Saturday, June 29, 2019

260 स्तंभों वाली अहमदाबाद की विशाल जामी मसजिद


अहमदाबाद की जामा मस्जिद देश की विशालतम और सुंदरतम मसजिदों में से एक है। भद्रा फोर्ट के आगे तीन दरवाजा के पास स्थित यह मस्जिद शहर की सबसे बड़ी मसजिद है। इस मसजिद का निर्माण 1424 में अहमदशाह प्रथम के शासन काल में हुआ। इसके निर्माण में पीले बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। मसजिद का आंगन काफी विशाल है। इसके तीन तरफ विशाल बरामदे बने हैं।इस मसजिद को देखकर भोपाल की ताज उल मसजिद याद आती है।
जामी मसिद 75 मीटर लंबा और 66 मीटर चौड़े भूखंड में बना है। इसमें अंदर जाने के लिए तीन प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। आंगन में वजू करने के लिए विशाल हौज भी बना हुआ है।


मसजिद में कुल 260 स्तंभ - जामी मसजिद के मुख्य प्रार्थना कक्ष में कुल 260 स्तंभ हैं जिसके सहारे इसकी छत टिकी हुई है। ये खूबसूरत स्तंभ इसे दूसरी मसजिदों से काफी अलग करते हैं। वहीं इसके तीन तरफ बने विशाला बरामदों में कुल 152 स्तंभ हैं। इसके कुछ स्तंभों पर कलश, वृक्ष जैसी आकृतियां बनी है। इसलिए लोग इसे हिंदू शैली से प्रभावित मानते हैं। इतना ही नहीं इस मसजिद का केंद्रीय गुंबद कमल के फूल के आकार का है। गुजराती पुस्तक गुजरात नु पाटनगर अहमदाबाद में दावा किया गया है कि इस मसजिद के निर्माण में हिंदू शैली का इस्तेमाल हुआ है। इसके मुख्य नमाज कक्ष में कुछ इस तरह इंतजाम किया गया है कि सूर्य की रोशनी अंदर तक पहुंचती है।

सन 1819 में आए एक भूकंप में इस मसजिद की दो मुख्य लंबी मीनारें ध्वस्त हो गईं। फिर भी मसजिद की भव्यता में कोई कमी नहीं आई है। जामी मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षेण ( एएसआई ) द्वारा संरक्षित स्मारकों की सूची में है।

महिलाओं को नमाज पढ़ने का अधिकारपंद्रहवीं सदी की इस मसजिद में महिलाओं को नमाज पढ़ने का अधिकार मिल गया था। इस मसजिद में महिलाओं के लिए विशेष हिस्सा बनवाया गया है जिसे मुलाखाना कहते हैं। ऐसा ही इंतजाम भोपाल की ताजुल मसजिद में भी किया गया है। 

सभी धर्म के लोगों का स्वागत  - मसजिद को देखने किसी भी धर्म के लोग जा सकते हैं। बस आपके लिए जरूरी है कि सिर ढका हुआ हो और पहनावा शालीन हो। आजकल इस मसजिद का इंतजाम सुन्नी मुस्लिम वक्त कमेटी अहमदाबाद देखता है।

कुछ लोगों का दावा है कि शहर के बीचों बीच स्थित अहमदाबाद की जामी मसजिद प्राचीन भद्रकाली मंदिर और कुछ जैन मंदिरों को तोड़ कर बनाई गई थी। हालांकि इस दावे की पुष्टि नहीं होती। जामी मसजिद के पश्चिमी हिस्से में अहमदशाह प्रथम का मकबरा है। उसके पास ही उसके बेटे और पोते का भी मकबरा है। अगर आप अहमदाबाद में कभी पहुंचे तो इस मसजिद को जरूर देखें। अहमदाबाद की इस जामी मसजिद में नियमित नमाज होती है। यहां दिनभर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है।


कैसे पहुंचे – शहर के किसी भी इलाके से मानेक चौक, भद्रा फोर्ट या तीन दरवाजा के लिए आटो रिक्शा लें। तीन दरवाजा के पास ही जामी मसजिद का प्रवेश द्वार है। मसजिद के बाहरी इलाके में घना बाजार है। सड़क से गुजरते हुए इस मसजिद की भव्यता का पता नहीं चलता। पर प्रवेश द्वार से अंदर आने पर इसकी विशालता का एहसास होता है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
-        ( JAMI MASJID, AHMADABAD, AHAMAD SHAH )



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