Sunday, July 28, 2019

भोपाल में पोहा और मावा जलेबी

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जब 1999 में भोपाल जाना हुआ था तो सुबह के नास्ते में वहां पर पोहा मिल रहा था दो रुपये में । वहां नास्ते में आपको अब भी पोहा मिल जाएगा पर अब उसके लिए आपको 10 रुपये चुकाने होंगे। वैसे तो पोहा इंदौर का लोकप्रिय नास्ता है, पर इंदौर से नजदीक होने के कारण भोपाल की सड़कों पर भी पोहा खूब मिलता है।

इस बार भी भोपाल रेलवे स्टेशन पर उतर कर बाहर आते ही हमने नास्ते में सबसे पहले पोहा ही लिया। पर हमने थोड़ी दूर चलने पर देखा कि एक सज्जन ठेले पर हरे चने को भूनकर बेच रहे हैं। मोटे हरे चने को लकड़ी के चुल्हे पर पकाया जा रहा है। तो इसके स्वाद में खासा सोंधापन है। ऐसा देशी नास्ता शहरों में बहुत कम देखने को मिलता है।


भोपाल शहर की दूसरी प्रमुख विशेषता है मावा जलेबी। जलेबी तो आपने हर शहर में खूब खाई होगी पर मावा के साथ जलेबी खाने का मजा भोपाल में ही लिया जा सकता है। यहां के शादी समारोह आदि में भी मावा जलेबी खास तौर पर पेश की जाती है। दरअसल मावा जलेबी मध्य प्रदेश की मशहूर मिठाई है। वैसे तो जलेबी मैदे की बनाई जाती है, पर मध्य प्रदेश के अलग अलग शहरों में मावा जलेबी बनाई जाती है। यह रसीली और कुरकुरी होती है। इसके निर्माण में खास तौर पर मावा (खोवा) और केसर का इस्तेमाल किया जाता है।

भोपाल रेलवे स्टेशन के आसपास खाने पीने के लिए बहुत सारे किफायती होटल हैं। इनमें से कई होटलों में आप थाली सिस्टम में भरपेट भोजन कर सकते हैं। साल 1999 में तो यहां 10 से 12 रुपये में भरपेट भोजन मिलता था पर अब इसके लिए आपको 60 से 100 रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं। रेलवे स्टेशन के पास हमिदिया रोड पर खाने पीने के लिए आप कुछ तलास रहे हैं तो मनोहर अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां पर नास्ता और मिठाइयां खाई जा सकती हैं।

भोपाल से लौटते हुए हमिदिया रोड के एक होटल में खाने के लिए पहुंचा हूं। वैसे तो मक्की की रोटी पंजाब का प्रसिद्ध खाना है। पर इस होटल में जिसका नाम राज वैष्णव भोजनालय है, मैं दाखिल होता हूं। यहां पर मक्की की रोटी साग और सब्जियों के साथ वाली थाली है। कुल 110 रुपये की थाली में तीन विशाल मक्की की रोटी है। इसके साथ पुलाव भी है। खाने का स्वाद काफी उम्दा है। तीन मक्की की रोटी खाकर ही मैं हाउसफुल हो गया। फिर मैंने उन्हें कहा कि हमारे प्लेट का पुलाव पैक कर दें। बाद में खा लूंगा।

सांची का पेड़ा – सांची मध्य प्रदेश के दूध और दूध के उत्पादों का लोकप्रिय सरकारी ब्रांड है। हमने सांची का छाछ खूब पीया है। पर इस बार सांची का पेड़ा खाने का मौका मिला है। सांची का पेड़ा सिंगल पेड़े की पैकिंग में भी उपलब्ध होता है। इसके बाद ढाई सौ ग्राम और आधा किलो की पैकिंग भी उपलब्ध है। किसी के घर जाना हो तो सांची का पेड़ा लेकर पहुंचे। मध्य प्रदेश के रेलवे स्टेशनों पर इसके स्टाल मिल जाते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
 ( MP MAWA JALEBI, SANCHI PEDA ) 







2 comments:

  1. बेहतरीन लिखा विद्युत भैया आपने ...अनुरोध है कि बिहार के शहरों पर भी लिखें ।

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    1. इस पेज के दाहिनी तरफ बिहार लेवल पर देखे, सौ से ज्यादा पोस्ट बिहार पर भी हैं. समय समय पर बिहार पर भी लिखता हूं।

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