Saturday, May 25, 2019

मुंबई का बबूलनाथ मंदिर – प्राचीन शिव मंदिर


गेटवे ऑफ इंडिया पर हमलोग रात 8 बजे पहुंचे हैं। हमारी ट्रेन रात 12 बजे मुंबई सेंट्रल से है। हमने एक टैक्सी वाले से बात की। हमें बबूलनाथ मंदिर जाना है। मुंबई में टैक्सी वाले मीटर से चलते हैं। तो हमलोग एक टैक्सी में बैठ गए। उन्होंने हमें बबूलनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर छोड़ दिया।
मंदिर के गेट पर पूजा के फूलों की दुकान है। यहां पर जूते चप्पल उतारे। उसी दुकान पर अपना सारा लगेज भी छोड़ दिया और हमलोग मंदिर में दर्शन के लिए चल पड़े।

बबूल वृक्ष के देवता के रूप में शिव
बबूलनाथ मंदिर मुंबई शहर का सबसे पुराना और प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यह एक छोटी सी पहाड़ी बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण 1780 में हुआ था। यह मंदिर मुंबई के गिरगांव चौपाटी के पास एक छोटीसी टेकरी (पहाड़ी) पर बना है। यहां शिव की बबूल के पेड़ के देवता के रूप में पूजा होती है। यह मंदिर मुंबई के पॉश इलाके मालाबार हिल्स के पास स्थित है।

सैकड़ों साल में महादेव भक्त यहां बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मुख्य मंदिर का संगमरमर का बना हुआ है। इसमें स्थापित शिवलिंगम का सौंदर्य अदभुत है। मंदिर का शिखर दूर से दिखाई देता है। मंदिर के खंबों पर सुंदर नक्काशी है।
कहा जाता है कि जहां बबूलनाथ का मंदिर स्थित है वहां कभी घना जंगल हुआ करता था। तब यहां चरवाहे अपनी गायों को लेकर चराने आया करते थे।

उन्नीसवीं सदी के शुरुआत में जब कई चरवाहे इस जमीन पर अपने पशुओं को चराने लेकर आते थे। पशुओं को चरने के लिए वे खुरपी द्वारा उनके लिए घास भी खोदते थे और जब भी कभी खुरपी की धार कम हो जाती थी तो वे उसे वहां एक पत्थर पर घिस दिया करते थे। उन्हीं चरवाहों में से एक स्वप्न में शिवजी आए और उन्होंने बताया कि यहां शिवलिंगम विराजमान है। जब स स्थल की खुदाई की गई तो यहां शिवलिंगम निकला।

 तो बबूलनाथ का यह मंदिर स्वंभूशिवलिंगम है। लोग इस शिवलिंगम के चारों तरफ चबूतरा बनाकर पूजा करने लगे। बाद में मुंबई के लोगों इस मंदिर में आस्था बढ़ने लगी। जन सहयोग से यह मंदिर विशाल रूप में परिणत हो गया। मंदिर परिसर में शिव परिवार के पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी की प्रतिमाएं जयपुर के कारीगरों से बनवा कर यहां स्थापित कराई गईं।
मंदिर परिसर में एक पुराना विशालकाय पीपल का पेड़ और एक प्राचीन कुआं भी है। सीढ़ियों के रास्ते से मंदिर जाने पर मंदिर के मुख्य द्वार से पहले गणेश जी की विशाल प्रतिमा है। 

सोमवार और महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ उमड़ती है। सावन के एक महीने मंदिर में उत्सव जैसा माहौल रहता है। मंदिर में पर्यावरण बचाने के लिए पॉलीथीन बैग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।


मंदिर में जाने के लिए लिफ्ट - मंदिर में जाने के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लिफ्ट लगाई गई है। इस लिफ्ट के इस्तेमाल के लिए मामूली सा शुल्क देना पड़ता है। आप चाहें तो मुख्य द्वार से पैदल चलते हुए सीढ़ियों को रास्ते से भी मंदिर तक पहुंच सकते हैं। लिफ्ट कारण स्थानीय लोग इस मंदिर को लिफ्ट वाले बाबा भी कहते हैं।
बबूलनाथ मंदिर की जमीन को लेकर 1880 से 1900 तक पारसी समुदाय के साथ अदालत में मुकदमा भी चला। मंदिर के एक शिलापट्ट में इस मुकदमे की जानकारी दी गई है।
कैसे पहुंचे – मुंबई में कहीं से भी बबूलनाथ मंदिर पहुंचना आसान है। यह मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन से काफी नजदीक है। मुंबई सेंट्रल से मंदिर की दूरी ढाई किलोमीटर है। इसका निकटतम रेलवे स्टेशन चर्नी रोड है, जहां मंदिर पैदल चलकर पहुंचा जा सकता है। मंदिर गिरगांव चौपाटी और मालाबार हिल के बीच में स्थित है। बबूलनाथ मंदिर के पास हैंगिग गार्डन और कमला नेहरु पार्क भी स्थित है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( BABULNATH TEMPLE, SHIVA TEMPLE, MUMBAI ) 


 

6 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन तीसरा शहादत दिवस - हवलदार हंगपन दादा और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. सुंदर विवरण

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