Tuesday, April 9, 2019

बाबू राव पेंटर और वी शांताराम का कोल्हापुर

कोल्हापुर शहर के बीचों बीच टाउन हाल स्थित है। टाउन हॉल के बाहर सुंदर पार्क है। टाउन हॉल की इमारत में एक छोटा सा पर सुंदर और जानकारी परक संग्रहालय है। इस संग्रहालय का प्रबंधन महाराष्ट्र सरकार करती है। इस संग्रहालय का प्रवेश टिकट महज 3 रुपये है। पर इसके आंतरिक हिस्सों में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। हालांकि बदलते वक्त में इसकी अनुमति दी जानी चाहिए।


कोल्‍हापुर शहर के बीचों बीच स्थित टाउन हॉल की इमारत का निर्माण 1872-1876 के बीच किया गया था। टाउन हॉल के अंदर स्थित संग्रहालय में कई ऐतिहासिक चीजें देखी जा सकती हैं। संग्रहालय में ब्रह्मपुरी से लाई गई वस्‍तुएं, प्राचीन मूर्तियां, सुप्रसिद्ध चित्रकारों द्वारा बनाए गए चित्र, कलाकृतियां, प्राचीन सिक्‍के, कढ़ाई किए गए सामान, वस्‍त्र, तलवारें, बंदूक आदि रखे गए हैं। संग्रहालय में कुल सात गैलरियां हैं।

कभी रोम से होता था व्यापार -  टाउन हॉल परिसर में सरकारी कार्यालय, कोर्ट, सरकारी अस्‍पताल, टेलीफोन विभाग का कार्यालय हैं। इसलिए यहां आसपास में हमेशा भीड़ भाड़ रहती है। यहां के उद्यान में विशाल फव्‍वारा और एक महादेव का मंदिर भी है।
संग्राहलय के अंदर घूमते हुए ये जानकारी मिलती है कि  कभी कोल्हापुर का रोम के साथ भी व्यापार होता था। संग्रहालय में खास तौर पर बरतनों का संग्रह है जिसमें आप  1100 से 1500 ई के बीच के कई बरतन देख सकते हैं। यहां हथियारों का भी बेहतरीन संग्रह है। 


बाबू राव पेंटर की कलाकृतियां -  कोल्हापुर के टाउन हॉल संग्रहालय की सबसे महत्वपूर्ण दीर्घा है पेंटिंग की। यहां पर कई शानदार तैल चित्र देख सकते हैं। इस दीर्घा बाबूराव पेंटर के बनाए चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। बाबू राव पेंटर का समय 1890–1954 का है। उनका मूल नाम बाबूराव मिस्त्री था। कोल्हापुर में 3 जून 1890 को जन्में बाबू राव पेंटर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे अपने भाई आनंदराव पेंटर के साथ पारसी थियेटर के लिए बैकड्रॉप पेंटिंग बनाया करते थे। सन 1919 में बाबू राव पेंटर ने महाराष्ट्र फिल्म कंपनी बनाई और 1920 में अपनी पहली फिल्म हिंदी सैरंध्री बनाई। बाबूराव पेंटर अपनी फिल्मों के स्क्रीन प्ले खुद लिखते थे। बाबूराव पेंटर फिल्मों की दुनिया के साथ साथ पेंटिंग में भी खूब सक्रिय रहे। उन्हें हिंदी सिनेमा में वी शांताराम को ब्रेक देने का श्रेय जाता है। वी शांताराम का जन्म भी 18 नवंबर 1901 में कोल्हापुर में ही हुआ था। 16 जनवरी 1954 को बाबू राव पेंटर का निधन कोल्हापुर में ही हो गया।

टाउन हाल संग्रहालय में बाला गजबरे के बनाए चित्र भी देखे जा सकते हैं। संग्रहालय की मूर्ति दीर्घा में कई ऐतिहासिक मूर्तियां देखी जा सकती हैं। कुछ मूर्तियां टाउन हॉल के बाहर लॉन में भी रखी हुई हैं। टाउन हॉल के परिसर में शिवाजी की 1927 में स्थापित प्रतिमा देखी जा सकती है। परिसर में 1904 का बना हुआ एक ग्लास हाउस भी है।    



कोल्हापुर शहर का जो पुराना किला हुआ करता था उसमें अब राजाराम कालेज है। वहीं कोल्हापुर में छत्रपति शाहू जी महाराज के नाम पर विश्वविद्यालय की भी स्थापना की गई है। हालांकि यूपी के कानपुर विश्वविद्यालय के नाम में भी मायावती के शासन में छत्रपति शाहूजी महाराज का नाम जोड़ दिया गया है।


खुलने का समय - टाउन हॉल संग्रहालय सुबह 10.30 से शाम 5.30 तक खुला रहता है। यह सोमवार को बंद रहता है। पहले बता चुका हूं कि टिकट सिर्फ 3 रुपये का है। शहर  के बीचों बीच स्थित टाउन हॉल कोल्हापुर के किसी भी इलाके से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य
( KOLHAPUR, CHATRAPATI SHAHUJI MHARAJ MUSEUM, TOWN HALL)


2 comments:

  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति 125वां जन्म दिवस - घनश्याम दास बिड़ला और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान जरूर बढ़ाएँ। सादर ... अभिनन्दन।।

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