Tuesday, June 4, 2019

चंपानेर की सबसे कलात्मक कृति - जामी मस्जिद


जामा मस्जिद चंपानेर की सबसे कलात्मक कृति है। यह सैलानियों की सबसे लोकप्रिय जगह भी है। चंपानेर को जिन कलात्मक स्थलों के कारण यूनेस्को की विश्व विरासत की सूची में जगह मिली है उसमें जामा मसजिद प्रमुख है। पावागढ़ बस स्टैंड से जामा मस्जिद की दूरी लगभग दो किलोमीटर है। शहर की मसजिद से चंपानेर की दूसरी ऐतिहासिक इमारतों का मुआयना करते हुए आप पैदल पैदल जामा मस्जिद तक पहुंच सकते हैं।

इसे जामी मसजिद के नाम से भी जाना जाता है। यह चंपानेर शहर के राजसी परिसर के बाहर निर्मित किया गया है। इसके निर्माण में अहमदाबाद शहर के जामी मसजिद से साम्यता रखी गई है। वास्तु के लिहाज से यह भव्य मसजिद भारतीय और इस्लामिक वास्तु शैली का सुंदर मेल है।

चंपानेर की जामा मसजिद में 30 मीटर के दो सुंदर मीनार बने हुए हैं। मस्जिद के स्तंभों पर की गई बारीक नक्काशी और खूबसूरत कारीगरी इसे देश की सबसे सुंदर मसजिदों में लाकर खड़ा कर देती है। ऊंचे चबूतरे पर बनी इस विशाल मसजिद में तीन दिशाओं से प्रवेश किया जा सकता है। इसके पूर्व, उत्तर और दक्षिण दिशाओं में तीन मंडप नुमा प्रवेश द्वार बने हुए हैं। 

आम तौर पर भारत में बनी मसजिदों में पश्चिम दिशा की ओर बैठकर नमाज पढ़ने का प्रावधान होता है। क्योंकि यहां से काबा पश्चिम की ओर है। इस्लाम में मूर्ति पूजा का कोई स्थान नहीं है। इसलिए मसजिद में एक विशाल प्रार्थना हॉल होता है, जहां लोग आकर नमाज पढ़ते हैं।

जामी मसजिद चंपानेर का पूर्व का प्रवेश द्वार अपनी जालीनुमा पर्दों के लिए विख्यात है। इसकी कलात्मकता लोग आकर घंटो निहारते हैं। यह मसजिद 66 मीटर लंबे और 55 मीटर चौड़े क्षेत्रफल में निर्मित की गई है। मसजिद के अंदर विशाल खुला आंगन और तीन ओर विशाल गलियारे बने हैं।

आंगन से मसजिद में जाने के लिए पांच मेहराब युक्त प्रवेश द्वार बने हैं। इनमें से बीच के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ दो विशाल मीनारें बनी हैं। ये मीनार 30 मीटर ऊंची और पांच पंजिला है। मसजिद के चारों कोनों पर चार छोटी छोटी मीनारें भी हैं। इसमें सुंदर बालकॉनी वाली खिड़कियां बनी हैं। मसजिद के मुख्य हॉल जगह जगह जाली वाली खिड़कियां बनी हैं। मसजिद का केंद्रीय गुंबर विशेष प्रकार से दो मंजिला बनाया गया है। इसमें प्राकृतिक तौर पर प्रकाश आने का इंतजाम किया गया है। 

इसके गुंबद के अंदुरुनी भाग में जो अलंकरण कार्य किया गया है, वह कलात्मकता की पराकाष्ठा है। मसजिद की पीछे की दीवार में कुल सात मेहराब हैं जिनमें बीच वाली मेहराब पर अदभुत अलंकरण है। मसजिद के उत्तरी भाग में छिद्रित जालियों वाला हिस्सा बनाया गया है। यहां स्त्रियों को प्रवेश कर नमाज पढ़ने का इंतजाम किया गया था।

जामी मसजिद का निर्माण 1513 में आरंभ हुआ था। इसका निर्माण तकरीबन 125 साल तक  चलता रहा। यह सुल्तान मुहम्मद बेगड़ा के शासन काल में निर्मित सर्वोत्कृष्ट स्मारकों में शुमार है।
जामी मसजिद के बाहर यूनेस्को विश्वदाय स्मारक में शामिल किए जाने का बोर्ड लगा हुआ है। हालांकि आजकल इस विशाल कलात्मक मसजिद में नमाज नहीं पढ़ी जाती।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( JAMI MASZID, CHAMPANER, PAWAGARH, GUJRAT ) 

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