Monday, June 10, 2019

बंकिंगघम पैलेस से भव्य है लक्ष्मी विलास पैलेस वडोदरा


डभोई जाना हुआ था ट्रेन से लौटा बस से। मिनी बस ने मुझे कीर्ति स्तंभ चौराहे पर ही उतार दिया है। कीर्ति स्तंभ पोलो ग्राउंड के पास है। यह 1935 की बना हुआ स्तंभ है। इसे महाराजा सयाजीराव गायकवाड के शासन के 60 साल पूरे होने के मौके पर बनवाया गया था।  नेहरु भवन के पास स्थित इस स्तंभ के शीर्ष पर शेर की मूर्ति बनी है। मूर्ति का पार्श्व भाग लक्ष्मी विलास पैलेस के मुख्य द्वार की तरफ है। इस स्तंभ का निर्माण शिल्पी कृष्णराव चौहान ने किया था।

कीर्ति स्तंभ से शेयरिंग आटो लेकर मैं होटल लौट आया। अनादि और माधवी तैयार हैं। हमलोग वडोदरा का लक्ष्मी विलास पैलेस देखने निकल पड़े हैं। लक्ष्मी विलास पैलेस का प्रवेश टिकट 225 रुपये प्रति व्यक्ति है। पर इस टिकट में पैलेस का आडियो गाइड का शुल्क भी शामिल है। पैलेस के अंदर फोटोग्राफी की प्रतिबंधित है। लक्ष्मी विलास पैलेस और महाराजा फतेह सिंह संग्रहालय का संयुक्त टिकट खरीदा जा सकता है। फतेह सिंह म्युजियम का टिकट 150 रुपये का है। आप भुगतान क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से कर सकते हैं। महल सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। हर सोमवार को बंद रहता है।

वडोदरा आए और लक्ष्मी विलास पैलेस नहीं देखा तो क्या देखा। यह देश के बेहतरीन राजसी महलों में से एक है। लक्ष्मी विलास पैलेस को अगर वडोदरा की पहचान कहा जाए तो गलत नहीं होगा। सूर्यास्त के बाद सुनहरे उजाले में इस महल का वैभव और निखर जाता है। इस शानदार पैलेस का निर्माण 1890 में पूरा हुआ था। इसका निर्माण महाराजा महाराजा सयाजीराव गायकवाड ने करवाया था।

इस महल  का डिजाइन बनाने की जिम्मेदारी अंग्रेज आर्किटेक्ट चा‌र्ल्स मंट को दी गई थी। लक्ष्मी विलास पैलेस इंडो सरैसेनिक रिवाइवल वास्तुकला में बनी संरचना है।  इसे दुनिया के आलीशान महलों में गिना जाता है। इस विशाल महल की नींव 1878 में रखी गई थी और इसका निर्माण कार्य 1890 में पूरा हुआ। इस महल की संरचना में राजस्थानी, इस्लामिक और विक्टोरियन वास्तुकला का अनोखा संगम देखने को मिलता है। इसलिए बाहर से देखने में महल के गुंबदों में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च के गुंबद नजर आते हैं।

कुल 700 एकड़ में फैला ये महल लंदन के बंकिघम पैलेस से चार गुना बड़ा है। यह सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस है। ये भारत में अभी तक का बना सबसे बड़ा महल है जिसके अंदर और भी कई भवन स्थित हैं। इसके परिसर में मोती बाग पैलेस, माकरपुरा पैलेस, प्रताप विलास पैलेस और महाराजा फतेह सिंह म्यूजियम स्थित है।

यह महल अपने आप में गयकवाड़ राजवंश की बहुमूल्य वस्तुओं का संग्रहालय है। महल के अंदर प्रवेश करने के साथ अपना आडियो गाइड लगा लिजिए यह हर हॉल में स्थित संग्रह के बारे मेंआपको जानकारी देता जाता है।

शस्त्रों का विशाल व अनूठा संग्रह - महल का शस्त्रागार में आप नवदुर्गा तलवार, शिवाजी और महाराणा प्रताप की तलवार, दूधा तलवार, जापानी समुराई नागिन तलवार देख सकते हैं। नागिन तलवार को आग में लाल करके जहरीले पानी में डूबो दिया जाता था। 

आगे आप शत्रु को धड़ काटने वाली चक्र जैसी मशीन देख सकते हैं। यहां गुरु गोबिंद सिंह द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला हथियार पंच कला भी संग्रह में मौजूद है। आगे सात साल में तैयार की जाने वाली शकीला तलवार के दर्शन कर सकते हैं। गायकवाड राजाओं द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला बघनखा भी यहां देखा जा सकता है। वही बघनखा जिसका इस्तेमाल शिवाजी ने किया था।
लक्ष्मी विलास पैलेस के वैभव और गायकवाड राजाओं के बारे में और भी बातें करेंगे पर अभी बस इतना ही…
-       विद्युत प्रकाश मौर्य
( LAXMI VILAS PALACE VADODARA, KIRTI STAMBH ) 
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