Tuesday, July 23, 2019

कलात्मक संग्रह और अलबेले अतीत से साक्षात्कार


मध्य प्रदेश का राजकीय संग्रहालय - भोपाल के श्यामला हिल्स इलाके में ही जनजातीय संग्रहालय के बगल में मध्य प्रदेश का राजकीय संग्रहालय है। इस विशाल संग्रहालय में भी खास तौर पर मूर्तियों का बड़ा संग्रह है। पर सबसे चौंकाने वाली चीज यहां देखी जा सकती है 25 लाख साल पुरानी काष्ठ जीवाष्म का संग्रह। इसे मध्य प्रदेश के मंडला जिले से प्राप्त किया गया है।

इस संग्रहालय में प्रवेश करते ही मेरा पहला साक्षात्कार त्रिमूर्ति से होता है। दसवीं सदी की यह मूर्ति मुरैना जिले के पढ़ावली से लाई गई है। इसके आगे हिंगलाजगढ़ ( मंदसौर ) से प्राप्त गौरी की प्रतिमा के दर्शन होते हैं। दसवीं सदी की इस प्रतिमा में गजब की कलात्मकता है। खास तौर पर गौरी का मुख अत्यंत ममतामयी परिलक्षित होता है। गौरी के बाद गणेश। ये गणेश 11वीं सदी में मंदसौर से प्राप्त हुए हैं। ये नृत्यरत अवस्था में हैं। दसवीं सदी में बनी मां सरस्वती की सुंदर प्रतिमा है। यह मुरैना जिले से मिली थी। जिले के सुहानिया ग्राम से प्राप्त ये प्रतिमा अनूठी है। मां के चार हाथ हैं। उनके दो हाथों में वाद्य यंत्र है। यह सरस्वती की प्राचीनतम प्रतिमाओं में से एक है।

अगली मूर्ति का शीर्षक है स्खलित वासना। ये कब कहां से प्राप्त हुई है ये स्पष्ट नहीं है। पर वासना का भाव और उसके बाद की स्थिति का चित्रण एक नारी मूर्ति के माध्यम से कलाकार ने कहने की कोशिश की है। मूर्ति थोड़ी खंडित है पर उसका संदेश समझा जा सकता है।

सतना जिले का भरहुत कला का बड़ा केंद्र हुआ करता था। भरहुत की कई कलाकृतियां इंडियन म्युजियम कोलकाता की शोभा बढ़ा रही हैं। पर भोपाल के इस संग्रहालय मेंभरहुत में दूसरी सदी इसा पूर्व की बनी यक्षी की प्रतिमा देखी जा सकती है। ये इस संग्रहालय की प्राचीनतम प्रतिमाओं में से एक है। प्रतिमा में यक्षी का सिर्फ मुख भाग है। इसके चारों तरफ सुंदर चक्र बना हुआ है। हाथ में  पुष्प है। गले में गहने हैं। बालों का श्रंगार मोहक है।

भोपाल के राजकीय संग्रहालय में आप उमा महेश्वर, कल्याण सुंदरम, लक्ष्मी समेत तमाम प्रतिमाओं के दीदार कर सकते हैं। संग्रहालय मेंकुल 17 विथिकाएं हैं। जहां आप अलग अलग विषयों पर संग्रह देख सकते हैं। इनमें टेक्सटाइल, डाक टिकट, अस्त्र शस्त्र की दीर्घाएं भी काफी बेहतरीन संग्रह वाली हैं।

1909 में हुई शुरुआत - भोपाल के इस राजकीय संग्रहालय की शुरुआत 1909 में नवाब सुल्तान जहां बेगम ने की थी। तब इसका नाम एडवर्ड संग्रहालय था। स्वतंत्रता के बाद यह वाणगंगा इलाके में स्थापित किया गया। पर 2005 में यह श्यामला हिल्स इलाके में वर्तमान भवन में आ पहुंचा। राजकीय संग्रहालय का भवन दो मंजिला है। इसमें ऊपरी मंजिल पर सिक्का, पेंटिंग और वाद्य यंत्रों की भी गैलरी है। यहां पर आप एक पुरानी प्रिंटिंग प्रेस भी देख सकते हैं।


संग्रहालय में प्रवेश – राजकीय संग्रहालय भोपाल में प्रवेश का टिकट 20 रुपये का है। कैमरा के लिए 100 रुपये का शुल्क है। पंद्रह साल तक के बच्चों का प्रवेश निःशुल्क है। यह संग्रहालय वर्तमान भवन में नवंबर 2005 में स्थानांतरित हुआ। यहां आप दो से तीन घंटे गुजारकर पूरा संग्रहालय देख सकते हैं। प्रवेश द्वार पर पुस्तकों की दुकान भी है। संग्रहालय सुबह 10.30 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। हर सोमवार और अवकाश के दिन बंद रहता है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( MP STATE MUSEUM, BHOPAL ) 


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