Saturday, July 13, 2019

गुजरात का ताजमहल है सरखेज रोजा

लोथल से वापस लौटते समय में हमें बागोदरा में बर्ड सेंक्चुरी का पथ संकेतक नजर आता है। बगोदरा से 28 किलोमीटर की दूरी पर नाल सरोवर बर्ड सेंक्चुरी है जो गुजरात का प्रसिद्ध वेटलैंड है। यहां खास तौर पर दिसंबर से फरवरी के बीच जाकर घूमा जा सकता है। यहां पर बर्ड वाचिंग और बोटिंग का आनंद लिया जा सकता है। नाल सरोवर अहमदाबाद से 64 किलोमीटर दूर साणंद के पास है। पहुंचने का सुगम रास्ता बावला-बगोदरा होकर ही है। तो कभी अगली यात्रा में हम वहां जाने की कोशिश करेंगे।

लोथल से लौटते हुए हमारी अगली मंजिल है सरखेज रोजा। सरखेज रोजा को गुजरात का ताजमहल कहते हैं। यह अहमदाबाद शहर का विशाल और अनूठा स्मारक है।
सरखेज रोजा गुजरात में एक सबसे महत्‍वपूर्ण रोजा समूह है जिसमें कई मस्जिद, मकबरे और महल बनाए गए हैं। इस परिसर में निर्माण कार्य की शुरुआत सुल्तान मोहम्मद शाह ने की थी।

सूफी संत पीर शेख अहमद गट्टू गंज बख्श की मजार 
सुल्तान अहमद शाह, जिनके नाम के उपर से शहर का नाम पडा, के शासन काल के दौरान सरखेज अहमदाबाद के पास एक छोटा सा गांव हुआ करता था। इस गांव में मूल रूप से बुनकर और रंगरेज रहा करते थे। ज्यादा आबादी हिंदू थी। उस गांव में एक मुस्लिम पीर शेख अहमद गट्टु गंज बक्श का आना हुआ। पीर शेख 1398 में गुजरात आए और सरखेज में रहना शुरू किया। उनका समय 1336 से 1446 का था। 

उनका जन्म राजस्थान का नागौर जिले के खाटू में 1336 ईस्वी में हुआ था। वे खाटू के बाबा इसाक मगरीबी के शिष्य थे। कुल 111 साल की उम्र तक जीने के बाद उनका इंतकाल 13 जनवरी 1446 को हुआ। वे उन चार अहमद में से एक थे जिन्होंने 1411 में अहमदाबाद शहर की बुनियाद रखी। उनके इंतकाल पर उनकी याद में सुल्तान मुह्म्मद शाह ने सरखेज में एक मकबरा और सुंदर मसजिद बनवाई। पीर शेख की मजार की सुंदरता अदभुत है। इसमें कुल 16 स्तंभ हैं। इसकी दीवारों पर जालियों में सुंदर नक्काशी है।


महमूद बेगड़ा का मकबरा - सरखेज में सुल्तान महमूद बेगड़ा और उसके परिवार के सदस्यों का भी मकबरा है। सरखेज के मकबरे के निर्माण में इस्लाम, हिंदू और जैन शैली के अलंकरण का काम बहुत ही दक्षता से हुआ है। बाद में कुतुबद्दीन शाह ने भी सरखेज रोजा कांप्लेक्स के निर्माण में योगदान किया। इस परिसर में सुलतान अहमदशाह का भी मकबरा है। बाद में सुल्तान मुहम्मद बेगड़ा ने भी सरखेज कांप्लेक्स के निर्माण में योगदान किया।

मकबरे से झील की तरफ जाएं तो यहां सुंदर झरोखों को निर्माण किया गया है। सरखेज रोजा के निर्माण में बड़ी संख्या में संगमरमर का इस्तेमाल हुआ है इसलिए इसे गुजरात का ताजमहल भी कहते हैं। रोजा में बनी जालियों में सुंदर नक्काशी देखी जा सकती है। 

सरखेज में विशाल झील - 15वीं शताब्दी में महमूद बेगडा ने इस मकबरे के आसपास निर्माण कार्य को विस्तार दिया। उसने एक समर पैलेस (गर्मियों में रहने के लिए महल ) और बीच में एक विशाल झील का निर्माण करवाया। झील से अतिरिक्त पानी के निकासी के लिए स्युलिस गेट का निर्माण किया गया था। झील के एक कोने पर समर पैलेस का निर्माण कराया गया था। हालांकि इस झील में आजकल पानी बिल्कुल नहीं है। इसलिए झील का सौंदर्य फीका पड़ गया है। वर्षों बाद यह किला और मकबरा जर्जर अवस्था में आ गया था। इसके कई भवनों को क्षति पहुंच रही थी। बाद में गुजरात सरकार और पुरातत्व विभाग ने इस स्थल का रख रखा कर पुनर्निमाण कराया है।

पुस्तकालय और वाचनालाय - सरखेज रोजा कमेटी आजकल सरखेज के इंतजाम देखती है। कमेटी यहां पर एक पुस्तकालय का संचालन करती है। यहां पर दुर्लभ पुस्तकों और चित्रों का संग्रह है। यहां पर पवित्र कुरान की हस्तलिखित प्रति देखी जा सकती है। सरखेज रोजा में होने वाले आयोजनों में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम समेत कई नामचीन हस्तियां शिरकत कर चुकी हैं। 26 जनवरी 2014 को अमिताभ बच्चन सरखेज रोजा में आए थे।

कैसे पहुंचे - सरखेज, अहमदाबाद में मुख्‍य शहर से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कभी यह शहर का बाहरी इलाका हुआ करता था, पर अब शहर का हिस्सा है। सरखेज रोजा घूमने के लिए एक अच्छा स्थल है। यहां लोग पिकनिक मनाने भी आते हैं।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( SARKHEJ ROJA, AHMADABAD , MASJID ) 


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