Sunday, June 16, 2019

फतेह सिंह संग्रहालय – दुनिया को चित्रों में देखें , महसूस करें


लक्ष्मी विलास पैलेस घूम लेने के बाद हमारी अगली मंजिल है महाराजा फतेह सिंह संग्रहालय। इसका टिकट हमने पहले से ही ले रखा है। दोनों संग्रहालय का टिकट साथ लेने पर थोड़ा सा डिस्काउंट मिल जाता है। महल से फतेह सिंह संग्रहालय जाने के लिए तकरीबन आधा किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इस रास्ते में खूब हरियाली है। ताड़ के पेड़ हैं। मोर नृत्य करते हुए दिखाई दे रहे हैं। रास्ते में बड़ोदा जिमखाना क्लब और बड़ौदा गोल्फ क्लब दिखाई दे जाते हैं। 



बागनवेलिया के गुलाबी फूलों और बेहद सुंदर पीले फूलों के रास्ते से हम आगे बढ़ रहे हैं। बड़ौदा रियासत अपने संपदा का व्यसायिक इस्तेमाल खूब कर रहा है। महल के परिसर में मैरेज लॉन बना दिया गया है। इसकी शादी विवाह के लिए बुकिंग होती है। परिसर में एक बच्चों का स्कूल भी है। इसमें शहर के संभ्रांत परिवारों के बच्चे पढ़ने आते हैं। पर चलिए संग्रहालय में प्रवेश से पहले हम एक अनूठी चीज पर नजर डालते हैं। वो है रेलवे विरासत से जुड़ी हुई...


दुनिया का सबसे छोटा स्टीम लोकोमोटिव
पर फतेह सिंह संग्रहालय में प्रवेश से पहले थोड़ी चर्चा एक अनूठी रेलगाड़ी के बारे में। हमारी नजरों के सामने द फ्लाइंग स्काट्समैन नामक नन्ही सी स्टीम इंजन है। बात सन 1941 की है महाराजा प्रताप सिंह अपने बच्चों के लिए एक तोहफा लेकर आए । यह लंदन मेंचलने वाली ट्रेन द फ्लाइंग स्कॉट्समैन का छोटा रूप था। यह राजकुमारों को महल में घुमाया करता था। इसके लिए लक्ष्मी विलास महल में तीन किलोमीटर का ट्रैक बिछाया गया था। इस मिनिएचर ट्रेन का सफर महल से प्रिंसेज स्कूल तक चलता था।

 अब उस प्रिंसेज स्कूल को ही महाराजा फतेह सिंह म्युजियम बना दिया गया है। महल तक लौटने से पहले इस ट्रेन का मार्ग महल के बागीचे से होकर गुजरता था। इस ट्रेन में कुल तीन डिब्बे हुआ करते थे। इसमें कुल 30 बच्चे बैठ सकते थे।  सन 1941 में महाराजा रंजीत सिंह गायकवाड के तीसरे जन्मदिन पर इस ट्रेन ने अपना पहला सफर किया था। इस ट्रेन का निर्माण 1936 में एसबी एंड सीआर नामक कंपनी ने किया था। यह मूल रूप से हार्वेस्टर लोकोमोटिव का प्रोटोटाइप था। 

ऐसे इंजनों का संचालन लंदन और नार्थ इस्टर्न रेलवे में हुआ करता था। मूल हार्वेस्टर लोकोमोटिव ब्रिटेन के प्रसिद्ध फ्लाइंग स्काट्समैन ट्रेन को खिंचता था। सन 1940 के आसपास ब्रिटेन में फ्लाइंग स्काट्समैन काफी लोकप्रिय ट्रेन हुआ करती थी। यह ट्रेन लंदन से इडिनबर्ग के बीच चलती थी। तो उसके नाम पर ही इस प्रोटोटाईप खिलौना गाड़ी को यह नाम दिया गया।   

पर 1956 में इस ट्रेन के बड़ौदा के आम बच्चों के लिए दे दिया गया। इसकी ट्रैक को महल से हटाकर सयाजीबाग में बिछाया गया। इसका संचालन वजोदरा महानगर सेवा सदन करने लगा। यह 1993 तक सयाजीबाग में बच्चों का मनोरंजन करता रहा। पर 1993 में इसके लोकोमोटिव का बायलर खराब हो गया। तब 2001 में इसके मूल इंजन को फिर से महल में लाकर संरक्षित करके रख दिया गया। तो महाराजा फतेह सिंह संग्रहालय के पास आने वाले लोग दुनिया के लघुतम स्टीम इंजन का दीदार कर सकते हैं।

तो अब चलते हैं संग्रहालय के अंदर। महाराजा फतेह सिंह संग्रहालय का भवन दो मंजिला है। खास तौर पर संग्रहालय के अंदर बेशकीमती पेंटिंग का संग्रह है। फतेह सिंह संग्रहालय में राजा रवि वर्मा के अलावा कुछ विदेशी कलाकारों की प्रसिद्ध पेंटिंग का भी संग्रह है। 
अदभुत 3डी पेंटिंग - 
इसमें इटालियन पेंटर ए फीलीसी की चित्रकला देखी जा सकती है। यहां पर आप एक 3डी पेंटिंग भी देख सकते हैं। यह दो अलग अलग सिरों से देखने पर अलग अलग दिखाई देती है। यह बड़े अचरज की बात है कि जिस जमाने में 3डी के बारे में हम नहीं जानते थे, तब कलाकार ने इस तरह की पेंटिंग कैसे बनाई होगी। 

न्यूड मूर्तियों और चित्रकला का विशाल संग्रह - 
इस संग्रहालय में न्यूड मूर्तियों का संग्रह भी बड़ी संख्या में है। पर उनकी कलात्मकता ऐसी है कि वे उत्तेजक नहीं प्रतीत होतीं। यहां आप दुनिया के प्रमुख शहरों को पेटिंग में देख सकते हैं। इसमें स्वीटजरलैंड की झील, समंदर की लहरें आदि को पेटिंग में दिखाया गया है। दुनिया के सुंदरतम शहरों में शुमार वेनिस को पेंटिंग में देख सकते हैं। संग्रहालय के अंदर फोटोग्राफी बिल्कुल निषिद्ध है। पर ये संग्रहालय देश के कला प्रेमियों के लिए मक्का है। मूर्ति और चित्रकला के छात्र यहां अध्ययन के लिए पहुंचते हैं।  

-       विद्युत प्रकाश मौर्य   
( MAHARAJ FATEH SINGH, NUDE PAINTINGS  ) 

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