Friday, July 26, 2019

मोती मसजिद, पुराना भोपाल और मुसलमान


भोपाल के बड़ी ताल के एक तरफ श्यामला हिल्स है तो दूसरी तरफ पुराना भोपाल। पुराना भोपाल मतलब शहर का मुस्लिम बहुल इलाका। भोजताल के किनारे वीआईपी रोड पर एक कलात्मक मस्जिद नजर आती है। इस मस्जिद का नाम लाल इमली मस्जिद है। इस मसजिद की इमारत लाल जरूर है पर इसे लाल इमली मसजिद नाम क्यों मिला होगा।

यहां से थोड़ी दूर ही चलने पर मोती मसजिद है। भोपाल की इस मस्जिद को कदसिया बेगम की बेटी सिकंदर जहां बेगम ने 1860 ई. में बनवाया था। इस मस्जिद की शैली दिल्‍ली में बनी जामा मस्जिद से मिलती जुलती है। पर आकार में यह उससे छोटी है। मस्जिद की गहरे लाल रंग की दो मीनारें हैं, जो ऊपर नुकीली हैं। यह दूर से देखने में सोने के जैसी प्रतीत होती हैं। मोती मसजिद के आसपास पुराने भोपाल शहर का बाजार है। यह भोपाल शहर का प्रमुख लैंडमार्क भी है। मोती मसजिद के आसपास शहर की पुरानी इमारतें हैं। थोड़ी दूर आगे चलने पर शहर की जीपीओ (मुख्य डाकघर ) और ताजुल मसजिद आ जाता है।

अक्सर मोती मसजिद चौराहा और इसके आसपास ट्रैफिक जाम लगा रहता है। बात ताजुल मसजिद की करें तो ये एशिया की सबसे बड़ी मसजिद मानी जाती है। इस मसजिद में मैं 1995 की भोपाल यात्रा के दौरान भी गया था। पर इतने सालों बाद एक बार फिर इस मसजिद को देखने की इच्छा हुई। सचमुच भव्यता और विशालता में इसका कोई जोड़ नहीं है।

मोती मसजिद के आसपास पुराना भोपाल शहर बसता है। पुराना भोपाल मतलब नवाबों का शहर मुस्लिम बहुल आबादी वाला शहर। स्वतंत्रता के बाद यानी सन 1947 के बाद भोपाल शहर में काफी बदलाव आया है। यूं कहें तो देश के अन्य राज्यों की राजधानियों की तुलना में भोपाल काफी बदला है। जब 1956 में मध्य प्रदेश राज्य का गठन हुआ तो इसकी राजधानी बनाने के लिए भोपाल का चयन किया गया। हालांकि इससे पहले ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर को राजधानी बनाने की चर्चा चल रही थी। ये सभी बड़े और पुराने शहर थे। पर भोपाल के पक्ष में इसका राज्य में भौगोलिक दृष्टि से केंद्र में होना और सालों भर सदाबहार मौसम मजबूत आधार बना।

राजधानी बनने के बाद भोपाल शहर के दायरे में खूब विस्तार हुआ। शहर के पुराने मुस्लिम इलाके लोग बड़ी संख्या में दुनिया के कई देशों में रोजी रोजगार के लिए जाने लगे। वहीं भोपाल में 1956 के बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के अलग अलग शहरों से आकर लोग बसने लगे। इस तरह से भोपाल में एक नई तरह की कास्मोपोलिटन संस्कृति का विकास हुआ। औज भोपाल में प्राचीनता के बीच एक सर्वथा नवीन शहर के रूप में हमारे समाने है।
भोपाल के वीआईपी रोड पर लाल इमली मसजिद। 

साल 1984 में भोपाल शहर दुनिया भर में एक बार फिर चर्चा में आया जब युनियन कार्बाइड गैस कांड हुआ। इसमें बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु और हजारों लोग गैस से पीड़ित हुए जिन्हें लंबे समय तक कई तरह की बीमारियां हुई। पर सब कुछ भुला कर भोपाल शहर कुलांचे भर रहा है। साल 2011 की जनगणना में शहर की आबादी 17 लाख को पार कर गई है। अब शहर में बड़े बड़े मॉल और चौड़ी सड़के बन रही हैं। पर पुराने भोपाल में आकर आप प्राचीन शहर की खुशबू को एक बार फिर महसूस कर सकते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( BHOPAL, MUSALMAN, MOTI MASJID ) 

2 comments:

  1. रोचक विवरण। कई स्थानों की यात्रा हो गयी। मोती या ताजुल के पास शायद एक ढाई सीढी की मस्जिद भी थी। जब हम घूमने गए थे तो इधर भी गये थे।

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