Sunday, July 21, 2019

जनजातीय जीवन की तिलिस्मी दुनिया

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अपना देश रहन सहन के मामले में कितना अनूठा है। भिन्न भाषा भिन्न देश- भारत अपना एक देश। पर देश के रहन सहन के भिन्नता को देखना और समझना हो तो मध्य प्रदेश के जनजातीय संग्रहालय में पहुंचिए।

मध्य प्रदेश का ये जन जातीय संग्रहालय, भोपाल के श्यामला हिल्स इलाके में स्थित है, इसका लोकार्पण भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने किया था। यह 6 जून 2013 को राजधानी भोपाल का नया आकर्षण बना। संग्रहालय में प्रवेश का टिकट 10 रुपये और फोटोग्राफी के लिए 50 रुपये का शुल्क है। संग्रहालय का प्रवेश द्वार भी जनजातीय समाज की अनूठी आभा लिए हुए प्रतीत होता है।

इस संग्रहालय में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में निवास करने वाले जनजातीय समूहों की कला संस्कृति परंपरा को देख सकते हैं। यहां उनके जीवन से जुड़े शिल्प चित्रों रहन सहन, रीति रिवाज रिवाजों को चित्रों मूर्तियों एवं प्रदर्शनों के माध्यम से समझा जा सकता है। यहां पर कई तमाम ऐसी वस्तुएं मूल अवस्था में देखी जा सकती हैं जो मूल रूप से आदिवासी संस्कृति में लोगों द्वारा उपयोग किए जाते हैं। खासत तौर पर ये जगह बच्चों और स्कूली छात्रों के देखने के लिए तो लाजवाब है।

यहां पर समय-समय पर यहां पर कई सांस्कृतिक आयोजन, कार्यशालाएं आदि आयोजित की जाती हैं। इसमें लोगों को आदिवासी समाज की मान्यताओं कला संस्कृति के बारे में ज्ञान मिलता है।

यहां पर मध्य प्रदेश की प्रमुख जनजातियां गोंड, भील, कोरकू, बैगा, कोल, भारिया, सहरिया आदि आदिवासियों के जीवन के बारे में जान समझ सकते हैं।
गोंड की बात करें तो उनका मुख्यता निवास बैतूल होशंगाबाद मंडला सागर छिंदवाड़ा बालाघाट और शहडोल जिले में है।

भील आदिवासियों का निवास मुख्यता झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी खरगोन और रतलाम जिले में है। भील अपने आपको वाल्मीकि और एवं एकलव्य का वंशज मानते हैं। इनकी कई उप जातियां जैसे भिलाला पट्टी लिया बारेला एवं राठिया आदि हैं। वहीं टंट्या भील देश के स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख सेनानी हुए हैं जो की इसी जनजाति से आते हैं। उन पर भील समाज गर्व करता है।

राज्य में कोरकू जनजाति सतपुड़ा पर्वतमाला क्षेत्र के छिंदवाड़ा बैतूल होशंगाबाद जिले के गांवों में निवास करते हैं। वहीं बैगा जनजाति मंडला, डिंडोरी, शहडोल, उमरिया, बालाघाट एवं अमरकंटक के वन प्रदेशों में रहते हैं। वे लोग छत्तीसगढ़ के भी कई जिलों  हैं। बैगा जनजाति को छोटा नागपुर क्षेत्र की भूमियां जनजाति से निकली एक शाखा माना जाता है।

 कोल मध्य प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है। इसकी कुल 22 उपशाखाएं हैं। वहीं भारिया लोग मुख्यतः जबलपुर एवं छिंदवाड़ा जिले में रहते हैं। अब सहरिया जनजाति की करें तो यह मध्य प्रदेश के शिवपुरी, गुना, ग्वालियर, मुरैना, भिंड विदिशा, रायसेन, सीहोर जिलों में निवास करती हैं।

आप संग्रहालय में इन जाजातियों के आवास उनके द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने वाले उपकरण, उनके खेल तमाशे आदि के बारे में जान सकते हैं। यह सब कुछ यहां पर बड़े रोचक ढंग से पेश किया गया है।

संग्रहालय में प्रवेश करने के बाद प्रतीत होता है मानो आप किसी तिलस्मी दुनिया में पहुंच गए हों। शहरी लोगों को यह किसी कल्पना लोक सा प्रतीत होता है। कई लोगों को यहां आकर लगता है कि हम अपने ही देश की सांस्कृतिक के बारे में कितना कम जानते हैं।

अब आपने पूरा संग्रहालय घूम लिया है तो चलते चलते आप यहां से कुछ खरीददारी भी कर सकते हैं। यहां पर चिन्हारी नामक एक सोवनियर शॉप भी है जहां आप कई तरह के आदिवासी प्रतीक और वस्त्र आदि खरीद सकते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
( TRIBAL MUSEUM, BHOPAL ) 


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