Friday, April 26, 2019

छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी - तुलजापुर भवानी मंदिर

महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले में स्थित तुलजापुर भवानी को छत्रपति शिवाजी की कुल देवी माना जाता है। महाराष्ट्र के लोगों की मां तुलजापुर भवानी में असीम आस्था है। तुलजा भवानी महाराष्ट्र के प्रमुख साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक है। यह देश के 51 शक्तिपीठों में से भी एक देवी मानी जाती हैं।

मां तुलजा भवानी महिषासुर मर्दिनी का ही एक रूप हैं। मां तुलजाभवानी का मंदिर का स्थापत्य मूल रूप से हेमदपंथी शैली से प्रभावित है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 17वीं सदी का बताया जाता है। मंदिर के गुंबद पर अत्यंत सुंदर नक्काशी देखी जा सकती है।
इस मंदिर में  प्रवेश करने के साथ ही दो विशालकाय महाद्वार नजर आते हैं। इससे आगे चलने पर सबसे पहले कलोल तीर्थ स्थित है, जिसमें 108 तीर्थों के पवित्र जल का सम्मिश्रण किया गया है। इसमें उतरने के बाद थोड़ी ही दूरी पर गोमुख तीर्थ स्थित है, जहां जल तीव्र प्रवाह के साथ बहता है। इसके आगे सिद्धिविनायक भगवान गणेश का मंदिर स्थापित किया गया है।

इससे आगे बढ़ने पर सुसज्जित द्वार में प्रवेश करने के बाद मुख्य कक्ष (गर्भ गृह) में माता की स्वयंभू प्रतिमा स्थापित है। गर्भगृह के पास ही एक चांदी का पलंग स्थित है, जो माता के शयन के लिए है। इस पलंग के उलटी तरफ शिवलिंग स्थापित है, जिसे दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि मां भवानी और शिव शंकर आमने-सामने ही बैठे हुए हैं।



शिवाजी को प्रदान किया था तलवार - तुलजापुर भवानी के बारे में मान्यता है कि शिवाजी की तलवार खुद उन्हें देवी मां ने प्रदान की थी। अभी यह तलवार लंदन के संग्रहालय में रखी है। महाराज छत्रपति शिवाजी भी अपने प्रत्येक युद्ध के पहले माता से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां जरूर आते थे।

मां तुलजा भवानी के बारे में ऐसी जनश्रुति है कि यहां स्थापित माता की मूर्ति स्वयंभू है। इस मूर्ति की एक और खास बात यह है कि यह मंदिर में स्थायी रूप से स्थापित न होकर चलायमान हैं। साल में तीन बार इस प्रतिमा के साथ प्रभु महादेव, श्रीयंत्र तथा खंडरदेव की भी प्रदक्षिणा पथ पर परिक्रमा करवाई जाती है।

माता को चढ़ाते हैं साड़ी - यहां आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में माता को साड़ी चढ़ाने की परंपरा है। इसलिए मंदिर के आसपास साड़ियों की दुकानें बड़ी संख्या में है। मंदिर में दर्शन करके बाहर निकलने के बाद बड़ी संख्या में प्रसाद की दुकाने हैं। 
मंदिर का प्रबंधन तुलजापुर भवानी मंदिर संस्थानम देखता है। संस्थानम की ओर से मंदिर के पास विशाल भक्त निवास का निर्माण कराया गया है। वैसे मंदिर के पास कई होटल और धर्मशालाएं भी हैं। तुलजापुर बस स्टैंड में भी श्रद्धालुओं के लिए क्लॉकरुम की व्यवस्था है।

दर्शन के लिए टोकन - मंदिर में दर्शन से पहले हर श्रद्धालु को टोकन लेना पड़ता है। इस कंप्यूटरीकृत टोकन में आपकी तस्वीर खींची जाती है, उसके बाद पास जारी कर दिया जाता है। साल का कोई भी दिन हो मंदिर में दर्शन के लिए लंबी लाइन लगती है। तो माता के दर्शन के लिए दो से तीन घंटे का समय तो मानकर ही चलिए। मंदिर के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है।  

माता के ऑनलाइन दर्शन – अब आप तुलजापुर भवानी के ऑनलाइन दर्शन करके भी माता के आशीर्वाद ले सकते हैं। इसके लिए आपको मंदिर से संबंधित वेबसाइट पर जाना होगा। मराठी में तुलजा भवानी के सम्मान में असंख्य गीत रचे गए हैं।

कैसे पहुंचे - तुलजापुर नगर के बस स्टैंड से मंदिर की दूरी एक किलोमीटर है। 
मंदिर के प्रवेश द्वार तक बाजार है। इन बाजारों से घूमते हुए आप मां के मंदिर तक पैदल पैदल पहुंच सकते हैं। मंदिर से पहले रास्ते में तमाम प्रसाद की दुकाने हैं। यहां आप जूते-चप्पल, बैग आदि रखकर दर्शन के लिए आगे बढ़ सकते हैं।


महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठ - महाराष्ट्र में कुल साढ़े तीन शक्तिपीठ माने जाे हैं। सप्तश्रंगगढ़ की माता को आधे शक्ति पीठ की मान्यता है। यह नासिक से 60 किलोमीटर दूर कलवन तालुका में नंदूरी ग्राम में स्थित है। माहुरगढ़ की रेणुका माता, तुलजापुर भवानी और कोलहापुर की महालक्ष्मी को पूरा शक्तिपीठ माना जाता है। माहुरगढ़ नांदेड़ जिले में है। यह नांदेड़ से 100 किलोमीटर और यवतमाल से 70 किलोमीटर की दूरी पर है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य  Email- vidyutp@gmail.com

( TULJAPUR BHAWANI, SHIVAJI MAHARAJ, SHAKTIPEETH, USMANABAD ) 


8 comments:

  1. सर आपने लिखा है यह महाराष्ट्र के प्रमुख साढ़े तीन शक्तिपीठो से एक है साढ़े तीन शक्ति पीठ याने सर...

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    1. सप्तश्रंगगढ़ की माता को आधे शक्ति पीठ की मान्यता है। यह नासिक से 60 किलोमीटर दूर कलवन तालुका में नंदूरी ग्राम में स्थित है। माहुरगढ़ की रेणुका माता, तुलजापुर भवानी और कोलहापुर की महालक्ष्मी को पूरा शक्तिपीठ माना जाता है। माहुरगढ़ नांदेड़ जिले में है। यह नांदेड़ से 100 किलोमीटर और यवतमाल से 70 किलोमीटर की दूरी पर है।

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  3. सप्तश्रंगगढ़ की माता को आधे शक्ति पीठ की मान्यता है। यह नासिक से 60 किलोमीटर दूर कलवन तालुका में नंदूरी ग्राम में स्थित है। माहुरगढ़ की रेणुका माता, तुलजापुर भवानी और कोलहापुर की महालक्ष्मी को पूरा शक्तिपीठ माना जाता है। माहुरगढ़ नांदेड़ जिले में है। यह नांदेड़ से 100 किलोमीटर और यवतमाल से 70 किलोमीटर की दूरी पर है।

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  4. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 122वां जन्म दिवस - नितिन बोस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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