Wednesday, June 12, 2019

महान शासक सयाजीराव गायकवाड और बड़ौदा रियासत


वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस के बीचों बीच 300 फीट ऊंची मीनार बनी हुई है। इस मीनार के ऊपर एक लैंप लगाया गया है। इस लैंप में जब लाल रोशनी जल रही हो तो वह इस बात का संकेत है कि राजा अभी वडोदरा में ही हैं। दिन में इस मीनार पर केसरी झंडा लहराता है जो राजा के होने का संकेत देता है। 
थोड़ी बाद वडोदरा के गायकवाड राजाओं के बारे में। ब्रिटिश राज में वडोदरा की गायकवाड रियासत एक प्रिंसले स्टेट थी। पर यह देश  500 से ज्यादा रियासतों में सबसे सम्मानित थी। इसे अंग्रेज सरकार ने 21 तोपों की सलामी का दर्जा दिया था। तोपों की सलामी का दर्जा रियासत की औकात के हिसाब से तय होता था।

वैसे गायकवाड का मतलब होता है गायों का रक्षक। ये एक मराठा राजवंश है। पिलाजी गायकवाड (1721-32 ) के समय से यह वंश प्रमुखता से चर्चा में आता है। वे पेशवा बाजीराव प्रथम के समकालीन थे। वे कोल्हापुर के राजा शाहू के सेनापति के गुट में थे। उन्होंने बड़ौदा को अपना केंद्र बनाया। पिलाजी के बाद के दमाजी गायकवाड द्वितीय, उसके बाद गोविंद राव, आनंद राव, सयाजीराव द्वितीय शासक हुए। सयाजीराव के तीन पुत्र हुए गणपति राव, खंडेराव और मल्हारराव। मल्हारराव की कोई संतान नहीं थी, उन्होंने एक बालक को गोद लिया जिसका नाम सयाजीराव गायकवाड तृतीय रखा गया।

महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय गायकवाड़ राजवंश के अति प्रतापी राजा थे। उनके राज में बड़ौदा रियासत का कायाकल्प हुआ। पर सयाजी राव गायकवाड असली नाम गोपाल था। वे एक गरीब चरवाहे काशीनाथ गायकवाड के बेटे थे। महाराजा ने 27 मई 1875 को उन्हें 12 साल की उम्र में गोद लेकर उनका नाम सयाजीराव गायकवाड रखा। वे 12 साल तक अनपढ़ ही थे। बाद में महल में उनके शिक्षादीक्षा का इंतजाम किया गया।  उनका राज्याभिषेक 28 नवंबर 1881 को महज 18 साल की उम्र में हुआ। अत्यंत कुशाग्र बुद्धि, अध्ययनशील वृति, होनहार औ जिद्दी स्वभाव ने उन्हें प्रिंसले राजाओं के बीच महान राजा के तौर पर स्थापित किया। 1911 के दिल्ली दरबार में जार्ज पंचम को झुक कर सलाम करने से उन्होंने इनकार कर दिया था।

महात्मा फूले से प्रभावित थे - सयाजीराव गायकवाड पर महात्मा फूले के सत्यशोधक समाज का बहुत प्रभाव था। 1885 में उनकी मुलाकात पुणे में महात्मा फूले के साथ हुई थी। 19 मार्च 1918 में बम्बई में हुए छुआ छूत विरोधी परिषद के अध्यक्ष बडौदा के नरेश श्रीमंत सयाजीराव गायकवाड बने। महात्मा फूले से प्रेरणा लेकर, ब्राह्मणवाद की बुराइयों से लड़ने वाले महाराजा सयाजीराव गायकवाड ने  बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए 4 जून 1913 में छात्रवृति देने का महान कार्य किया। उनका निधन 6 फरवरी 1939 को हुआ।

फिर चलते हैं महल की ओर... वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में पच्चीकारी वाले टाइल्स, बहुरंगे संगमरमर के टाइल्स, कई तरह की चित्रकलाएं, फव्वारे देखे जा सकते हैं। महल के प्रवेश द्वार पर ताड़ के पेड़ इस महल को एक अलग खूबसूरती देते हैं। इस महल तब लिफ्ट भी लगाई गई थी। यहां के दरबार हॉल में फेलिसकी द्वारा संकलित किए गए कांसे, संगमरमर व टेरीकोटा की मूर्तियां लगाई गई हैं। 

विलियम गोर्डलिंग ने महल के बगल में बागीचे तैयार किया था जिसे देखकर लोग रोमांचित हो उठते हैं। महल के अंदर आप गादी कक्ष देख सकते हैं जहां महाराज प्रताप सिंह का राज्याभिषेक हुआ था।

सुंदर सुरम्य सयाजी बाग  वडोदरा रेलवे स्टेशन के पास महाराजा सयाजीराव गायकवाड के नाम पर विशाल सयाजी बाग बना हुआ है। इस हरे भरे बाग में सुबह शाम टहलने वाले लोगों की भीड़ रहती है। वडोदरा रेलवे स्टेशन के ठीक सामने सयाजीराव विश्वविद्यालय का विशाल परिसर है।


 आपको पता है देश के सबसे बड़े कैंपस विश्वविद्यालय काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना में सयाजीराव गायकवाड का क्या योगदान है। इस विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी का निर्माण उनके द्वारा दिए गए चंदे से हुआ। यह देश की तीसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी है। यह संयोग ही है कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 1990 से 1995 के दौरान अध्ययन करते हुए मुझे पांच साल इस पुस्तकालय में दिन रात पढ़ने का मौका मिला था। 

सयाजीराव के बाद इस वंश में फतेह सिंह, प्रताप सिंह फिर रंजीत सिंह उत्तराधिकारी हुए। क्या आपको पता है कि ग्वालियर रियासत से उत्तराधिकारी ज्योतिरादित्य सिंधिया का विवाह गायकवाड घराने में हुआ है। उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे इसी राज परिवार की बेटी हैं।
-       विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( SAYAJI RAO GAIKWAD, VADODRA ) 

2 comments:

  1. Rochak jankari.
    Apke post ne Vadodara ke dino ki yad dila di. Hamari training 2010 mein M S University mein hi hui thi.
    Dhanyavad

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