Monday, May 27, 2019

मुंबई से वडोदरा और घुमक्कड़ी दिल से


मुंबई से वडोदरा के लिए हमारी ट्रेन रात 11.40 बजे है। हमलोग बबूलनाथ मंदिर में दर्शन के बाद टैक्सी लेकर मुंबई सेंट्रल स्टेशन पहुंच गए हैं। मुंबई सेंट्रल स्टेशन से पहले भी ट्रेन पकड़ चुके हैं इसलिए ये स्टेशन जाना पहचाना सा है। सीएसएमटी की तुलना में यहां भीड़भाड़ कम होती है। ये तय किया कि रात खाना रेलवे स्टेशन परिसर के रेस्टोरेंट में भी लेंगे। वैसे भी शाम को 4 बजे हमने लंच किया था।

प्रतीक गांधी से मुलाकात - फेसबुक पर एक घुमक्कड़ी के शौकीन लोगों का समूह है घुमक्कड़ी दिल से... मैं इसका हाल में सदस्य बना हूं। इसके एक मोडरेटर हैं प्रतीक गांधी जो मुंबई में ही रहते हैं। कुछ महीनों से मेरा उनसे कई बार संवाद हुआ है। इस बार तय हुआ कि हमलोग मुंबई में मिलेंगे। तो प्रतीक भाई रात 10 बजे के बाद मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर हमलोगों से मिलने पहुंच गए। उनके साथ तकरीब डेढ़ घंटे बातचीत करने का मौका मिला। वे वैसे तो काम शेयर ब्रोकिंग फर्म में करते हैं बहुत बड़े घुमक्कड़ हैं। उनके साथ बातें करके खूब आनंद आया। इस बीच हमने मुंबई सेंट्रल के आईआरसीटीसी की कैंटीन में भोजन किया। इस बार हमारे मीनू में दक्षिण भारतीय स्वाद था। ट्रेन का समय होने लगा है तो हमलोग चले अपने डिब्बे की ओर और प्रतीक भाई अपने घर की ओर। ये कहते हुए कि घुमक्कड़ी दिल से.. मिलेंगे फिर से...

वडोदरा एक्सप्रेस (12927 ) से यह हमारा दूसरा सफर है। इससे हमलोग एक बार वडोदरा से मुंबई आए थे। तब हमारा टिकट आरएसी में था। पर इस बार एसी 3 में तीन बर्थ कनफर्म है। ट्रेन समय पर आकर प्लेटफार्म पर लग गई है। हमलोग अपनी सीट पर जाकर बिस्तर लगाकर सो गए। सुबह का सूरज उगने वाला है और हमारी ट्रेन धीरे धीरे वडोदरा रेलवे स्टेशन में प्रवेश कर रही है। वडोदरा में हमारा होटल पहले बुक है। गोआईबीबो डाट काम से। होटल प्रुडेंट। यह एक तीन सितारा होटल है जो सयाजीगंज में मोनालिसा कांप्लेकेस में है। हमलोग अलकापुरी वाले इलाके में बाहर निकल गए। फिर अपनी गलती का एहसास हुआ तो वापस सयाजीगंज की तरफ आए। 

रेलवे स्टेशन से होटल 200 मीटर की दूरी पर है। होटल से पहले बात कर ली थी, उन्होंने अर्ली चेकइन की अनुमति दे दी थी। होटल का कमरा बड़ा और सुविधाजनक है। सामान फैलाने के बाद स्नान आदि से निवृत होकर हमलोगों ने होटल से नास्ता मंगवाया। नास्ते में पराठे। तो नास्ते के बाद अपनी अगली मंजिल के लिए निकल लिए।  हमारी मंजिल है चंपानेर। होटल से बस स्टैंड पूछते हुए हमलोग आगे बढ़े। वडोदरा का बस स्टैंड रेलवे स्टेशन से महज 100 मीटर की दूरी पर है।

पर यह क्या हमें तो कहीं बस स्टैंड नजर नहीं आ रहा है। एक पांच मंजिला शॉपिंग मॉल सामने है। लोगों ने बताया कि यही बस स्टैंड है। हमलोग मॉल के अंदर प्रवेश कर गए। 

शॉपिंग एरिया के बाद आगे बसों के प्लेटफार्म आ गए। दरअसल वडोदरा जैसा खूबसूरत बस स्टैंड देश में शायद ही कोई दूसरा हो। इसका उदघाटन 2014 में हुआ था। यहां मॉल, सिनेमाघर, बस स्टैंड सब कुछ एक कैंपस में बना हुआ है। सबसे ऊपर की मंजिल पर पीवीआर का सिनेमा घर भी है। आप बस स्टैंड से निकलना ही नहीं चाहेंगे क्योंकि खाने पीने से लेकर खरीददारी के लिए बेहद साफ सुथरे और सुंदर स्टोर यहां बने हुए हैं। 

नीचे बाइक और कार पार्किंग। आधार तल  पर कई साफ सुथरे चमचमाते रेस्टोरेंट और नास्ता घर। मिठाइयों की दुकानें। जबकि पहली मंजिल पर रहने के लिए रियायती होटल और डॉरमेटरी बनाए गए हैं। शॉपिंग मॉल में दुकानें  भी ऐसी की खरीदने के लिए जी ललचाए। प्रवेश और निकास पर सुरक्षा के चाकचौबंद इंतजाम भी किए गए हैं। ऐसे बस स्टैंड से दूसरे राज्यों को भी सीख लेनी चाहिए।   


वडोदरा बस स्टेशन का निर्माण गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम और रियल्टी फर्म क्यूब कंस्ट्रक्शन के बीच एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत हुआ था। यह 114 करोड़ की लागत से निर्मित हुआ है। यह पांच मंजिला टर्मिनस 2.4 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है। तो हमने चांपनेर पावागढ़ के लिए बस ले ली है। आगे की बातें अगले पोस्ट में...
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
 ( VADODRA, BUS STAND, PAWAGARH ) 
-  
       

3 comments:

  1. उस दिन आपसे मिलकर वाकई बहुत अच्छा लगा था और आपके इतिहास के प्रति प्रेम की बाते और आपकी घुमक्कड़ी के किस्से सुनकर और आपके ब्लॉग की शुरुआत खाने घूमने अर्थात दाना पानी के नाम की शुरुआत यह सब आज वापस याद आ गया इस पोस्ट से...आप जैसे बडे और अनुभवी घुमक़्क़ड से बहुत कुछ सीखने को मिला....आपका उतनी दूर से मुरुड देखने आना...वाकई उस दिन मुम्बई सेंट्रल स्टेशन की चाय और कैंटीन का खाना ससब अद्भुत लगा था...

    ReplyDelete
  2. बहुत बढ़िया वर्णन । छोटा है या पता नहीं अधिक के लालच में छोटा लगा लेकिन अपने मे पूर्णता लिए हुए । रही प्रतीक की बात तो हम आपके उसके बारे में ऊपर दिए परिचय से पूर्णतयः सहमत हैं । वडोदरा के बस स्टैंड के विषय मे व्हाट्सएप्प पर पोस्ट मिली थी लेकिन 💖 को यकीन आपसे साक्षात वर्णन के बाद ही हुआ । वैसे वडोदरा की ही तरह आनन्द विहार, अम्बाला, शाहदरा जैसे और भी स्टेशन हैं जहाँ बस अड्डा और रेलवे स्टेशन बल्कि अब तो मैट्रो स्टेशन की भी सुविधा भी साथ साथ मिलने लगी है, जो सचमुच बहुत ही सुविधाजनक रहती है ।
    घुमक्कड़ी 💖 से, मिलेंगे फिर से 👍

    ReplyDelete
  3. कम से कम शब्दों में बढ़िया वर्णन

    ReplyDelete