Tuesday, April 23, 2019

विट्ठलस्वामी मंदिर के प्रवेश द्वार पर संत नामदेव की समाधि

पंढरपुर में विट्ठल स्वामी मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर मराठी के जाने माने संत नामदेव की समाधि है। मराठी में नामदेव को संत शिरोमणि कहा जाता है। उनके नाम पर मंदिर के मुख्यद्वार को संत नामदेव द्वार कहा जाता है। विट्ठल स्वामी के दर्शन करने आने वाले भक्त संत नामदेव की समाधि पर श्रद्धा से सिर झुकाने के बाद ही आगे बढ़ते हैं।


संत नामदेव महाराष्ट्र में जन्मे महान संत-कवि थे। उन्हें ब्रह्मविद्या को आमजन के लिए सुलभ बनाकर पेश किया। मूर्तिपूजा, कर्मकांड, जातपात पर उनके विचारों के कारण उन्हे कबीर का पूर्ववर्ती संत माना जाता है। संत नामदेव का जीवन काल 1270 से 1350 के बीच था।

संत नामदेव अपनी उच्चकोटि की आध्यात्मिक उपलब्धियों के लिए ही विख्यात हुए। पर वे चमत्कारों के सर्वथा खिलाफ थे। वह मानते थे कि आत्मा और परमात्मा में कोई अंतर नहीं है। उनका संदेश था कि परमात्मा की बनाई हुई इस भूमि संसार की सेवा करना ही सच्ची पूजा है।

माना जाता है कि संत नामदेव का जन्म कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन  संवत 1192 ( 26 अक्तूबर 1270) में पंढरपुर में एक सूचिक (दर्जी) परिवार में हुआ था । उनके पिता का नाम दामाशेटी और माता का नाम गोणाई देवी था। हालांकि सातारा जिले में कृष्णा नदी के किनारे बसा नरसी बामणी उनका पैतृक गांव है। संत नामदेव का परिवार विट्ठलस्वामी का परमभक्त था। बचपन से ही नामदेव का संतों के संग उठना बैठना शुरू हो गया था। बच्चों को इकट्ठा करके वे भजन गाने लगते थे। उनका छोटी उम्र में विवाह हो गया। पत्नी का नाम राजाबाई था। नामदेव को परिवार के लोगों ने व्यापार में लगाने की कोशिश की पर उनका मन तो भक्ति में रमा था। 

संत नामदेव ने विसोबा खेचर को अपने गुरु के रूप में स्वीकार किया। विसोबा खेचर का जन्म पैठण में हुआ था, जो पंढरपुर से 50 कोस दूर ओंढ्या नागनाथ नामक प्राचीन शिव क्षेत्र में पड़ता है। इसी मंदिर में इन्होंने संत शिरोमणि श्री नामदेव को शिक्षा दी और अपना शिष्य बनाया। संत नामदेव, संत ज्ञानेश्वर के समकालीन थे और उम्र में उनसे पांच साल बड़े थे।

नामदेव और संत ज्ञानेश्वर का साथ - संत ज्ञानेश्वर और संत नामदेव उत्तर भारत की साथ-साथ यात्रा शुरू की थी। ज्ञानेश्वर मारवाड़ में कोलदर्जी नामक स्थान तक नामदेव के साथ गए। वहां से लौटकर उन्होंने पुणे के पास आलंदी में 1296 ईस्वी में समाधि ले ली।

संत नामदेव और पंजाब - ज्ञानेश्वर के वियोग से नामदेव का मन महाराष्ट्र से उचट गया और वे पंजाब की ओर चले गए। पंजाब के गुरुदासपुर जिले के घोभान में आज भी नामदेव जी का मंदिर मौजूद है। नामदेव ने पंजाबी में भी पद्य रचना की। उनकी बाणी में सरलता है। श्री गुरु अर्जुन देवजी ने उनकी बाणी का संकलन श्री गुरु ग्रंथ साहिब में किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में उनके 61 पद, 3 श्लोक, 18 रागों में संकलित है।

संत नामदेव के अभंग - संत नामदेव ने मराठी में पदों की रचना की जिसे अभंग (भक्तिगीत ) कहा जाता है। मराठी में श्रद्धालु उनके पदों को श्रद्धा से गाते हैं। उनके पद समानता और भक्ति का संदेश देते हैं। संत नामदेव ने 80 साल की आयु में पंढरपुर में 1350 ई में विट्ठलस्वामी के मंदिर के आगे समाधि ले ली।


संत गोरा कुम्हार और नामदेव - महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा में कई संत हुए हैं जिन्होंने अपना संदेश आमफहम जुबान में अपनी बातें रखी। इस कड़ी में तेरहवीं सदी के संत गोरा कुम्हार का नाम आता है। कुम्हार का काम करते समय भी वह निरंतर पांडुरंग के भजन में लीन रहते थे। उनका जन्म महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले के अंतर्गत धाराशिव नामक गांव में हुआ था। उन्हें लोग गोराई काका भी कहते थे। उनका जीवन काल 1267 से 1317 तक माना जाता है। गोरा पंढरपुर वारकरी में जाते थे। उन्हें संत नामदेव का आशीर्वाद मिला था।

भीमा नदी का पानी और प्रदूषण विट्ठलस्वामी मंदिर के नामदेव महाद्वार के सामने बाजार से गुजरते हुए आप भीमा नदी के तट पर पहुंच जाते हैं। यहां पर ग्वालियर के सिंधिया राजघराने द्वारा निर्मित द्वारकाधीश का मंदिर है। आगे इंदौर के होल्कर घराने द्वारा बनवाए गए प्रचीन मंदिर हैं। इस मार्ग पर सुंदर बाजार सजा रहता है। यहां खाने पीने और पूजन-प्रसाद आदि की दुकाने हैं।


मैं भीमा नदी के तट पर पहुंच गया हूं। पर नदी तट पर लगे एक बोर्ड को देखकर भारी निराशा होती है। नगरपरिषद के बोर्ड पर लिखा है कि चंद्रभागा नदी के पानी को कपड़े धोकर, शौच कर या किसी और तरीके से गंदगी फैलाकर दूषित न करें। पर लोग मानते कहां हैं। नदी के तट पर गंदगी का आलम है। नदी तट पर भी कुछ मंदिर बने हैं। नदी में कुछ सजी धजी नावें तैयार हैं। ये नावें लोगों को चंद्रभागा नदी ( भीमा ) की सैर कराती हैं।


-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( BHIMA RIVER, WATER, NAMDEV SAMADHI , GORA KUMHAR, SANT GAYANESHWAR)

2 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 90वां जन्म दिवस - 'शम्मी आंटी' जी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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