Tuesday, July 2, 2019

अहमदाबाद शहर की अनूठी झूलती मीनारें


औरंगाबाद, अमृतसर और दिल्ली तरह ही अहमदाबाद भी कई दरवाजों वाला शहर है। महमूद बेगड़ा ने अहमदाबाद शहर की सुरक्षा के लिए मजबूत दीवारें बनवाई। शहर की परिधि 10 किलोमीटर की थी। इस 10 किलोमीटर की मोटी मजबूत दीवार में शहर के अंदर प्रवेश के लिए कुल 12 दरवाजे बनवाए गए थे। सुरक्षा के लिए कुल 189 बुर्ज का निर्माण किया गया था। शहर के 12 दरवाजों में से कई दरवाजों का अस्तित्व अभी भी देखा जा सकता है। पर इस शहर का एक और खास आकर्षण है झूलती मीनारें। जी हां झूलती मीनारें।

अहमदाबाद रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको इस अजूबे के दर्शन होते हैं। कालूपुरा इलाके में झूलती मीनारें स्थित हैं। इस शहर की सीदी बशीर मसजिद में दो हिलती मीनारों का एक जोड़ा है। इनमें से एक सिदी बशीर मस्जिद के उल्टी तरफ सारंगपुर दरवाजा में स्थित है और दूसरी राज बीबी मस्जिद के विपरीत अहमदाबाद रेलवे स्‍टेशन के अंदर स्थित है। इस जोड़ी वाली मीनारों की खास बात यह है कि जब इस मस्जिद की एक मीनार को हिलाया जाता है तब दूसरी मीनार एक निश्चित समय के अंतराल पर खुद ही हिलने लगती है। इसलिए इन मीनारों को झूलती मीनार भी कहा जाता है।

रहस्य कोई नहीं जान सका – वैज्ञानिक इन झूलती मीनारों का रहस्य आज तक नहीं जान सके हैं। आखिर सोलहवीं सदी में ऐसी कौन सी तकनीक अपना कर वास्तुकारों ने इस तरह की मीनारों का निर्माण कराया होगा। इन मीनारों के बारे में इंजीनियर लोग अपनी अलग-अलग राय देते हैं, लेकिन वे इस अनूठी वास्तुकला का असली रहस्य आज तक नहीं समझ सके हैं। ये मीनारें आने जाने वाले सैलानियों को अचंभित करती हैं।

कहा जाता है कि ब्रिटिश राज में इन झूलती मीनारों का रहस्य को समझने के लिए ब्रिटेन से कई इंजीनियर बुलाए गए थे। उन्होंने मीनारों के आसपास खुदाई भी की कराई थी, लेकिन उन लोगों की सारी कोशिशें बेकार ही रहीं। इतना ही नहीं भी अचरज की बात है कि अहमदाबाद शहर ने अनेक भूकंप झेले हैं। हर बार भूकंप के झटकों से यहां की जमीन तो हिली, लेकिन ये मीनारें जस की तस ही खड़ी रहीं। इनका बाल बांका नहीं हुआ। इस मसजिद का निर्माण 1461 से 1464 के बीच हुआ था। इसका निर्माण सीदी बशीर ने कराया था। कुछ लोग मानते हैं कि ये मीनारे लचकरदार पत्थरों से बनवाई गई थीं। इसलिए झूलती रहती हैं। ये पत्थर राजस्थान से लाए गए थे। जब जब मीनारों को धक्का दिया जाता है तो ये मीनारें आगे पीछे झूलने लगती हैं।

साबरमती नदी पर कई पुल – पुराना अहमदाबाद शहर साबरमती के किनारे था। पर अब शहर का विस्तार साबरमती के उस पर तक हो गया है। इसलिए आवागमन के लिए साबरमती नदी पर कई पुल बनाए गए हैं। इनमें से पांच पुल प्रमुख हैं। अहमदाबाद शहर में घूमते हुए आप कई बार इन पुलों को पार करते हैं। इनमें साबरमती आश्रम के पास स्थित पुल का नाम सुभाष ब्रिज है। इसके बाद एलिस ब्रिज आता है। यह ब्रिटिशकालीन पुल है। अब शहर के विस्तार के साथ कई नए पुल भी बन गए हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com

-          ( JHULTI MINAR, MASJID, AHMADABAD ) 

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