Saturday, May 11, 2019

पुणे से अलीबाग वाया लोनावाला-खंडाला-पेण

कई साल पहले फेसबुक पर एक मित्र ने मुंबई के पास मुरुड में समंदर के बीच स्थित जंजीरा किला की तस्वीर साझा की थी। तभी से वहां जाने की इच्छा थी। तो इस बार पुणे से हमने मुरुड जाना तय किया। वैसे दूरी के लिहाज से मुरुड पुणे की तुलना में मुंबई के निकट है। पर हमारी यात्रा पुणे से आरंभ हो रही है। यहां से बस या आरक्षित टैक्सी ही विकल्प है। बसों के बारे में एक दिन पहले ही पता कर लिया था। सभी मुरुड की तरफ जाने वाली बसें स्वारगेट डिपो से चलती हैं। 

पुणे में महाराष्ट्र रोडवेज की सरकारी बसें स्वारगेट के अलावा शिवाजीनदर स्थानक और पुणे रेलवे स्टेशन के बगल में स्थित एक छोटे से स्टैंड से चलती हैं। हमलोग सुबह सुबह उबर टैक्सी से स्वारगेट डिपो पहुंच गए हैं।

सीधे मुरुड जाने वाली बस सुबह सात बजे है। कुल सफर तकरीबन सात घंटे का है। हांलाकि उससे पहले 6.30 बजे अलीबाग तक जाने वाली बस प्रस्थान कर रही है। पर यात्रियों ने सलाह दी कि आप डाइरेक्ट बस में ही बैठें। हालांकि बाद में लगा कि हम अलीबाग तक वाली बस में आ जाते तो थोड़ा समय का सदुपयोग हो जाता है। बात कुछ ऐसी है कि बस चाहे मुंबई से आए या पुणे से या फिर महाराष्ट्र के किसी और शहर से अगर मुरुड जंजीरा जा रही है तो अलीबाग होकर ही जाएगी।
अलीबाग बड़ा बस डिपो है। वहां हर बस दस मिनट रुकने के बाद ही आगे बढ़ती है। हमलोग सुबह सुबह बिना नास्ता लिए घर से निकल पड़े हैं। स्वारगेट डिपो में एक घंटे इंतजार के बाद मुरुड की बस में बैठ गए हैं। तो इससे आधे घंटे पहले वाली बस में अलीबाग तक चले जाते तो वहां दोपहर का लंच करके मुरुड की अगली बस में बैठ जाते।

खैर स्वारगेट से हमारी बस निकल चुकी है। पुणे शहर पर बसों की ट्रैफिक का इतना बोझ है कि स्वारगेट डिपो छोटा पड़ने लगा है। स्वारगेट से निकल कर हमारी बस शिवाजी नगर डिपो पहुंच गई है। शिवाजीनगर डिपो में बस को अंदर जाने और बाहर निकलने में जाम के कारण काफी वक्त लग गया। हमने स्वारगेट जाकर अच्छा किया। क्योंकि हमें बस में मनचाही सीट मिल गई है। हालांकि बस की आधी सीटें ऑनलाइन बुक थीं। पर कंडक्टर महोदय ने हमें आगे की अच्छी सीटें दे दीं।

बस मुंबई मार्ग पर बढ़ती जा रही है। खरडी, दापोली, पिंपरी चिंचवड,  अकुर्डी होती हुई बस आगे बढ़ रही है। इसके बाद  नगडी आया। यह पुणे का बाहरी इलाका है। निजी आपरेटरों काफी बसें नगडी से आरंभ होती हैं। इसके बाद देहु रोड रेलवे स्टेशन दिखाई दिया। फिर तलेगांव के बाद कामशेत होते हुए हमलोग लोनावाला पहुंच गए हैं। 

लोनावाला एक रेस्टोरेंट के आगे चाय नास्ता के लिए आधे घंटे का ठहराव है। तो यहां हमलोगों ने नास्ते में बड़ा पाव लिया। मगनलाल की चिकी खरीदी और खाई। इसके तुरंत बाद बस आगे चलकर लोनावाला स्थानक में भी जाकर पांच मिनट रुकी। स्थानक के अंदर भी रियायती दरों वाली कैंटीन है।

लोनावाला से बस ने मुंबई पुणे हाईवे का रास्ता छोड़ दिया है। खंडाला प्वाइंट होकर बस आगे बढ़ रही है। खोपोली बस स्टैंड में भी बस कुछ मिनटों के लिए रुकी। खालपुर, वडवल के बाद आया पेण। 

पेण में भी बस स्थानक के अंदर जाकर रुकी। पनवेल कोंकण  रेल मार्ग का पेण रेलवे स्टेशन भी है। बस मुंबई गोवा हाईवे पर वडखल से होकर गुजर रही है। सुहानी हवा के हल्के झोंके आ रहे हैं। वेलकम टू अलीबाग सिटी का बोर्ड नजर आ गया है।  हमलोग पांच घंटे सफर कर अलीबाग पहुंच गए हैं। अलीबाग रायगढ़ जिले का प्रमुख शहर है।

कैसे पहुंचे - मुंबई से अलीबाग की दूरी 96 किलोमीटर है जबकि पुणे से अलीबाग की दूरी 145 किलोमीटर है। अलीबाग से मुरुड की दूरी 45 किलोमीटर है। पर मुंबई से अलीबाग आने का दूसरा सुगम रास्ता गेटवे ऑफ इंडिया से फेरी से है। फेरी सेवा से एक घंटे में मंडावा बीच पहुंचा जा सकता है। वहां से 23 किलोमीटर अलीबाग शहर की दूरी शटल बस से तय की जाती है जो फेरी कंपनियों द्वारा ही संचालित किए जाते हैं। अगर आप रेल मार्ग से अलीबाग-मुरुड पहुंचना चाहते हैं तो पेण सबसे सुगम स्टेशन हो सकता है जहां से आपको अलीबाग के लिए बसें मिल जाएंगी।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य ( Email - vidyutp@gmail.com
(PUNE TO MURUD VIA LONAWALA, KHANDALA, PEN, ALIBAUG ) 


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