Thursday, June 20, 2019

गुजरात में पंजाबी स्वाद और जगदीश फरसाण


बात वडोदरा शहर के खाने पीने की। सयाजीगंज में अपने प्रूडेंट होटल के पास हमने एक सुंदर रेस्टोरेंट देखा। टेस्ट ऑफ पंजाब। क्या गुजरात में पंजाब जी हां। सही है। जैसे जसबीर जस्सी का गाना आया था दिल ले गई कुड़ी गुजरात दी...तो गुजरात में पंजाबी खाने का रेस्टोरेंट क्यों नहीं हो सकता। 

टेस्ट ऑफ पंजाब का डेकोरेशन बड़ा सुंदर है। इसे पंजाब के ग्राम्य परिवेश वाला लुक देने की पूरी कोशिश की गई है। बाहर एक विशाल ट्रक की पेंटिंग लगी है। अंदर की दीवारें भंगड़ा और गिद्दा के नृत्य से गुलजार हैं। कहीं खाट लगा है तो कहीं मचिया। खाने पीने के बरतन परंपरागत है। दीवारों  पर मिट्टी का लेप लगा है। तो यहां बैठना भी आनंद दायक है। और खाने पीने का स्वाद भी मजेदार। इन सबके बाद खाने पीने की दरें भी किसी समान्य रेस्टोरेंट जैसी ही हों तो खाने का आनंद और भी बढ़ जाता है। रेस्टोरेंट बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मिनिरल वाटर भी पेश करता है।

इससे पहले की वडोदरा यात्रा में हमने स्टेशन के पास इंदिरा भवन और गायत्री भवन में खाने का मजा लिया था। इस बार भी हम उन रेस्टोरेंट में गए। वे रेलवे स्टेशन के सामने ही हैं।

 न्याय मंदिर के आसपास हमने स्थानीय गुजराती व्यंजनों का आनंद लिया। यहां पर होटल लारीलप्पा में भी पंजाबी थाली ही मिलती है। मतलब वडोदरा में आप पंजाबी थाली कई जगह आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

अरबी के पत्ते का पकौड़ा - जैसा घर में अरबी के पत्ते का सब्जी हम बिहार में बनाते हैं, वैसी सब्जी हमें वडोदरा के एमजी रोड के बाजार में बिकती हुई दिखाई दी। दुकानदार ने हमें टेस्ट करने का भी आफर दिया। हमने पहले की यात्रा में दाबेली खूब खाई पर इस बार सेव को मसाले के साथ मिलाकर अलग तरह के चाट का आनंद भी लेने का मौका मिला। वडोदरा रेलवे स्टेशन के आसपास आप कई तरह के खाने पीने का स्वाद ले सकते हैं।  

बड़ौदा शहर और जगदीश फरसाण - जगदीश फरसाण की बात करें। जगदीश फरसाण वडोदरा की प्रसिद्ध नमकीन वाली दुकान है। पूरे वडोदरा शहर में उनकी कई दुकाने हैं। इनमें से कई तो रेलवे स्टेशन के आसपास ही हैं। यहां पर किस्म किस्म के लड्डू भी बिकते हुए दिखाई दिए। वे तमाम तरह के नमकीन और भाखरवाडी का निर्माण करते हैं। उनके उत्पाद उनके नाम पर बिकते हैं। खट्टा मीठा, सोलापुरी मिक्स, मद्रासी मिक्स सब कुछ। जो आप मांगे मिल जाएगा। जगदीश फरसाण सिर्फ वडोदरा ही नहीं सूरत, भरूच, आनंद समेत गुजरात के तमाम शहरों में हैं। अब उनका ऑनलाइन कारोबार भी शुरू हो चुका है। (http://jagdishfarshan.com/) जगदीश फरसाण का कारोबार 1938 में आरंभ हुआ। इसके संस्थापक राजा रतनलाल केशवलाल कानदोई थे। बड़ौदा में एक छोटी सी जगह से शुरू हुआ उनका कारोबार अब बड़ा रुप ले चुका है। गुजराती में फरसाण नमकीन या स्नैक्स को संदर्भित करता है।

फरसाण गुजराती व्यंजनोंराजस्थानी व्यंजनों और सिंधी व्यंजनों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन्हें विशेष अवसरों पर और मेहमानों के स्वाद के लिए तैयार किया जाता है। इसका आप चाय के साथ भी आनंद ले सकते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि फरसाण सिंधी का शब्द है। यह फारस से बना लगता है। तो कभी वडोदरा आएं तो खरीदें नमकीन चिवडा और भाखरवाड़ी।अभी बस इतना ही। पढ़ते रहिए दानापानी,  आगे चलेंगे अहमदाबाद. 

-        विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
( JAGDISH FARSAN, VADODARA ) 

1 comment:

  1. रोचक पोस्ट। मुँह में पानी आ गया।

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