Sunday, April 28, 2019

सोलापुर नगर के देवता सिद्धेश्वर महादेव


तुलजापुर भवानी के दर्शन करने के बाद बस स्टैंड वापस लौट आया हूं। पर यहां से सोलापुर की बस के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ा। सवारियां ज्यादा हैं पर बसें कम। लगभग एक घंटे इंतजार के बाद बस मिल पाई। भीड़ ज्यादा थी पर जगह मिल गई। शटल बस ने एक घंटे में सोलापुर बस स्टैंड पहुंचा दिया। अब हमारी मंजिल है सिद्धेश्वर मंदिर।

सिद्धेश्वर मंदिर सोलापुर शहर के मध्य में स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यह मंदिर एक विशाल सरोवर के बीच बना हुआ है। ठीक वैसे ही जैसे अमृतसर का स्वर्ण मंदिर। मुंबई से सोलापुर के बीच एक ट्रेन चलती है जिसका नाम सिद्धेश्वर महादेव के नाम पर सिद्धेश्वर एक्सप्रेस रखा गया है। मंदिर परिसर का मुख्य मंदिर भगवान श्री सिद्धरामेश्‍वर को समर्पित है। इसका नक्काशीदार गुंबद सफेद रंग का है। यहां श्री मल्लिकार्जुन स्वामी और भगवान विष्णु की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं।

इस मंदिर का निर्माण श्रीशैलम के श्री मल्लिकार्जुन के प्रतापी भक्त, श्री शिवयोगी सिद्धारामेश्वर महाराज ने कराया। श्री सिद्धारामेश्वर को उनके गुरु ने सोलापुर लौटने और यहां शिव लिंग की स्थापना का आदेश दिया था। उन्होंने अपने गुरु के आदेश का पालन किया और सोलापुर में इस मंदिर का जीर्णोद्वार कराया। श्री सिद्धारामेश्वर ने कुल में 68 शिव लिंग स्थापित किए थे। वे 12वीं सदी के संत थे। उनको लिंगायत धर्म के छह आचार्य में से एक माना जाता है। सोलापुर के लोग मानते हैं कि इस संत के जन्म से शहर की समृद्धि हुई। उन्हें सोलापुर का ग्रामदेवता भी माना जाता है। मंदिर परिसर में ही श्री शिवयोगी की समाधि बनी हुई है।

मंदिर परिसर में चांदी की मढ़ी हुई नंदी प्रतिमा स्थापित है। परिसर में विठोबा और रूक्मिणी मंदिर भी हैं। मंदिर के अंदर कई अति सुंदर नक्काशी भी देखी जा सकती है। अगर रात्रिकाल में मंदिर परिसर में पहुंचते हैं तो मंदिर रात की रोशनी में काफी सुंदर नजर आता है। सिद्धेश्वर मंदिर सोलापुर में वार्षिक गड्डा यात्रा, पिछले 900 वर्षों से मनाया जाता है। यात्रा में सात अलग अलग नंदी ध्वज के साथ सात समुदायों के लोग चलते हैं।

मंदिर में अन्नदानम – सिद्धेश्वर मंदिर परिसर  में श्रद्धालुओं के लिए अन्न श्रेत्र का संचालन किया जाता है। यहां दोपहर और शाम को भक्तों के लिए भोजन परोसा जाता है। साफ सुथरे डायनिंग हॉल में कुरसी टेबल पर भोजन परोसने का इंतजाम है। आप चाहें तो मंदिर के ट्रस्ट में दान दे सकते हैं। मंदिर परिसर में पुस्तक और धार्मिक वस्तुओं की एक विशाल दुकान भी है।

सिद्धेश्वर सरोवर में पानी नहीं – सिद्धेश्वर मंदिर विशाल सरोवर के बीच में बना है। हालांकि इसमें जलस्तर काफी कम हो गया है। इस झील का क्षेत्रफल 36 एकड़ का है जबकि इसका कैचमेंट एरिया 75 एकड़ का है। अधिकतम गहराई 11 मीटर तक है। अब मंदिर तक पहुंचने के लिए स्थायी सड़क बना दी गई है। पर कभी यहां नाव से पहुंचा जा सकता था। मंदिर के सरोवर में पानी की इन दिनों काफी कमी है। सिद्धेश्वर मंदिर तालाब सुधार समिति इस सरोवर को जीवन दान देने की कोशिश में लगा है। सरोवर के कायाकल्प के बाद मंदिर परिसर का सौंदर्य काफी बढ़ जाएगा।  

मंदिर का समय – सिद्धेश्वर मंदिर सुबह छह बजे से रात्रि नौ बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहता है। मंदिर परिसर में वाहन पार्किंग के लिए पर्याप्त इंतजाम है। मंदिर का प्रबंधन श्री सिद्धेश्वर देवस्थानम पंच कमेटी, सोलापुर देखता है।

कैसे पहुंचे – सोलापुर बस स्टैंड से सिद्धेश्वर मंदिर की दूरी तीन किलोमीटर है। शेयरिंग आटोरिक्शा से या फिर पैदल टहलते हुए भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए आवास का निर्माण कराया गया है। यहां फेमिली रूम और डारमेटरी उपलब्ध है। आप कुछ घंटों के लिए कमरा चाहते हैं तो वह भी उपलब्ध है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य Email - vidyutp@gmail.com
( SIDHESHWAR TEMPLE, SOLAPUR ) 



8 comments:

  1. जय सिध्देश्वर देव

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन सरदार हरि सिंह नलवा और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  3. सिद्धेश्वर महादेव की जय । उनके इस ऐतिहासिक मन्दिर पर केन्द्रित ज्ञानवर्धक आलेख के लिए आपको बहुत -बहुत बधाई ।

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