Wednesday, June 26, 2019

अहमदाबाद का विशाल भद्रा फोर्ट और तीन दरवाजा


जाली मसजिद देखने के बाद टहलते हुए हमलोग भद्रा फोर्ट के पास पहुंच गए हैं। यह पुराने अहमदाबाद शहर का सिटी सेंटर है। भद्रा फोर्ट के ऐतिहासिक किले के हिस्से को देखने के लिए कोई प्रवेश टिकट नहीं है। पर यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित इमारत है। यहां मौजूद स्टाफ आपका पहचान पत्र देखने और रजिस्टर में नाम पता दर्ज करने के बाद अंदर जाने की अनुमति दे देता है।


भद्रा फोर्ट पुराने अहमदाबाद शहर का प्रमुख आकर्षण है। इसका निर्माण 1411 ई में हुआ। यह दीवारों से घिरे पुराने अहमदाबाद शहर का प्रमुख आकर्षण है। इसका निर्माण अहमदशाह प्रथम ने कराया था। साल 2014 में इसके बेहतर रखरखाव के लिए अहमदाबाद नगर निगम और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इसकी मरम्मत कराई गई।

भद्रा फोर्ट वास्तव में अहमदशाह द्वारा बनाए गए किले का मुख्य प्रवेश द्वार है। आकार में यह काफी विशाल है। इस पर कई निगरानी टावर बने हुए हैं। इसके निर्माण में पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। अहमदाबाद शहर का नाम अहमदशाह प्रथम के नाम पर रखा गया था। उसका शासन काल 1411 से 1442 तक रहा। मिराती ए अहमदी नामक ग्रंथ में इसका नाम अराक फोर्ट मिलता है। पर पास में बने भद्रकाली मंदिर के नाम पर इसे भद्रा फोर्ट भी कहा जाता रहा।

वैसे अहमदशाह द्वारा बनाए गए किले में कुल आठ दरवाजे हुआ करते थे। इसमें तीन दरवाजों का आकार काफी बड़ा था। मानेक चौक पर स्थित भद्रा फोर्ट का मुख्य दरवाजे के दो तरफ विशाल गोल संरचना बनी है। बीच में किले में प्रवेश के लिए द्वार है। हालांकि इसमें अंदर जाने पर आगे का रास्ता अब बंद दिखाई देता है। द्वार के पास से ऊपर जाने के लिए घुमावदार सीढ़ियां बनी हुई हैं। मुख्य द्वार पर लकड़ी का विशाल दरवाजा लगा है। ये द्वार इतना बड़ा है कि इससे हाथी और ऊंट भी आसानी से प्रवेश कर सकते हैं।

अंदर के पीर की दरगाह भी है। हजरत मियां पीर अली शहीद की दरगाह है यहां जहां लोग मन्नत मांगने आते हैं। भद्र फोर्ट को छत पर जाने के बाद अहमदाबाद शहर का विहंगम नजारा देखा जा सकता है। भद्रा फोर्ट की उंचाई से अहमदाबाद जिला पंचायत की विशाल गोल इमारत नजर आती है। यहां से आप आसपास के बाजारों का नजारा कर सकते हैं। किले की छत पर कुछ छोटे छोटे कमरे बने हुए हैं जो संभवतः संतरियों के रहने के लिए होंगे। किले के मुख्य द्वार के ऊपर 1849 में डायल वाली विशाल घड़ी लगवाई गई। इसमें दूर से ही शहर के लोग समय देख सकते थे। तो एक तरह से यह घंटाघर का काम भी करने लगा था। 
ब्रिटिश सरकार ने 1817 में अहमदाबाद शहर पर कब्जा कर लिया था। तब फोर्ट के इलाके का इस्तेमाल जेल के तौर पर भी किया जाने लगा था।

सामने तीन दरवाजा - भद्र फोर्ट से कोई 400 मीटर दूरी पर सामने तीन दरवाजा नजर आता है। इसमें तीन मेहराबदार द्वार हैं। इनका निर्माण भी 15वीं सदी में ही कराया गया था। इसके नाम पर ही ये इलाका तीन दरवाजा कहलाता है।  
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( BHADRA FORT, AHAMDABAD, TEEN DARWAJA )




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