टिकट अलग से लगता है। हर वाहन के लिए अलग अलग प्रवेश दरे हैं। मुझे उम्मीद थी कोई बाइक वाला या कार वाला लिफ्ट देने वाला मिल जाएगा। पर ऐसा नहीं हुआ। पर सुबह सुबह 3 किलोमीटर की सैर करन में भी क्या बुराई है। वह भी जब हम आदि मानवों यानी अपने पुरखों के आवास गृह को देखने जा रहे हों। तो चलते चलिए ना। रास्ते में पिकनिक मनाने वालों ने कहीं कहीं प्लास्टिक की बोतले फेंक कर गंदगी फैला रखी है। 

तकरीबन एक घंटे में तीन किलोमीटर की मंद गति से पदयात्रा करते हुए हम आखिर पहुंच ही गए हैं भीम बेटका या फिर भीम बैठका। भारत में यूनेस्को विश्व विरासत सूची का एक और स्थल। यूनेस्को ने भीम बेटका रॉक शेल्टर्स को अपनी विश्व विरासत सूची में साल 2003 में शामिल किया। खास तौर पर आदि मानवों द्वारा बनाई गई रॉक पेंटिंग के कारण इसका चयन किया गया। तो यह भी उन स्थलों में है जहां देशी से ज्यादा विदेशी लोग हर रोज घूमने के लिए पहुंचते हैं। तो चलिए अब अंदर चलते हैं। पढ़ते रहिए अगली कड़ी में सैर करेंगे भीम बेटका की...
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
(BHIMBETKA, BHOPAL ) 
  





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